करछना सीट की होगी रिकाउंटिंग, उज्जवल रमण की जीत पर सवाल
करछना सीट पर सपा प्रत्याशी उज्जवल रमण सिंह की अप्रत्याशित जीत के बाद भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव में गड़बड़ी की शिकायत की थी जिसके बाद रिकाउन्टिंग के आदेश दिए गए।
इलाहाबाद। इलाहाबाद की जिस करछना विधानसभा सीट पर मोदी मैजिक फेल हुआ और सीट सपा के उज्जवल रमण सिंह के हाथ गई, उसे लेकर सवाल उठाये गये हैं। काउन्टिंग में धांधली की शिकायत मिलने के बाद आयोग ने करछना विधानसभा सीट की मतगणना फिर से कराये जाने के आदेश दिये हैं। चुनाव आयोग से बीजेपी प्रत्याशी पीयूष रंजन निषाद ने शिकायत की थी जिस पर आयोग ने यह निर्णय लिया है। फिर मतगणना होने की सुगबुगाहट के साथ भाजपाई फिर से उत्साह में हैं।

भाजपा प्रत्याशी ने समर्थकों के साथ किया था प्रदर्शन
करछना सीट पर उज्जवल की जीत और भाजपा हार की जैसे ही घोषणा हुई, बीजेपी के पीयूष ने अपनी हार के पीछे वोट काउंटिंग में धांधली का आरोप लगा दिया था। पीयूष अपने समर्थकों संग सड़क पर उतर आये और प्रदर्शन भी किया। लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए शांति व्यवस्था में सहयोग करने को कहा। धांधली की कोई बात नहीं सुने जाने पर पीयूष रंजन ने निर्वाचन आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करायी। चुनाव आयोग मामले की जानकारी होते ही जिला निर्वाचन अधिकारी से जवाब मांगा और फिर मतगणना कराने का आदेश दिया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट आयोग को दी थी। कहा यह जा रहा है कि उस रिपोर्ट पर ही दुबारा मतगणना की सहमति बनी है।

एकलौती सीट पर सपा की बची है इज्जत
इलाहाबाद की करछना विधानसभा सीट एक ऐसी एकलौती सीट है जो सपा के खाते में गई। सपा प्रत्याशी उज्ज्वल रमण सिंह यहां से चुनाव जीतने में सफल रहे। उज्जवल ने कुल 80806 मत हासिल किये जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के पीयूष रंजन निषाद को 65782 मत मिले। उज्जवल ने पीयूष को 14808 मतों से पटखनी दी। जबकि पिछले चुनाव में उज्जवल को हराने वाले दीपक 40998 मत के साथ तीसरे स्थान पर चले गए। सपा ने पूरे जिले में सिर्फ इसी सीट पर साइकिल दौड़ायी है।

भाजपा की हुई थी बस एक हार
इलाहाबाद की 12 में 9 सीटों पर उतरे भाजपा प्रत्याशियों ने हर जगह जीत हासिल की, बस एक करछना ने जीत पर ग्रहण लगा दिया । जबकि अन्य तीन सीटें भाजपा की सहयोगी अपना दल के खाते में गई थी। करछना सीट पर सबसे बड़ा उलटफेर हुआ, यहांं मोदी मैजिक का असर ठीक उल्टा दिखा। बार-बार चुनाव हारने वाले उज्जवल जीत गये। जबकि सपा लहर तक में उज्जवल खाता नहीं खोल पाते थे। सपा की लाज बचाने वाले उज्जवल ने इसी सीट को लगातार दो चुनावों में पराजय झेलने के बाद जीता है । यह बात भाजपा व उसके प्रत्याशी को पच नहीं रही है।












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