यूपी: ऐसे गांवों को घोषित किया ODF जहां शौचालय के नाम पर बने हैं गड्ढे
इटावा। भारत सरकार ने ऐसे गरीब परिवारों के लिए फ्री शौचालय योजना चलाई है जिसके अंतर्गत जिनकी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है और वह शौचालय निर्माण नहीं करवा पा रहे हैं, उनके लिए अनुदान देकर घर में शौचालय बनवाने में सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना को इटावा अधिकारी पलीता लगा रहे है और इन योजनाओं का बंदरबांट कर रहे हैं।

कागजों में ओडीएफ हुए गांव
कागजों में उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के ग्राम पंचायत भरतपुर खुर्द के ओडीएफ घोषित हुए दो गांवों में शौचालय बन गए और सभी लाभार्थियों को प्रधान के द्वारा शौचालय का पेमेंट करा दिया गया है लेकिन हकीकत इसके उलट है। आरोप है कि प्रधान ने अवैध रूप से शौचालय का पेमेंट निकाल लिया। इन दो गांव में अभी भी शौचालय नहीं बने हैं जबकि दोनों गांव ओडीएफ सत्यापन कानपुर डिवीजन के द्वारा कर दिए गए हैं।

क्या कह रहे लाभार्थी
वहीं विकलांग दिलीप जाटव का कहना है कि मैंने शौचालय के लिए बोला था, नहीं मिला तो मैने गड्ढा में मिट्टी डाल कर बंद कर दिया है। दिलीप जाटव ने बताया कि हमारे बच्चों ने छप्पर में ही दो ईंटें रख दी हैं और बच्चे हमें पकड़ कर ले जाते हैं। हम वहां पर शौच कर लेते है। उसके बाद हमारे बच्चे उसको फेंक देते है। प्रधान ने गड्ढा खुदवाया लेकिन जब पैसा नहीं मिला तो मैंने उसे बंद करवा दिया ।

ग्रामीण का आरोप, 'प्रधान ने मांगे पैसे'
गांव की मुन्नी कोरी का कहना है कि हमने प्रधान जी से खूब कहा, सेक्रेटरी से भी कहा लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की और हमारी टांग भी टूटी है। सबसे कह चुके हैं लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। प्रधान से कहा तो प्रधान पैसा मांगता है, कहता है कि पांच हजार दो तो तुम्हारा शौचालय बन जाएगा नहीं तो खुद बनवा लो। वहीं मुन्नी कोरी का कहना है कि घर की बेटियां और बहुएं खुले में शौच करने जाती हैं तो गांव के लोग सीटी बजाते हैं। हम तो खुले में शौच करने को मजबूर हैं। क्या करें, हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर है, हमारे यहां गड्ढा तीन महीने से खुदा पड़ा है।

क्या कहते हैं अफसर
इटावा के सीडीओ पीके श्रीवास्तव (विकास अधिकारी) का कहना है कि बहादुरपुर और नगला लक्षी ओडीएफ हो गए है। ग्राम सभा से प्रस्ताव आता है कि ओडीएफ हो गया है । इसके बाद हम उसकी जांच कराते हैं। जिला स्तर पर जांच करने के बाद मंडल स्तर से जांच होती है। अगर यह गांव ओडीएफ नहीं है तो जो भी कमियां हैं, पूरी कराई जाएगी। अगर किसी ने गलत रिपोर्ट दी है तो चिन्हित कराएंगे जिन्होंने पैसा देकर शौचालय लिया हो। यह तो वो लोग कहते है , जिन्हें शौचालय नहीं मिला । वह यह सिस्टम नहीं समझते है किसको मिलना है किसको नहीं मिलना है।












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