लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव का बड़ा दांव, जारी की पहली लिस्ट, जानिए PDA को कितनी जगह मिली

अयोध्या में जिस तरह से भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है और 22 जनवरी प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में श्रद्धालुओँ की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के हौसले बुलंद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी को राम मंदिर का आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा हो सकता है।

लेकिन भाजपा को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी ने खास रणनीति तैयार की है। भाजपा की चुनौती का सामना करने के लिए समाजवादी पार्टी पीडीए फॉर्मूला लेकर आई है। यह खास फॉर्मूला पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक पर आधारित है। समाजवादी पार्टी ने इस फॉर्मूले के तहत आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ही पार्टी के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है।

akhilesh yadav

समाजवादी पार्टी ने 16 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट को जारी कर दिया है। इस लिस्ट में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को मैनपुरी से टिकट दिया गया है। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने कैडर को मजबूत करना चाहती है और यही वजह है कि पार्टी इसके लिए अपनी तैयारी में जुट गई है।

अखिलेश यादव ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटर्स को साधने के लिए जबरदस्त रणनीति तैयार की है। अखिलेश पिछले कुछ दिनों से इसका जिक्र भी कर रहे हैं। वह साफ तौर पर हुंकार भरते हैं कि पीडीए ही 2024 में भाजपा को हराएगा। पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की गई है उसमे इसकी साफ झलक नजर आ रही है।

सपा की 16 उम्मीदवारों की लिस्ट में 11 ओबीसी उम्मीदवार हैं, एक मुस्लिम और एक दलित के साथ एक ठाकुर, एक टंडन, एक खत्री उम्मीदवार को पार्टी ने मैदान में उतारा है। वहीं ओबीसी उम्मीदवारों में सपा ने 4 कुर्मी, 3 यादव, 2 शाक्य, एक निषाद और एक पाल को टिकट दिया है।

सपा ने अयोध्या लोकसभा सीट से दलित वर्ग के पासी उम्मीदवार को टिकट दिया है। बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने सबसे पहले उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है।समाजवादी पार्टी की पहली लिस्ट में परिवार के तीन सदस्यों को टिकट दिया गया है। इसमे डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव का नाम शामिल है। डिंपल यादव को मैनपुरी से टिकट दिया गया है जबकि फिरोजाबाद से अक्षय यादव, बदायूं से अक्षय यादव को टिकट दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण की बात करें तो बड़ी हिंदू आबादी जाटव समुदाय से आती है। इन वोटर्स को मायावती का वोटर माना जाता है। लेकिन हाल में हुए दो चुनाव में इस वोटबैंक में बड़ी सेंधमारी हुई है। वहीं दूसरी बड़ी जाति की बात करें तो यह यादव समुदाय है जिसे सपा का वोटबैंक माना जाता है।

लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस वोटबैंक में भी सेंधमारी की है। प्रदेश में तीसरा सबसे बड़ा मतदाता वर्ग ब्राह्मणों का है जिसे भाजपा का पारंपरिक वोटर माना जाता है। हालांकि यह वर्ग पूर्व में सपा और बसपा को भी अपना समर्थन दे चुका है। हालांकि प्रदेश में मुस्लिम वोटर्स काफी अहम हैं। प्रदेश में तकरीबन 19 फीसदी आबादी मुसलमानों की है।

मुस्लिम वोटर्स का झुकाम सपा और बसपा की ओर ही रहा है। मुस्लिम वोटर्स पहले कांग्रेस को अपना समर्थन देते थे, लेकिन मुलायम और मायावती की बदली राजनीति ने कांग्रेस के इस वोट बैंक पूरी तरह से तितर-बितर कर दिया। बहरहाल देखने वाली बात होगी की आगामी लोकसभा चुनाव में ये जातीय समीकरण किसके पक्ष में सटीक बैठते हैं।

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