Mahakumbh 2025: महाकुंभ में प्रदूषित गंगा जल! तीर्थयात्रियों के लिए न बन जाए मुसीबत का सबब
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में अगले साल होने वाले महाकुंभ मेले में गंगा नदी का प्रदूषित पानी लाखों तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इस समस्या पर चिंता जताई है, खासकर गंगा में अपशिष्ट और सीवेज के सीधे प्रवाह के कारण।
महाकुंभ, जो 14 जनवरी 2025 से मकर संक्रांति के पवित्र स्नान के साथ शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि स्नान के साथ समाप्त होगा, दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। लेकिन गंगा की स्थिति पर नियंत्रण न होने से यह आयोजन स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है।

गंगा में प्रदूषण की स्थिति
एनजीटी को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रयागराज में रसूलाबाद से संगम तक आठ किलोमीटर के दायरे में 50 नालों से सीवेज सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है। यह पानी न तो पीने के लिए उपयुक्त है और न ही धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग के लिए। उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च स्तरीय समिति (एचपीसी) को इस समस्या पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
एनजीटी की सख्ती और सरकार की देरी
एनजीटी ने गंगा में सीवेज की समस्या को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अधिकरण ने सरकार की देरी पर असंतोष व्यक्त किया, खासकर तब जब रिपोर्ट तैयार होने का दावा किया गया है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। एनजीटी ने इसे लेकर असंतोष जाहिर करते हुए साफ किया कि त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
गंगा में अपशिष्ट और सीवेज का बहाव केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। महाकुंभ जैसे आयोजन में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। यदि गंगा का पानी स्वच्छ नहीं हुआ, तो इससे कई गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
अब क्या होगा?
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। अगर समय रहते सीवेज का प्रवाह रोका नहीं गया और गंगा को स्वच्छ नहीं किया गया, तो यह महाकुंभ के आयोजन को प्रभावित कर सकता है। 9 दिसंबर को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी।
समाधान की दिशा में कदम
- सीवेज का सही उपचार: गंगा में गिरने वाले 50 नालों का उपचार करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
- जनजागरूकता अभियान: स्थानीय समुदायों को गंगा स्वच्छता के महत्व को समझाना आवश्यक है।
- तेज कार्रवाई: सरकार को त्वरित रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत कर समाधान लागू करना होगा।
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