आसान नहीं होगी इस बार डिंपल यादव की राह, बुआ लगा सकती हैं सेंध, क्या मैनपुरी में हो जाएगा खेला?
Lok Sabha Election: उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट को समाजवादी पार्टी (सपा) का अभेद किला माना जाता है। 34 साल से इस सीट पर लगातार समाजवादियों का कब्जा रहा। लेकिन, इस बार जबरदस्त लड़ाई देखने को मिल सकती है। पार्टी ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल को चुनावी रण में उतारा है।
खास बात यह है कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह के निधन के बाद पहली बार इस सीट पर आम चुनाव हो रहा है। मुलायम के निधन के बाद 2022 में हुए उपचुनाव में डिंपल यादव को साहनुभूति की लहर ने मजबूत किया और जीत दिलाई। लेकिन, इस बार त्रिकोणीय समीकरण देखने को मिल रहा है। क्या है त्रिकोणीय समीकरण?

दरअसल, बीजेपी एक तरफ इस सीट पर सपा का किला भेदने का पूरा जोर लगाने की रणनीति तैयार कर रही है। वहीं, यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन है और सपा ने डिंपल यादव को चुनावी रण में उतार दिया है। उधर, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भी अपना कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में इस बार त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिलेगी।
क्यों कहते हैं सपा का किला?
आपको बता दें कि मैनपुरी लोकसभा सीट पर साल 1989 से लगातार समाजवादियों का कब्जा रहा है। 1989 और 1992 में मुलायम सिंह यादव के गुरु उदयप्रताप सिंह यादव सांसद बने। 1996 से मुलायम सिंह यादव के परिवार का लोकसभा सीट पर कब्जा है। साल 1998 और 1999 में सपा की टिकट पर बलराम सिंह यादव भी सांसद रह चुके हैं। साल 1989 से बीजेपी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है।












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