लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कैडर से कनेक्ट होने का ये है Mayawati का गेमप्लान

Mayawati's game plan: आम चुनाव से पहले मायावती की पार्टी अब यूपी के गावों में कैडर कैम्प लगाएगी। इसके लिए मायावती ने गेम प्लान तैयार किया है। प्लान के तहत बसपा अब बड़े कार्यक्रमों की बजाए कैडर कैंप पर फोकस करेगी।

मायावती

BSP to organise camps in UP : उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती अपने कैडर में जान फूंकने के लिए फिर से नया अभियान चलाने वाली हैं। इस बार बीएसपी का यह अभियान गांव स्तर तक चलेगा। हालांकि इस दौरान बड़े कार्यक्रमों की जगह छोटी-छोटी बैठकों को तरजीह दी जाएगी और दबे-कुचले तबके से सीधा कनेक्ट होने का प्रयास किया जाएगा। बीएसपी के रणनीतिकारों के मुताबिक इस अभियान का मकसद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी को गांव स्तर तक मजबूत करना और कैडर को सक्रिय करना है।

आम चुनाव से पहले जनाधार मजबूत करने की कवायद

आम चुनाव से पहले जनाधार मजबूत करने की कवायद

दरअसल यूपी में 11 साल पहले उत्तर प्रदेश में सत्ता गंवाने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी का जनाधार मजबूत करने के लिए ग्रामीण इलाकों में कैंप लगाएगी। बसपा का यह मिशन उसके संस्थापक कांशीराम के उस कैडर खेमे की तर्ज पर होगा, जिसके जरिए पार्टी ने अपना जनाधार फैलाया था और उत्तर प्रदेश में मायावती के नेतृत्व में चार बार सरकार बनाई थी।

गांवों में आयोजित होंगे बसपा के कैडर कैंप

गांवों में आयोजित होंगे बसपा के कैडर कैंप

बसपा के सूत्रों के मुताबिक, बसपा के ये कैडर कैंप मुख्य रूप से गांवों में आयोजित किए जाएंगे, क्योंकि पार्टी ग्रामीण जनता के साथ फिर से अपने आपको कनेक्ट करना चाहती है। ग्रामीण इलाके के ये दबे-कुचले लोग ही पहले पार्टी के कोर वोट बैंक हुआ करते थे। इस अभियान के तहत पार्टी बिना किसी प्रचार या ज्यादा हंगामे के गांवों में कैंप लगाएगी। इस दौरान न तो मंच होगा और न ही कुर्सी और सभी जमीन पर बैठकर बसपा में सभी के सम्मान का संदेश देंगे। पार्टी को उम्मीद है कि इससे उन्हें समाज के दबे-कुचले तबके से सीधा संबंध बनाने में मदद मिलेगी।

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    2007 के बाद से ही कई हार झेल चुकी है बसपा

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    बसपा ने 2007 में राज्य में अपनी सरकार बनाई थी। बाद में समय के साथ ही धीरे-धीरे वह अपना आधार खोती चली जा रही है। क्योंकि वह न केवल राज्य में सत्ता से बाहर थी, बल्कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट जीत सकी है। 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत (206 सीटों) के साथ सरकार बनाने वाली बसपा 2012 में 80 सीटों पर सिमट गई थी। पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान तब हुआ जब मोदी लहर में उसे सभी 80 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा और वह अपना खाता भी नहीं खोल सकी। इसके बाद बसपा 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में 403 में से केवल 19 सीटें जीत सकी।

    विधानसभा चुनाव 2022 में एक सीट पर सिमट गईं मायावती

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    पार्टी ने कट्टर प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और उसे भाजपा का सामना करना पड़ा। वह केवल 10 सीटें ही जीत सकी थी। बसपा ने सपा से अपना गठबंधन तोड़ लिया और 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और अपने इतिहास की सबसे बड़ी हार झेली। बसपा सिर्फ एक सीट जीत पाई है। यह बसपा का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। हालांकि इसके बाद यूपी में हुए लोकसभा के कुछ उपचुनावों में भी बसपा ने हाथ आजमाया लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

    2024 में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं बहनजी

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    इन परिस्थितियों में मायावती ने अब 2024 के आम चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया है। लखनऊ में अपने जन्मदिन (15 जनवरी) पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मायावती ने घोषणा की कि पार्टी आगामी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। उन्होंने कहा कि वह राज्य में किसी से गठबंधन नहीं करेंगी। इसका मुख्य कारण यह है कि गठबंधन के बाद दूसरी पार्टी को बसपा का वोट मिल जाता है लेकिन उसे दूसरी पार्टी का वोट नहीं मिल पाता है। इसके साथ ही पूर्व सीएम मायावती ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव की तैयारी अभी से शुरू करने को कहा है।

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