Lucknow में Dengue को लेकर आई राहत की ख़बर, जानिए क्या कह रहे एक्स्पर्ट
Dengue in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ही नहीं कई शहरों में डेंगू का प्रकोप फैलता जा रहा है। डेंगू के प्रसार के बीच राहत की खबर ये है कि अब पारा गिरने से आने वाले समय में राहत मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य की राजधानी में पिछले कुछ दिनों में मृत मच्छरों के लार्वा देखे गए हैं। यह देखकर स्वाथ्य विभाग भी हैरान है। इसके पीछे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि तापमान में गिरावट होने की वजह से अब मच्छरों की आबादी में कमी आएगी।

तापमान में गिरावट आने से कम होगी मच्छरों की संख्या
जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) रितु श्रीवास्तव ने कहा कि , "पिछले दो दिनों से, जिले भर में मृत (मच्छर) लार्वा देखे जा रहे हैं। ऐसा पारे के स्तर में गिरावट के कारण हो सकता है। इसका मतलब है, आने वाले सप्ताह में मच्छरों की आबादी में काफी कमी आएगी, क्योंकि तापमान में और गिरावट आएगी, खासकर रात में कमी आएगी।" रितु लखनऊ में मच्छरों की रोकथाम के लिए जिम्मेदार टीम का नेतृत्व भी करती हैं। रितु कहती हैं कि, "हमने यह सुनिश्चित किया है कि लार्वा रसायनों से नहीं मरें। इसलिए, गिरता तापमान दांव लगाने का एक सुरक्षित विकल्प है।'
लार्वा का जीवित रहना तापमान पर ही निर्भर होता है
माइक्रोबायोलॉजिस्ट और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय इकाई के पूर्व अध्यक्ष डॉ पीके गुप्ता ने कहा कि लार्वा का जीवित रहना तापमान पर निर्भर है। वह कहते हैं कि, "मच्छर 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान पर गुणा करता है। 25 डिग्री से नीचे कुछ भी मच्छरों के प्रजनन के लिए प्रतिकूल है। गिरते तापमान से डेंगू के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए प्रयासों में और इजाफा होगा।
17 नवंबर से तापमान में आ रही गिरावट
दरअसल 17 नवंबर से शहर के तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। हालांकि डॉ अभिषेक शुक्ला का कहना है कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर 21 दिनों तक जीवित रह सकता है। इसका मतलब यह है कि अभी भी संक्रमण ले जाने वाले मच्छर द्वारा काटे जाने का खतरा है, खासकर जब से तापमान में गिरावट (जिसमें लार्वा जीवित नहीं रह सकता) हाल ही में देखा जा रहा है।
इस साल यूपी में दर्ज किए गए 12 हजार से अधिक मामले
दरअसल राज्य में इस साल डेंगू के 12,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 1,450 अकेले राज्य की राजधानी से थे। प्रयागराज, जौनपुर और वाराणसी में अधिकांश मामले सामने आए। रितु श्रीवास्तव ने कहा, "हमारी टीमें हर सुबह डेंगू के मरीजों के घरों के पास 'फर्स्ट-रिस्पांस' अभ्यास करती हैं। इस प्रक्रिया में स्रोत में कमी शामिल थी, जैसे कि स्थिर पानी और इसी तरह की सफाई। लार्वा, यदि पाया गया, तो उसे भी समाप्त कर दिया गया।












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