प्राण वायु के लिए यूपी के अस्पताल में अधिकारी ने किया जुगाड़, एक सिलेंडर से 6 मरीजों को मिल रही ऑक्सीजन

गाजीपुर, मई 1: कोरोना वायरस की दूसरी लहर में हर दिन लाखों की संख्‍या में कोरोना के नए पॉजिटिव मरीज आ रहे हैं। अचानक मरीजों की संख्‍या बढ़ने के कारण अस्‍पतालों पर बोझ बढ़ गया है। जिस कारण देश भर के राज्‍यों की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था ध्‍वस्‍त हो चुकी है। सबसे ज्‍यादा ऑक्‍सीजन के लिए हर ओर त्राहिमान मचा हुआ हैं। ऑक्‍सीजन रिफलिंग सेंटर के सामने परिजनों की लंबी कतारें देख हर किसी का दिल पसीज गया।

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भारत के सर्वाधिक जनसंख्‍या वाले उत्‍तर प्रदेश में ऑक्‍सीजन के लिए हाहाकार मचा है। वहीं उत्‍तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित चिकित्‍सालय में एक जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने ऐसा जुगाड़ करवाया है कि यहां के एक अस्‍पताल में एक ही सिलेंडर से 6 कोरोना मरीजों को ऑक्‍सीजन देकर उनका इलाज किया जा रहा है।

गाजीपुर स्थित जिला चिकित्सालय में मरीजों की जान बचाने के लिए ये व्‍यवस्‍था

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित जिला चिकित्सालय में मरीजों की जान बचाने के लिए ये व्‍यवस्‍था की गई है। कोरोना मरीजों को ऑक्‍सीजन मिल सके इसके लिए यहां कि अधिकारी की मदद से चिकित्‍सकों ने ऐसी उपाय किया है जिससे एक सिलेंडर से कई मरीजों को ऑक्‍सीजन मिल रही हैं।

ये बेहतरीन जुगाड़ किया गया है

बता दें मरीजों की अत्‍यधिक संख्‍या होने के कारण ऑक्‍सीजन सिलेंडर की भारी कमी हो गई है ऐसे में अगर आक्‍सीजन प्‍लांट बढ़ा भी दिए जाएं तो भी अगर उनके लिए कंटेनर और सिलेंडर नहीं होगा तो मरीज को ऑक्‍सीजन सप्‍लाई कैसे की जाएगी। इसी समस्‍या से निजात पाने के लिए गाजीपुर में डाक्‍टर ने टेक्‍नीशियन की मदद से ये बेहतरीन जुगाड़ किया गया है।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाक्‍टर उमेश कुमार ने किया ये जुगाड़

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाक्‍टर उमेश कुमार ने ये जुगाड़ बनाकर एक साथ एक ही सिलेंडर से छह मरीजों को पाइपलाइन की तर्ज पर ऑक्‍सीजन देने का काम किया है। उन्‍होंने बताया कि ऑक्‍सीजन की कमी के कारण हमारे विभाग पर बहुत दबाव पड़ रहा था। यहां तक डिमांड बढ़ने के कारण ऑक्‍सीजन सिलेंडर में लगने वाले उपकरण की भी बाजार में भारी कमी हो गई है। जिसको देखते हुए उन्‍होंने कर्मचारी अनिल की मदद से एक पाइपलाइन के जरिए ऑक्‍सीजन की व्‍यवस्‍था की।

दो अस्‍पतालों में किया गया ये जुगाड़, जानें कितना आता है खर्च

इस जुगाड़ से अस्‍पताल की इमरजेंसी वार्ड और सहेडी शम्‍मे गौसिया मेडिकल कॉलेज में एडमिट मरीजों को ऑैक्‍सीजन देकर उनकी जान बचाई जा रही है। उन्‍होंने बताया प्‍लास्टिक पाइप, पाइप कनेक्‍शन में लगने वाला टी, ज्‍वाइंटर और टोटी के साथ एक सेट बनाने में 1600 से 2000 रुपए का खर्चा आ रहा है। इसके जरिए अस्‍पताल कम संसाधन में अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है। डाक्‍टर ने बताया कि ऐसी व्‍यवस्‍था करके समय पर कोरोना मरीज को ऑक्‍सीजन देकर मरीज को आईसीयू में जाने से बचा सकते हैं। उसका ऑक्‍सीजन लेबल कंट्रोल करके उसकी हालत गंभीर होने से बचाई जा सकती है।

https://www.filmibeat.com/photos/avika-gor-26747.html?src=hi-oi
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