एमएलसी चुनाव ने उड़ाई नींद, दो दिन पहले बीजेपी ज्वाइन करने का भी मिला तोहफा
लखनऊ, 29 जनवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की हलचल तेज होती जा रही है। दस फरवरी को पहले चरण का मदान शुरू हो रहा है लेकिन इस बीच एमएलसी चुनाव की आहट से सभी दलों की परेशानी बढ़ गई है। आयोग ने यूपी में 36 सीटों के चुनाव को लेकर भी तिथियों का ऐलान कर दिया है लेकिन बीजेपी ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई है कि वह इस पर पुनर्विचार करे। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी कार्यकर्ता इस बात को लेकर नाराज है कि लंबे समय से काम करने वालों की जगह दो दिन पहले बीजेपी ज्वाइन करने वालों को तरजीह देकर टिकट पकड़ाया जा रहा है।

एमएलसी चुनाव की अचानक घोषणा से बढ़ी सरगर्मी
केंद्रीय चुनाव आयोग ने विधानसभा के आम चुनाव के साथ ही विधान परिषद के 36 सदस्यों के चुनाव की घोषणा कर राजनीतिक दलों की चुनौती को और बढ़ा दिया है. राजनीतिक दल एक ही समय में दो चुनावों का सामना करने के लिए तैयार नहीं थे। प्रदेश में स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित होने वाले 36 सदस्यों का कार्यकाल 7 मार्च को समाप्त हो रहा है। इनमें ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के सदस्यों के साथ नगरीय निकायों के प्रतिनिधि मतदान करते हैं। ये चुनाव पिछले साल होने का अनुमान लगाया गया था, जब सदस्यों का कार्यकाल छह महीने के लिए छोड़ दिया गया था। लेकिन, कोविड और अन्य कारणों से यह संभव नहीं हो सका।
विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पार्टियों को यकीन हो गया था कि अब ये बाद में ही होंगे. लेकिन, शुक्रवार को अचानक इसकी घोषणा कर दी गई। इसको लेकर बीजेपी के प्रवक्ता हीरो वाजपेयी ने कहा कि आयोग को राजनीतिक दलों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

बीजेपी में दो दिन पहले आने वालों को भी टिकट
बीजेपी ने राकेश सचान को कानपुर देहात के भोगिनीपुर से और सुभाष राय को जलालपुर से टिकट दिया है. श्री सचान हाल ही में कांग्रेस छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे, जबकि जलालपुर से सपा विधायक सुभाष राय 24 जनवरी को भाजपा में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछड़ी जातियों में उनकी अच्छी पकड़ के चलते सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खास रहे हैं। 2009 में फतेहपुर से सांसद होने के बाद पार्टी के लिए काम करते रहे। 2019 में लोकसभा के चुनाव में जब उन्हें समाजवादी पार्टी से टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस में आ गए। कांग्रेस ने उन्हें फतेहपुर सीट से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया लेकिन जीत नहीं सके। उनके भाजपा में जाने की अटकलें काफी दिनों से चल रही थीं। शुक्रवार को भाजपा ने उनका टिकट फाइनल कर दिया।

पुरानी पेंशन पर यूपी सरकार के मुख्य सचिव ने दिया टका सा जवाब
राज्य सरकार ने शुक्रवार को अपने कर्मियों को यह समझाने की कोशिश की कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) पुरानी की तुलना में तुलनात्मक रूप से बेहतर और अधिक लाभकारी है। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर ने कहा, "हमने पाया कि सेवानिवृत्ति के बाद एनपीएस के तहत एक सरकारी कर्मचारी को मिलने वाली राशि पुरानी पेंशन योजना के तहत मिलने वाली राशि से काफी अधिक थी और एक ही पैसा बचत योजनाओं में निवेश करके हमेशा पैसा कमा सकता था।"
दरअसल, राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के आलोक में बैठक आयोजित की गई थी। "समीक्षा बैठक के दौरान यह भी पाया गया कि एनपीएस के तहत ग्रेच्युटी, छुट्टी नकदीकरण और समूह बीमा योजना की सुविधाएं पहले की तरह बरकरार हैं और एनपीएस के तहत कवर किए गए किसी भी कर्मचारी के आश्रितों के पास उपलब्ध पारिवारिक पेंशन को चुनने का विकल्प है।












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