श्रमिकों के बाहर आने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने पीएम मोदी का शुक्रिया, दिलाया इस बात का भरोसा

उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग के भीतर फंसे श्रमिक आखिरकार बाहर आ गए हैं। सभी श्रमिक स्वस्थ्य हैं, जिसके बाद हर ओर खुशी की लहर है। सुरंग से श्रमिकों के बाहर आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पीएम मोदी इस रेस्क्यू ऑपरेशन से लगातार जुड़े रहे और वह हर संभव मदद करते रहे।

सीएम धामी ने कहा हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी लगातार इस रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े थे, वह सुबह-शाम दोनों टाइम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी लेते थे, अपना जो सहयोग देना था वो देते थे। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह काम दिया था कि किसी भी तरह से इन सबको बाहर निकालना है। अगर उनका इतना संबल ना होता, सारी हमारी एजेंसिया लगीं तो यह कठिन काम भी आसान हो गया।

Pushkar Singh Dhami

मुख्यमंत्री ने कहा जैसे ही सभी श्रमिक भाई बाहर आए, प्रधानमंत्री का फोन आया था और कहा कि सभी का मेडिकल चेकअप करना है, उनके परिजनों का कुशल लेना है, श्रमिकों को घर पहुंचाने का काम करना है। जितने भी लोग इस काम में लगे थे, खासकर हमारे हमारे उत्तराखंड के देवी-देवताओं ने भी बहुत काम किया।

नितिन गडकरी जी यहां आए उन्होंने भी हर तरह से इसे देखा। जनरल वीके सिंह का मैं विशेष रुप से धन्यवाद देता हूं, वो यहां लगातार कैंप बनाकर रहे और कठिन काम में अपना सहयोग प्रदान कर रहे थे। आने वाले समय में उत्तराखंड में जितने भी टनल हैं उनकी समीक्षा करेंगे। भारत सरकार ने भी सेफ्टी ऑडिट कर दिया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना ना करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा श्रमिकों व उनके परिजनों के चेहरे की ख़ुशी ही मेरे लिये इगास-बगवाल। हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि सिलक्यारा (उत्तरकाशी) में निर्माणाधीन टनल में फंसे सभी 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। सभी श्रमिक भाइयों का अस्थाई मेडिकल कैम्प में प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संचालित इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी ताक़त से जुटी केंद्रीय एजेंसियों, सेना, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपर्ट्स एवं प्रदेश प्रशासन की टीमों का हृदयतल से आभार।

प्रधानमंत्री जी से हम सभी को एक अभिभावक के रूप में मिले मार्गदर्शन एवं कठिन से कठिन स्थिति में उनके द्वारा प्रदान की गई हर संभव सहायता, इस अभियान की सफलता का मुख्य आधार रही। 17 दिनों बाद श्रमिक भाइयों का अपने परिजनों से मिलना अत्यंत ही भावुक कर देने वाला क्षण है।

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