New Year 2023: BJP को करना होगा अपनी कमियों पर मंथन, सामने खड़ी हैं चुनौतियां
यूपी में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव ने बीजेपी को कई सबक दिए। सीटों की संख्या कम होने को लेकर हालांकि किसी की जवाबदेही नहीं तय हुई लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार 65 सीटें कम हो गईं।

New Year 2023: उत्तर प्रदेश में साल 2022 की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया था। बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने पर कामयाब हो गई थी। हालांकि विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सीटों की संख्या पिछले चुनाव के मुकाबले कम हुई थीं। इस बार बीजेपी को 255 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा जबकि पिछली बार ये आंकड़ा 300 को पार कर गया था। इसके बाद यूपी में हुए उपचुनावों में बीजेपी का मिला जुला प्रदर्शन रहा। रामपुर-आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में बीजेपी ने बाजी मारी तो साल के अंत में हुए उपचुनावों से बीजेपी को बड़ा सबक मिला। साल 2022 में सामने आई कई कमियों को लेकर बीजेपी आने वाले समय में मंथन करेगी ताकि वह 2024 में होने वाले आम चुनाव में अपनी लक्ष्य को हासिल कर सके।

विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को बरकरार रखने की चुनौती
यूपी में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव ने बीजेपी को कई सबक दिए। सीटों की संख्या कम होने को लेकर हालांकि किसी की जवाबदेही नहीं तय हुई लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार 65 सीटें कम हो गईं। इन सीटों पर बीजेपी क्यों नहीं रणनीति बना पाई और कहां कमी रह गई इसको खोजना बीजेपी के लिए आसान काम नहीं है। हालांकि इतनी सीटें कम आने के बाद भी बीजेपी चुनाव जीत गई थी लेकिन इसी प्रदर्शन को अब नगर निकाय चुनाव में दोहराने की चुनौती है जहां सभी पार्टियां अपना दम खम दिखाएंगी।
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नगर निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
विधानसभा चुनाव के बाद अब नए साल में बीजेपी के सामने भी उम्मीदों का पहाड़ खड़ा है। बीजेपी को विधानसभा चुनाव के साथ ही पिछले निकाय चुनाव के प्रदर्शन को दोहराना चुनौती है। पिछले चुनाव में बीजेपी 13 निगम महापौर जीतने में सफल हुई थी। इस बार सीटें बढ़ने से सीटों की संख्या बढ़कर 17 तक पहुंच गई है। इन 17 सीटों पर बीजेपी को पिछला प्रदर्शन दोहराना होगा। जिस तरह से निकाय चुनाव में महापौर के टिकट को लेकर मारामारी मची है उसमें अच्छे उम्मीदवारों को ढूंढना इतना आसान भी नहीं है।

मुस्लिम में पैठ बनाने के चक्कर में कोर वोटर छिटक रहे
बीजेपी विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से ही नए प्रयोग कर रही है। रामपुर सदर और गोलागोकर्णनाथ में हुए उपचुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी। पदाधिकारियों की माने तो इस चुनाव में गोला में जो रिजल्ट सामने आया वो बीजेपी के लिए काफी अहम था। गोला में कुछ मुस्लिम मतदान केंद्रों पर भी बीजेपी को वोट किया। बीजेपी इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए अब पसमांदा मुस्लिम समाज में पैठ बनाने में जुटी है। इसी अभियान को बीजेपी ने और तेज कर दिया है। रामपुर सदर में चुनाव के दौरान और उससे पहले पसमांदा समाज को लेकर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन बीजेपी की तरफ से किया गया। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुस्लिम को लुभाने के चक्कर में बीजेपी से उसके कोर वोटर छिटक रहे हैं।

खतौली-मैनपुरी के चुनाव ने दिखाया आइना
मैनपुरी और खतौली में हुए उपचुनाव में हार मिलना बीजेपी के लिए बड़ा सबक है। बीजेपी मैनपुरी और खतौली में जिस तरह के दावे कर रही थी उसके उलट परिणाम मिले हैं। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी टेंशन खतौली में जाटों और त्यागाी समाज का वोट न देना है। इन दोनों समुदायों के छिटकने की वजह से बीजेपी को यहां हार कर स्वाद चखना पड़ा। बीजेपी नए साल में इस बात पर भी मंथन करेगी कि पार्टी किन कमियों की वजह से हारी। खासतोर से खतौली में। मैनपुरी में तो बीजेपी लड़ाई कांटे की बता रही थी लेकिन जब रिजल्ट आया तो सपा ने एकतरफा जीत दर्ज की।

2024 के लिए बीजेपी ने रखा है 75 प्लस सीटों का टारगेट
उत्तर प्रदेश में विधाानसभा चुनाव की जीत के बाद हालांकि बीजेपी की नजर यूपी में होने वाले नगर निकाय चुनाव पर है। इस चुनाव में बीजेपी पूरी ताकत के साथ उतरेगी। इसके साथ ही बीजेपी यूपी में 75 प्लस लोकसभा सीटों को जीतने का लक्ष्य बनाया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी को मंथन करना होगा। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अभी कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि चुनाव के बाद वह निर्वाचित अध्यक्ष के तौर पर काम शुरू करेंगे और अपनी टीम का गठन करेंगे।












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