पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की रार: अखिलेश-राजभर के गठबंधन से क्यों डर गई बीजेपी ?

लखनऊ, 15 नवंबर: उत्तर प्रदेश की चुनावी सियासत में एक दूसरे को शह और मात देने का सिलसिला जारी है। इस बीच समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव को पूर्वांचल में गाजीपुर से आजमगढ़ के बीच समाजवादी विजय यात्रा निकालने इजाजत नहीं दी है। दरसअल 16 नवंबर को पीएम मोदी पूर्वांचल एक्सप्रेस वो का उद्धाटन करेंगे और उसी दौरान अखिलेश यादव गाजीपुर से आजमगढ़ तक विजय यात्रा निकालने चाहते थे। बीजेपी और शासन ने सपा की मंशा को भांपते हुए उनके कार्यक्रम को इजाजत नहीं दी है। अब सपा ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है और कहा है कि सरकार के दबाव में अधिकारियों ने अनुमति देने से इंकार किया है क्योंकि अखिलेश यादव की लोकप्रियता से डर गई है।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे

पीएम और अमित शाह का पूर्वांचल पर फोकस
दरसअल पिछला इतिहास बताता है कि पूर्वांचल में जिस भी पार्टी ने जीत हासिल की है, राज्य में उसकी सरकार बनी है। 2017 में बीजेपी ने 26 जिलों की 156 विधानसभा सीटों में से 106 पर जीत हासिल की थी जिसके बाद यूपी में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। इससे पहले भी 2012 में सपा को 85 सीटें मिली थीं जबकि 2007 में बसपा को भी पूर्वांचल से 70 से ज्यादा सीटें मिली थीं। यही वजह है कि अब से बीजेपी के सभी कार्यक्रम ज्यादातर पूर्वांचल में हो रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी खुद कई दौरे कर चुके हैं क्योंकि उन्हें पता है कि पूर्वांचल यदि हाथ से फिसला तो योगी सरकार की वापसी मुश्किल होगी।

पूर्वांचल में अखिलेश-राजभर- अंसारी बंधुओं का गठबंधन अहम
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) अखिलेश यादव के साथ मिलकर 2022 का यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है। इस फैसले के साथ ही यह बहस शुरू हो गई है कि इससे पूर्वांचल की राजनीति पर क्या फर्क पड़ेगा। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने पूर्वांचल में बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने 156 में से 106 में जीत हासिल की। ​​उनकी जीत में सुभासपा की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही थी, लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। वहीं राजभर और अखिलेश के साथ अंसारी बंधुओं ने भी हाथ मिला लिया है जिससे पूर्वांचल का समीकरण काफी रोचक हो गया है।

अनुमति से इनकार पर प्रतिक्रिया देते हुए, सपा प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी ने कहा कि,

"पार्टी ने पखनपुरा (हैदरिया) में सुबह 11.30 से 12.30 बजे के बीच एक सार्वजनिक बैठक की योजना बनाई थी, जिसके बाद विजय रथयात्रा को एक्सप्रेस वे के माध्यम से आजमगढ़ के लिए रवाना होना था लेकिन मंजूरी नहीं दी गई। इस परियोजना को पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा उनके शासन में शुरू किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार इसका श्रेय हथियाने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों ने सरकार के दबाव में अनुमति देने से इनकार किया है।''

योगी आदित्यनाथ

अखिलेश यादव की लोकप्रियता से परेशान बीजेपी
राय ने आरोप लगाया कि राज्य में सपा प्रमुख के समर्थन में लोगों की भारी भीड़ ने भाजपा को परेशान कर दिया है और इसलिए यह बाधा डाल रहा है। एसपी गाजीपुर जिला इकाई के अध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि एक्सप्रेसवे कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन पखानपुरा, वराछावर, कासिमाबाद, हैदरगंज और कई जगहों पर जनसभाएं की जाएंगी। हालांकि गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह के मुताबिक, "समाजवादी पार्टी द्वारा मांगी गई अनुमति उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के रूप में नहीं दी जा सकती है, जिसने परियोजना को अंजाम दिया है, ने इसे सामान्य आवागमन के लिए नहीं खोला है। उद्घाटन होना है। इसलिए अनुमति देना संभव नहीं था।"

प्रशासन ने कहा- 16 के बाद कभी भी प्लान कर सकते हैं अपना कार्यक्रम
अनुमति मांगे गए आवेदन के जवाब में गाजीपुर के डीएम एमपी सिंह व एसपी ने समाजवादी पार्टी को पत्र भेजकर कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन पीएम द्वारा सुल्तानपुर में किया जाएगा और दोपहर 2 से 4 बजे के बीच जनसभा होगी। पत्र में कहा गया है कि "यूपीडा ने पीएम की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेसवे पर आम लोगों को आने-जाने की अनुमति नहीं दी थी। उद्घाटन के बाद ही सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। अनुमति देने में असमर्थता व्यक्त करते हुए, अधिकारियों ने सपा प्रमुख को 17 नवंबर को या किसी भी दिन बाद में कार्यक्रम को फिर से निर्धारित करने का सुझाव दिया है।

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