पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी ISI का फेवरेट तरीका है हनीट्रैप, एजेंट करते ऐसे काम, सीमा हैदर भी क्‍या है जासूस?

Seema Haider न्‍यूज एजेंसी ANI के जरिए भारत की हर खबर पर रखती थी नजर, इन फेमस बाबा को करती है फॉलो

Seema Haider न्‍यूज एजेंसी ANI के जरिए भारत की हर खबर पर रखती थी नजर, इन फेमस बाबा को करती है फॉलो

Seema Haider अपने प्रेमी सचिन मीणा के प्‍यार में पाकिस्‍तान से भारत आ गई, अब उसके बारे हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। उत्‍तर प्रदेश की ATS (Anti-Terrorism Squads) भी इस एंगल से जांच और पूछताछ कर रही है कि कहीं खुद को पाकिस्‍तान की आम सी महिला जताने वाली सीमा हैदर कहीं पाकिस्‍तानी क सबसे तेज-तर्रार खूफिया एजेंसी की ISI की भेजी हुई खूफिया एजेंट तो नहीं है?

सीमा हैदर को लेकर ऐसा शक इसलिए हो रहा है कि क्‍योंकि भारत का कट्टर दुश्‍मन देश लगातार पाकिस्‍तानी लगातार ऐसे ही भेष बदलकर जासूस भारत भेजता आया है। जिसमें प्‍यार वो ह‍थियार है जिसका इस्‍तेमाल दुश्‍मन लंबे समय से करते आए है।

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आईएसआई का सबसे ज्‍यादा अजमाया हुआ ये तरीका है हनीट्रैप

पाकिस्‍तान की खूफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI)का सबसे फेवरेट और बार-बार आजमाया जाने वाला तरीका भी ये भी हनी ट्रैप है यानी धोखेबाज प्‍यार। सचिन मीणा तो मामूली सा साधारण सा लड़का हैं पाकिस्‍तान की आईएसआई के भेजे एजेंटों के जाल में बड़े-बड़े अधिकारी तक फंस चुके हैं।

आइए जानते हैं पाकिस्‍तान की ये खूफिया एजेंसी कैसे काम करती है भारत में अपने ट्रेंड एजेंट यानी जासूस भेजकर कैसे खूफिया जानकारी एकत्र करते हैं।

प्‍यार में जाल में फंसा कर निकालते हैं खूफिया जानकारी

प्‍यार के जाल में फंसाना यानी हनीट्रैप वो तरीका है जिसमें ये प्रेम संबंध बनाकर खूफिया जानकारी ली जाती है। ये फेक नाम के साथ संपर्क करते हैं और पहले पुरुष ज्‍यादातर चैक करते हैं और बा में महिला जासूस काम को अंजाम देती है। सीमा हैदर के बारे में ये ही शक किया जा रहा है जो ग्रेटर नोएडा के सचिन मीणा को प्‍यार में फंसाकर अवैध तरीके से नेपाल के जरिए भारत आई।

ये नामी वैज्ञानिक भी हो चुके हैं हनीट्रैप का शिकार

बता दें इससे पहले डीआरडीओ के नामी वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर को ऐसे ही एक पाकिस्‍तानी लड़की ने फोन पर प्‍यार के जाल में फंसाया था और उसने सांइटिस्‍ट से टॉप सीक्रेट निकलवाने में कायम हो गई थी क्‍योंकि वो जारा के प्‍यार में आकर बात ही बात में डीआरडीओ के कामों की सारी बातें शेयर कर दी थी।

सेना के जवान को ये एजेंट करते हैं टॉरगेट

इसी तरह पिछले दिनों कई पाक एजेंट भारतीय के तौर पर पकड़े जा चुके है। सोशल मीडिया के आने के बाद इनका काम आसान हो गया हैं वो सेना के जवानों को ट्रैप करते हैं और फेक प्रोफाइल से अपनी पहचान बताने हैं और जवानों के साथ ऑनलाइन प्रेम संबंध बनाने हैं और धीरे-धीरे विश्‍वासपात्र बनकर सारी खूफिया जानकारी निकाल लेते हैं।

जानें ISI क्‍या है, कौन होता है इसका सरगना

पाकिस्‍तान में वैसे तो कई सीक्रेट एजेंसियां है जिसमें इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI)सबसे बड़ी और शातिर एजेंसी है। ये पाकिस्‍तान सेना का एक अहम हिस्‍सा जैसा ही है। पाकिस्‍तान की जल, थल और वायु सेना के ट्रेंड अफसर और सैनिक आईएसआई के लिए जासूस का पूरी प्‍लानिंग तैयार करते हैं। इसका हेड भी पाकिस्‍तानी सेना जरनल होता है।

ISI को किसने दी है आखिर ट्रेनिंग,बनी बड़ी खूफिया एजेंसी

ये जब पाकिस्‍तान बना उसी के बाद से ही एक्टिव हैं। आईएसआई पाकिस्‍तान की एजेंसी होने के बावजूद इतनी एक्‍सपर्ट कैसे बनी तो इसका जवाब है कि इसे सच अमेरिका की इंटेलिजेंसी सीआईए ने रूस को कमजोर करने के लिए दी थी। दुनिया के कई गरीब देशों की खूफिया एजेंसियों को जब अमेरिका ने ट्रेनिंग दी थी तब पाक की आईएसआई को भी ट्रेनिंग दी थी।

भारत के खिलाफ अजमाने लगा सारे पैतरे

अमेरिका ने तो इसे इस्‍तेमाल करके अपना फायदा किया लेकिन भारत के लिए मुसीबत खड़ी कर दी क्‍योंकि पाकिस्‍तानी खूफिया एजेंसी ने महारत हासिल कर इसे तरीकों को भारत से खूफिया जानकारी निकालने के लिए इस्‍तेमाल करना शुरू कर दिया था। भारत-पाक सीमा खासकर पर सीधे-साधे लोगों को अपने जाल में फंसाती है और यहां के लोगों को अपना जासूस बना देती है।

इन तरीकों से एकत्र करता है खूफिया जानकारी

इनके जरिए भारत से खूफिया जानकारी एकत्र करते हैं और कश्‍मीर, पंजाब समेत अन्‍य सीमाओं पर आतंकी हमले करवाता है। पहचान बदलकर आईएसआई के एजेंट दूतावासों से खूफिया जानकारी निकालते हैं इसके अलावा विदेश पत्रकार के भेष में तो कभी लवर बनकर खूफिया जानकारी एकत्र करने में काययाब हो जाते हैं।

ये आतंकी संगठन इसी की हैं देन

पाकिस्‍तानी के नामी संगठन इसी आईएसआई की बदौलत ही आसित्‍व में आए। जिसमें लश्‍कर एक तैयबा, हरकत उल मुजाहिद्दीन, जैश एक मोहम्‍मद , अलकायदा , जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं, जो इसी की बदौलत फल-फूल रहे है। इन आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग, हथियार भी मुहैय्या करवाता है।

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