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Lucknow का त्रेता युग के भगवान राम के भाई लक्ष्‍मण से क्‍या है नाता? Laxmanpuri या लखनपुरी करने की उठी मांग

LUCKNOW का त्रेता युग के भगवान राम के भाई लक्ष्‍मण से क्‍या है नाता? Laxmanpuri या लखनपुरी करने की उठी मांग

 Laxman

उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपने नाम को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं। वर्षों से नवाबों के ये शहर लखनऊ के नाम से विश्‍व भर में जाना जाता है। वहीं अ‍ब इस शहर का नाम बदलने की मांग उठी है। भाजपा सांसद ने लखनऊ का नाम उसका प्राचीन नाम लखनपुर या लक्ष्‍मणपुर करने की मांग की है। जिस पर समाजवादी पार्टी ने आपत्ति जताई है। आइए जानते हैं लखनऊ का सच में प्राचीन नाम लखनपुर या लक्ष्‍मपुर था और इस शहर का त्रेता युग के भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्‍मण से क्‍या नाता है।

 Laxmanpuri या लखनपुरी करने की उठी मांग

Laxmanpuri या लखनपुरी करने की उठी मांग

बता दें प्रदेश के मुखिया योगी आदित्‍यानाथ जिन्‍होंने अपने कार्यकाल में कई शहरों, स्‍टेशनों और जगहों के नाम बदल कर उनके प्रचीन नाम कर दिए हैं उन्‍हें भाजपा सांसद संगम लाल गुप्‍ता ने पत्र लिखकर लखनऊ का नाम बदलकर लखनपुर या लक्ष्‍मणपुर करने की मांग की है। हालांकि इतिहासकारों के लिए लखनफ के नाम और इतिहास को लेकर भिन्‍न- भिन्‍न मत है।

 त्रेता युग के भगवान राम के भाई लक्ष्‍मण से क्‍या है नाता?

त्रेता युग के भगवान राम के भाई लक्ष्‍मण से क्‍या है नाता?

दरअसल, लखनऊ उस क्षेत्र में स्थित है जिसे इतिहास में अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। यहां से राम की नगरी अयोध्‍या मात्र 80 मील की दूरी पर है। पौराणिक मान्‍यता है कि भगवान राम जो कि अयोध्‍या के राजा थे उन्‍होंने अपने भाई लक्ष्‍मण को गोमती नदी के किनारे का ये क्षेत्र भेट किया था। जिसके बाद त्रेता युग में भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्‍मण ने ये गोमती के तट पर ये शहर बसाया।

11वीं शताब्दी में इसे लक्ष्‍मणवती या लखनपुर के नाम से जाना था

11वीं शताब्दी में इसे लक्ष्‍मणवती या लखनपुर के नाम से जाना था

11वीं शताब्दी में इसे लक्ष्‍मणवती या लखनपुर के नाम से जाना था। बाद में लक्ष्‍मणपुरी नाम से भी जाना जाने लगा। लक्ष्‍मण को उत्‍तर भारत में लखन के नाम से भी पुकारा जाता रहा है इसलिए कुछ समय के लिए इस शहर का नाम लखनपुर भी रहा। वहीं अब समाजवादी पार्टी के नेताओं स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि लखनऊ के राजा लाखन पासी थे, इसलिए उनके नाम पर शहर का नाम लखनपुर रखा जाना चाहिए।

लखनऊ में था लक्ष्‍मणटीला जिसे बना दिया मस्जिद

लखनऊ में था लक्ष्‍मणटीला जिसे बना दिया मस्जिद

लखनऊ शहर की वेबसाइट https://lucknow.nic.in/history/ में भी इस बात का जिक्र है कि पुराने लखनऊ में ऊंचा ढूह है जिसे लक्ष्‍मणटीला के नाम से जाना जाता है। यहां पुरातत्‍व विभाग को वैदिक काल के अवशेष भी मिल चुके हैं। लक्ष्‍मणटीला पर पहले प्राचीन मंदिर था जिसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने तुड़वा कर वहां मज्जिद का निर्माण करवा दिया था। याद रहे इसी टीले वाली मज्जिद के सामने योगी सरकार ने लक्ष्‍मण की मूर्ति लगवाने की योजना का ऐलान किया था तब जब कर विवाद शुरू हो गया था।

कैसे पड़ा लखनऊ नाम

कैसे पड़ा लखनऊ नाम

कन्नौज पर अफगानों की विजय के बाद बारहवीं शताब्दी के अंत में अवध ने गजनी के सुल्तान को सौंप दिया, और इस तरह दिल्ली के साम्राज्य का हिस्सा बन गया। अवध ने तब एक मुस्लिम शासक के अधीन कुछ समय के लिए अपनी स्वतंत्रता का दावा किया, लेकिन बाबर द्वारा उसे उखाड़ फेंका गया, और अवध मुगल साम्राज्य का सूबा या प्रांत बन गया। जिसके बाद लखनऊ जो प्राचीन काल कौशल राज्‍य का हिस्‍सा था उस लखनऊ पर वर्षों तक मुस्लिम शासकों ने राज किया। इसका नाम पहले लखनवती और फिर बिगड़ते-बिगड़ते लखनौती और बाद में लखनऊ हो गया। मुस्लिम काल में इसे नवाबों का शहर लखनऊ कहा जाने लगा।

लखनऊ पर इन मुस्लिम शासकों ने किया शासन

लखनऊ पर इन मुस्लिम शासकों ने किया शासन

लखनऊ पर क्रमश: मुगल शासक अकबर, जहांगीर, औरंगजेब, मुहम्‍मदशाह, शआदत खा, सफरदरजंग, शुजाउद्दौला, गाजीउद्दीन हैदर,नसीरुददीन हैदर, मुहम्‍मद अली शाह और सबसे अंत में नवाज वाजिद अली शाह ने शासन किया। मुस्लिम शासकों ने लखनऊ का पुराना हिंदू स्‍वरूप ही नस्‍ते नाबूत कर दिया। मुगल शासकों के कार्यकाल में इस शहर में छोटा और बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा समेत कई इमारतें और मज्जिदें, जमानतखाना, मदरसे और कोठी और ईदगाह बनवाई गई।

लखनऊ कैसे बनी उत्‍तर प्रदेश की राजधानी ?

लखनऊ कैसे बनी उत्‍तर प्रदेश की राजधानी ?

शुजा-उद-दौला के पुत्र आसफ-उद-दौला ने 1775 में राजधानी को फैजाबाद से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया और इसे पूरे भारत में सबसे समृद्ध और चमकदार शहरों में से एक बना दिया था। तीस वर्षों में अवध ने अपना आधा क्षेत्र अंग्रेजों के हाथों खो दिया था। लेकिन लखनऊ के आखिरी मुगल शासक वाजिद अली शाह को बिट्रिश सरकार ने 1856 में गद्दी से उतार दिया था। इसके साथ ही पूरे अवध को बिट्रिश हुकुमत में शामिल कर लिया था। इसके बाद 1902 में नार्थ वेस्‍ट प्रोविन्‍स नाम बदल कर यूनाइटेड प्रोविन्‍स ऑफ आगरा कर दिया था। देश की आजादी के बाद 12 जनवरी 1950 को प्रदेश को नया नाम उत्‍तर प्रदेश दिया गया कि क्‍योंकि ये देश के उत्‍तर में सिथत है इसके साथ ही 1920 में उत्‍तर प्रदेश की राजधानी इलाहाबाद के बजाय लखनऊ कर दी गई। तभी से यूपी की राजधानी लखनऊ है।

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