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Lucknow Fake Call Center: लखनऊ में फेक कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 12 ठग गिरफ्तार, US नागरिकों को यूं फंसाते थे

Lucknow Fake Call Center Busted: लखनऊ पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 12 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 19 अक्टूबर को की गई, जब पुलिस उपायुक्त (पूर्व) और पीजीआई पुलिस स्टेशन की टीम ने वृंदावन योजना के सेक्टर 18 में स्थित एक फ्लैट में छापा मारा।

इस छापेमारी में अधिकारियों ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए, जिनका इस्तेमाल विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था।

Lucknow Fake Call Center Busted

कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
गिरफ्तार किए गए साइबर अपराधी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाते थे। वे पीड़ितों के कंप्यूटर सिस्टम में त्रुटियां या बग्स डालते, जिससे उनके कंप्यूटर में पॉप-अप मैसेज आने लगते थे। इन पॉप-अप संदेशों के जरिए पीड़ितों को यह बताया जाता था कि उनके कंप्यूटर में समस्या है और उन्हें इसे ठीक करने के लिए तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।

जब पीड़ित समस्या को ठीक करने के प्रयास करते, तो अपराधी तकनीकी सहायता एजेंटों के रूप में उनसे संपर्क करते और उनकी सहमति से उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते थे। इसके बाद, वे फर्जी समस्याएं दिखाकर पीड़ितों को क्रिप्टोकरेंसी या गिफ्ट कार्ड्स के माध्यम से भुगतान करने के लिए मजबूर करते थे। इस धोखाधड़ी के चलते कई पीड़ितों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

क्या-क्या हुआ जब्त

  • 11 लैपटॉप
  • 1 सैमसंग टैबलेट
  • 2 एयरफाइबर यूनिट
  • 2 राउटर
  • 5 हेडफोन
  • 2 माउस
  • 17 मोबाइल फोन

ये सभी उपकरण साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। पुलिस का मानना है कि इनका उपयोग विदेशी नागरिकों के साथ परिष्कृत तरीके से धोखाधड़ी करने के लिए किया जा रहा था।

आरोपियों की पहचान

  • चंदन उर्फ ​​रिकी (कानपुर)
  • मोहन श्याम शर्मा (भरतपुर, राजस्थान)
  • उत्कर्ष गोल्ड स्मिथ (लखनऊ)
  • नीरज कुमार (रायबरेली)
  • करन सिंह (लखनऊ)
  • तरुण गुप्ता (संत कबीर नगर)
  • नीरज पांडे (दिल्ली)
  • सिद्धार्थ कश्यप (गोंडा)
  • रितुराज गुप्ता (लखनऊ)
  • सोमनाथ सिंह (बहराइच)
  • विराट कुमार (चंदौली)
  • रामजानक (बस्ती)

आरोप और कानूनी कार्रवाई
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और आईटी एक्ट के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये आरोप विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी गतिविधियों और संगठित साइबर अपराधों को कवर करते हैं।

आगे की जांच जारी
अभी पुलिस सभी आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये आरोपी पहले भी किसी प्रकार की साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल थे या नहीं। पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस धोखाधड़ी से प्रभावित पीड़ितों को न्याय मिले और इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर के भंडाफोड़ ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से कई निर्दोष विदेशी नागरिकों को बचाया गया है, जो इन ठगों के शिकार बन चुके थे। यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई का संकेत देती है, जो न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पीड़ितों को राहत पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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