Mahakumbh 2025 Stampede Tragedy: क्या भगदड़ ने फिर जिंदा कर दिए कोरोना काल के जख्म? दर्द वही था, बस वजह अलग!
Mahakumbh 2025 Stampede Tragedy: प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान 29 जनवरी को हुए भगदड़ हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक घायल हुए। यह त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि इसने लोगों को कोरोना महामारी के उस भयावह दौर की याद दिला दी, जब चारों ओर लाशों के ढेर लगे थे, अस्पताल बेबस थे, और अपनों को खोने का दर्द हर किसी की आंखों में था।
भगदड़ में जान गंवाने वालों के शव अस्पतालों के बाहर पड़े रहे। कोई उन्हें ढूंढ रहा था, कोई अंतिम दर्शन के लिए तरस रहा था। अस्पतालों में जगह कम पड़ गई, और इस दर्दनाक मंजर ने एक बार फिर कोरोना काल की भयावह तस्वीर को सामने ला दिया। दर्द वही, जगह अलग...

क्या भगदड़ ने फिर जिंदा कर दिए कोरोना काल के जख्म?
2020 और 2021 का समय पूरी दुनिया के लिए त्रासदी भरा था, लेकिन भारत में इसकी मार सबसे भयानक थी। यूपी में कोरोना से सरकारी आंकड़ों में 24,000 से ज्यादा मौतें दर्ज हुईं, लेकिन हकीकत इससे कई गुना ज्यादा थी। प्रयागराज में श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में जगह खत्म हो गई थी। आज, 29 जनवरी 2025 को महाकुंभ की भगदड़ के दौरान संगम तट पर बिखरी लाशों की तस्वीरें देखकर लोगों को वही मंजर याद आ गया। फर्क सिर्फ इतना था कि कोरोना में लोग अपनों को छोड़कर भाग रहे थे, और महाकुंभ भगदड़ में लोग अपनों की लाशें ढूंढने के लिए तड़प रहे थे।
भगदड़ से मची तबाही, दर्दनाक दृश्य ने कोरोना की याद दिलाई
गोंडा के जोखू प्रसाद अस्पतालों के चक्कर काट रहे थे, अपने अपने परिजन ननकन को तलाश रहे थे। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आ रहा क्या करूं, लाशों के ढेर में भी तलाश रहा हूं। जोखू प्रसाद की तरह न जानें कितने अपनों से बिछड़ गए। अस्पतालों में लोग अपनों के शवों के लिए बिलखते रहे, एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। फर्श पर पड़ी लाशें, खोए हुए बच्चे, बेसुध माता-पिता...यह सब फिर से वैसा ही था, जैसा कोरोना काल में हुआ था। यहां पढ़ें पूरी खबर...

संगम घाट: आध्यात्मिक स्थल से श्मशान में बदला?
कोरोना के समय प्रयागराज का संगम घाट जहां गंगा-जमुना के पवित्र संगम के लिए जाना जाता था, वहीं शवों से पटा पड़ा था। महाकुंभ भगदड़ के बाद भी यही हुआ। श्रद्धालु आए तो थे अमृत स्नान के लिए, लेकिन कई लोग संगम जोन के किनारे दम तोड़ गए। जहां तक नजर दौड़ाई, वहां बिखरी हुई चप्पलें, लाशें, और खोए हुए बच्चों के रोने की आवाजें गूंज रहीं थीं।

कोरोना और भगदड़: दर्द एक जैसा, जगह और वजह अलग
- कोरोना में मौतें आईं वायरस से, भगदड़ में प्रशासन की चूक से!
- कोरोना में लोग ऑक्सीजन के लिए भागे, भगदड़ में जान बचाने के लिए!
- कोरोना में अस्पतालों में बेड नहीं थे, भगदड़ में इलाज मिलने में देरी।
- कोरोना में लोग अपनों को छोड़कर भागे, भगदड़ में अपनों को ढूंढते रहे।
लेकिन, दर्द वही था - किसी का बेटा नहीं लौटा, किसी की मां नहीं बची, किसी की गोद सूनी हो गई।












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