अस्पताल में तड़पती रही महिला, 7 घंटे तक डॉक्टर नहीं आए देखने, मौत

शाहजहांपुर। यूपी के शाहजहांपुर में स्वास्थ विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां डाक्टरों की बड़ी लापरवाही के चलते महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि सुबह दस बजे महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। 7 घंटे तक डाक्टरों और नर्स के आगे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन कोई भी मरीज को देखने नही आया। खास बात ये है जब परिजनों ने अस्पताल मे हंगामा किया तो कुछ लोगों ने आरोपी डाक्टर से लेकर सीएमओ और डीएम तक सभी को फोन किया उसके बावजूद एक घंटे तक कोई भी अधिकारी जिला अस्पताल नही पहुंचा जिसके बाद परिवार महिला के शव को बगैर शिकायत करे ही अस्पताल से घर लेकर चला गया।

पत्नी की बिगड़ी तबीयत

पत्नी की बिगड़ी तबीयत

दरअसल थाना सदर बाजार के मोहल्ला हददफ चौकी निवासी भूरा अपनी 40 वर्षीय पत्नी प्रवीन को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। भुरा ने बताया कि उसकी पत्नी को पिछले तीन साल से टीवी की बिमारी हो गई थी। उसका इलाज बरेली में हो रहा था। कल वह अपनी पत्नी को बरेली लेकर गया था जहां कुछ जांच बता दी थी। भुरा के मुताबिक वह रिक्शा चलाता है गरीब होने के कारण वह जांचे प्राईवेट मे नहीं करवा पा रहा था। इसलिए सुबह दस बजे जिला अस्पताल लाए थे। अस्पताल आते ही उसकी पत्नी की तबियत बिगड़ने लगी। उसको अस्पताल मे ही भर्ती करा दिया था। उस वक्त ड्यूटी डाक्टर एमएल अग्रवाल की थी। पति के मुताबिक परवीन को भर्ती तो कर लिया लेकिन सात घंटे तक उसको कोई भी डाक्टर या नर्स देखने तक नही आई। ओर न ही उसको सात घंटे तक कोई दवा दी गई। आखिरकार शाम मे पांच बजे परवीन की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल मे जमकर हंगामा किया। डाक्टर से लेकर सीएमओ और डीएम तक सूचना की गई लेकिन एक घंटे तक किसी भी अधिकारी ने अस्पताल मे आने की जहमत नही उठाई। जिसके बाद परिजन शव को घर लेकर चले गए।

परिजनों का आरोप

परिजनों का आरोप

मृतका के परिजनों का कहना है कि डाक्टर एमएल अग्रवाल की लापरवाही से ही परवीन की मौत हुई है। सात घंटे तक डाक्टर उनके मरीज को देखने क्यों नही आए और क्यों नही उनके मरीज को सात घंटे तक दवा दी गई। अगर परवीन को टाईम पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। परिजनों का कहना है कि यहां इलाज भी नही मिलता है और जब लापरवाही के चलते मरीज मर जाता है तब परिजन कार्यवाही की बात करते है और हंगामा भी करते है उसके बाद बावजूद कोई अधिकारी भी अस्पताल नही पहुंचता है। इससे साफ हो जाता है यहां दवा भी नही मिलती है और न्याय भी नही मिलता है।

अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन

अधिकारियों ने नहीं उठाया फोन

अस्पताल में मौजूद कुछ लोगो ने सीएमओ आरपी रावत को फोन किया तो उनका सीयूजी नंबर नही उठा और न ही सीएमओ साहब ने उस नंबर पर फोन करने की जहमत उठाई। उसके बाद बड़ी उम्मीदों के साथ लोगो ने जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह को फोन किया तो सीयूजी नंबर बात हुई कहा कि पीएनटी पर फोन करके सूचना दे दो। जब उस नंबर पर सूचना दी गई तब परिजनों को उम्मीद जगी कि अब कोई अधिकारी यहां जरूर आएगा जिससे वह डाक्टर की लापरवाही की शिकायत अधिकारियों से कर सकेगें लेकिन परिजन सिर्फ इंतजार करते ही रहे गए एक घंटा बीत जाने के बाद भी किसी भी अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मिलने की जहमत नही उठाई। ऐसे मे सवाल ये उठता है कि जब डाक्टर लापरवाही करते है तो उनकी शिकायत आलाधिकारी से की जाती है लेकिन जब आलाधिकारी ही फोन न उठाएं और डीएम तक किसी शिकायत को गंभीरता से न ले तो उनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा। इस मामले पर जब अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो किसी अधिकारी का फोन तक नहीं उठा।

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