यूपी उपचुनाव: सपा-बसपा के हाथ मिलाने के पीछे की पूरी कहानी
लखनऊ। यूपी उपचुनाव में बीजेपी को हराने के लिए सपा-बसपा साथ आ गए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को ऐलान किया कि बीजेपी को हराने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार का उनकी पार्टी समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने सपा के साथ किसी प्रकार का गठबंधन नहीं किया है। मतलब साफ है मायावती ने सपा के साथ डील की है। आखिर क्या है यह डील और क्या हैं इसकी शर्तें आइए जानते हैं।

इस वजह के चलते बसपा और सपा ने मिलाया हाथ
गठबंधन के सवाल पर सफाई देते हुए मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सपा और बसपा के बीच अगर गठबंधन होगा तो गुपचुप तरीके से नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि फूलपुर और गोरखपुर में उपचुनाव हो रहे हैं। हमेशा की तरह बसपा ने इन चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम वोट डालने नहीं जाएंगे। हम वोट डालने जाएंगे, इसके लिए पार्टी के लोगों को दिशा निर्देश दे दिए गए हैं। मायावती ने आगे बताया कि यूपी में जल्द ही राज्यसभा चुनाव होना है। सपा और बसपा दोनों के पास पर्याप्त नहीं हैं। राज्यसभा चुनाव में सपा अपना वोट बसपा को ट्रांसफर करेगी। उन्होंने बताया कि हमारी पार्टी में अभी इतने विधायक नहीं हैं कि हम अपना सदस्य चुनकर राज्यसभा भेज सकें। ना ही समाजवादी पार्टी के पास इतनी ताकत है कि वह अपने दो लोगों को राज्यसभा भेज सके। इसलिए हमने तय किया है कि हम उनका एमएलसी बना देंगे और वो अपने वोट हमें ट्रांसफर कर देंगे, ताकि हम राज्यसभा में अपना सदस्य चुनकर भेज सकें।

क्या है राज्यसभा का पूरा गणित
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 36.36 वोट चाहिए. समाजवादी पार्टी के पास 47 वोट हैं। यानी जीत से 10.64 वोट ज्यादा। बीएसपी के पास 19 वोट हैं, यानी जीत से 17.36 वोट कम। समाजवादी पार्टी बीएसपी को 10.64 वोट देगी और कांग्रेस को पास 7 हैं। इस तरह बसपा राज्यसभा में अपना एक सदस्य भेज सकेगी।

लोकसभा में साथ आए सपा-बसपा तो बदल जाएगी तस्वीर
सपा के साथ हुए तालमेल को मायावती ने गठबंधन का नाम देने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी सियासी मजबूरी ही कुछ ऐसी ही है कि सपा के साथ रिश्ते को नाम न देना ही अच्छा है। पहले लोकसभा और उसके बाद विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों बुरी तरह हार का सामना करने वाली सपा और बसपा दरअसल यूपी उपचुनाव में एक प्रयोग करके देख रहे हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो संभव है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा साथ दिखाई दे जाएं। हालांकि, मायावती अभी इससे इनकार कर रही हैं, लेकिन राजनीतिक मजबूरी कुछ भी करा सकती है। वैसे अगर दोनों साथ आते हैं तो समीकरण एकदम बदल सकते हैं। यूपी में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो सपा 28 प्रतिशत और बहुजन समाजवादी पार्टी को 22 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों को जोड़ लें तो आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार जाता है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर 11 मार्च को मतदान होना है और नतीजे 14 मार्च को आएंगे। इसके बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

6 दिनों तक चली बातचीत के बाद लिया गया फैसला
सपा-बसपा के बीच हुई डील के लिए दोनों दलों के बीच करीब 6 दिनों तक बातचीत चली। मीडिया में चल रही चर्चा की मानें तो बातचीत की शुरुआत 27 फरवरी को शुरू हुई थी। सपा की ओर से राम गोपाल यादव जबकि बीएसपी की ओर से सतीश चंद्र मिश्रा ने बातचीत में हिस्सा लिया। दोनों नेताओं ने हर मुद्दे पर गहन चिंतन किया, जिसके बाद रविवार को फैसले का ऐलान किया गया।












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