Lucknow में गोमती नगर की खूबसूरत तस्वीर को चौपट कर रही योगी सरकार

देशभर में फिल्म पद्मावती को लेकर विरोध चल रहा है, भारतीय जनता पार्टी भी फिल्म के विरोध में खुलकर उतर आई है।

लखनऊ। देशभर में फिल्म पद्मावती को लेकर विरोध चल रहा है, भारतीय जनता पार्टी भी फिल्म के विरोध में खुलकर उतर आई है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म को लेकर बाकायदा एक पत्र लिख डाला जिसमे फिल्म के रीलीज के चलते प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला दिया गया है। उपमुख्यमंत्री ने भी खुले तौर पर कह दिया है कि फिल्म से जबतक आपत्तिजनक सीन नहीं हटाया जाता है फिल्म को प्रदेश में रीलीज नहीं होने दिया जाएगा।मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री एक तरफ जहां इन मुद्दों पर अपनी चिंता दिखा रहे हैं तो दूसरी तरफ उनके आवास से महज कुछ किलोमीटर दूर जनता के पैसों से बनी करोड़ों रुपए की योजनाएं अपनी आखिरी सांसे गिन रही हैं, उसका जायजा लेने तक कि उनके पास फुर्सत नहीं है।

 गोमती नगर की दुर्दशा

गोमती नगर की दुर्दशा

खैर यह सब बताने की वजह सिर्फ इतनी है कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सैकड़ों करोड़ रुपए लगाकर मायावती की बसपा सरकार में गोमती नगर का कायाकल्प किया गया था, यहां मरीन ड्राइव सहित तमाम जगहों पर खूबरसूरत पत्थरों को लगाया गया है, जहां बड़ी संख्या में शहर के लोग घूमने के लिए आते हैं और यह शहर के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

उपमुख्यमंत्री के पास है लोक निर्माण विभाग

उपमुख्यमंत्री के पास है लोक निर्माण विभाग

जिस जगह पर गोमती नगर का कायाकल्प किया गया है वह मुख्यमंत्री आवास से बमुश्किल दो किलोमीटर दूर है, लेकिन यहां के हालात देखकर आपको लगेगा जैसे आप किसी जंगल में या फिर निर्माणाधीन स्थल पर आ गए हैं। यह आलम तब है जब खुद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के पास लोक निर्माण विभाग का जिम्मा है। आलम यह है कि यहां सड़क पर कूड़ा फेंका हुआ है, जंगल उग आया है, पत्थरों को तोड़ दिया गया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तमाम ऐसे मुद्दों पर बयान देने में व्यस्त हैं और उन्हें अपने ही पड़ोस में हालात का जायजा लेने की फुर्सत तक नहीं है।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी नहीं दिखती दुर्दशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी नहीं दिखती दुर्दशा

यहां गौर करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ सबसे पहले अखिलेश सरकार के दौरान बनाए गए रिवर फ्रंट का जायजा लेने गए और इसके निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के जांच के आदेश दे दिए हैं, रिवर फ्रंट के आगे के काम को भी रोक दिया गया है। रिवर फ्रंट के पास गोमती नदी का यह आलम है कि यहां गंदगी का अंबार जम गया है और पानी से बदबू आ रही है।

 योगी सरकार में दुर्दशा

योगी सरकार में दुर्दशा

सरकार किसी की भी हो इससे राजनीतिक दलों की जरूर फर्क पड़ता है, लेकिन आम जनता के लिए यह जो भी खर्च निर्माण के दौरान होता है उसका वहन लोगों को ही उठान पड़ता है। ऐसे में सरकार बदलने के बाद दूसरी सरकार के कार्यकाल के दौरान पूर्व की सरकार के निर्माण को दुर्दशा के लिए छोड़ दिया जाता है।

आखिरी सांसे गिन रहा मरीन ड्राइव

आखिरी सांसे गिन रहा मरीन ड्राइव

गोमती नगर को मायावती की वजह से अलग पहचान मिली और यह शहर का मुख्य आकर्षण का केंद्र बना, लेकिन इस आकर्षण के केंद्र पर अपनी पहचान छोड़ने के लिए अखिलेश यादव ने रिवर फ्रंट कि निर्माण कराया जोकि अब लोगों के लिए नया आकर्षण का केंद्र है। लेकिन रिवर फ्रंट के उपर मायावती ने जिस मरीन ड्राइव का निर्माण कराया था वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।

हर तरफ झाड़ियां, जंगल

हर तरफ झाड़ियां, जंगल

अखिलेश सरकार के कार्यकाल में गोमती नगर की अनदेखी शुरू हुई, लेकिन योगी सरकार के कार्यकाल में इसकी दुर्दशा शुरू हो गई। आलम यह है कि यहां गर तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। यहां टहलना तो दूर खड़े होना तक मुश्किल है।

 झाड़ी में बैठकर सेल्फी खींच लीजिए

झाड़ी में बैठकर सेल्फी खींच लीजिए

लोगों के बैठने के लिए जो मार्बल की टेबल बनाई गई है वह चारों तरफ झाड़ी से घिर गई है और हर तरफ सिर्फ गंदगी और गंदगी है। सड़क पर हर तरफ आपको धूल, मिट्टी, कूड़ा आसानी से देखने को मिल जाएगा। जो लोग काफी सालों बात यहां पहुंचेगे उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं होगा कि इस खूबसूरत जगह की यह दुर्दशा हो सकती है।

बिना नाक बंद किए टहलना मुश्किल

बिना नाक बंद किए टहलना मुश्किल

यहां पत्थर की रेलिंग कई जगह पर टूट गई हैं. यहां तक बिजली के खंबे, खूबसूरत लाइटें तक टूट गई हैं। जिस फुटपाथ को लोगों को टहलने के लिए बनाया गया है वहां टहलना तो दूर की बात नाक बंद किए बिना खड़े होना तक मुश्किल है। जगह जगह पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, लोगों ने टेंट बना लिया है।

सरकार की जिम्मेदारी

सरकार की जिम्मेदारी

कहने को तो यहां सुरक्षा गार्ड भी तैनात हैं, लेकिन जब उनसे इस बारे में पूछो तो उनका कहना है कि हम इसके लिए क्या कर सकते हैं, यह तो सरकार को देखना चाहिए। बहरहाल सरकारें किसी की भी हो जनता की पैसों से बनी इन जगहों को सहेजने की जिम्मेदारी मौजूदा सरकार की होती है।

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