रामपुर मनिहारान सीट: यहां दांंव पर लगी है बीजेपी की प्रतिष्ठा

उत्तर प्रदेश की छठी और सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा रामपुर मनिहारान पर न केवल बीजेपी बल्कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, क्योंकि यहां पर 1996 से बसपा का राज है।

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश की छठी और सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा रामपुर मनिहारान पर न केवल बीजेपी बल्कि सपा-कांग्रेस गठबंधन की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, क्योंकि इस सीट पर 1996 से न कमल खिल सका है और न ही साइकिल चल सकी है। हाथ के पंजे का तो यहां पर कोई वजूद ही नहीं रहा है। इस चुनाव में बीजेपी के बडे़ नेताओं का इस सीट पर खासा ध्यान है। बीजेपी और कांग्रेस-सपा गठबंधन ने इस सीट पर जो प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, उनकी राजनीति में ही अपनी ही पकड़ नहीं है।

सहारनपुर: यूपी की छठीं विधानसभा रामपुर मनिहारान, यहां लगी है बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर

रामपुर मनिहारान को कभी नागल विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था। प्रारंभ से ही यह सीट अनुसूचित जाति के व्यक्ति के लिए आरक्षित रही है। इस सीट पर 1993 तक भाजपा के प्रत्याशी अपनी जीत दर्ज करते आए हैं, लेकिन 1996 के बाद बसपा ने इस सीट पर अपना कब्जा किया जो अब तक बरकार चला आ रहा है। प्रदेश में किसी भी दल की सरकार आए, लेकिन इस सीट पर बसपा प्रत्याशी ही अपनी जीत दर्ज कराता है। 1996 में बसपा के इलम सिंह ने इस सीट पर बीजेपी के मामचंद को पराजित किया था, तब से यह सीट बसपा के पास चली आ रही है।

यहां बनी चूड़ियां दूर तक खनकती थी
रामपुर मनिहारान सुरक्षित सीट क्षेत्र बेहद पिछड़ा हुआ है। इस सीट पर हमेशा सरकार और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा रही। सदियों पहले यहां पर कांच की चूड़ियां बनाए जाने के सैकड़ों कारखाने थे, लेकिन न तो सरकार और न ही यहां के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस कारखाने पर कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह कारखाने बंद हो गए। हाल यह है कि इन कारखानों में काम करने वाले कुशल कारीगर भी यहां से पलायन कर गए और फैजाबाद के चूड़ी कारखाने में अपनी सेवाएं देने लगे। इसके अलावा यहां पर खांडसारी उद्योग की भी सैकड़ों इकाईयां थी, जो उपेक्षा के चलते दशकों पहले बंद हो गई। वहीं, राइस मिल भी इसी वजह से बंद हो गई।

इनमें है टक्कर
रविंद्र कुमार मोल्हू, बसपा
देवेंद्र निम, बीजेपी
विश्वदयाल छोटन, सपा-कांग्रेस गठबंधन

जीत का गणित- सर्वाधिक दलित मतदाता, रामपुर मनिहारान से यह रहे विधायक

1991-मामचंद, बीजेपी
1993- मामचंद, बीजेपी
1996- इलम सिंह, बसपा
2002- इलम सिंह बसपा
2005 उप चुनाव सत्तो देवी, बसपा
2007- रविंद्र कुमार मोल्हू, बसपा
2012- रविंद्र कुमार मोल्हू, बसपा

मतदाता
पुरुष मतदाता-160433
महिला मतदाता-136552
थर्ड जेंडर-3
कुल मतदाता-296988
मतदेय स्थल-295
मतदान केंद्र-175

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