मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाना मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नई दिल्ली, 6 मई: उत्तर प्रदेश में भी लाउडस्पीकर के खिलाफ अभियान जारी है। इस बीच इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका डाली गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही कहा कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाना मौलिक अधिकार नहीं है। इस आदेश के बाद से साफ हो गया है कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर को हटाने का अभियान जारी रहेगा। हालांकि बहुत से मंदिरों/मस्जिदों ने स्वेच्छा से ही इसे उतार दिया था।

दरअसल इरफान नाम के एक व्यक्ति ने याचिका दायर कर बदायूं जिले के बिसौली उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के 3 दिसंबर 2021 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें धोरानपुर गांव में नूरी मस्जिद में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। याचिककर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि एसडीएम का ये आदेश अवैध है और ये उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। मामले में न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने बुधवार को आदेश पारित करते हुए कहा कि कानून कहता है कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना संवैधानिक अधिकार नहीं है।
कई राज्यों में विवाद
महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में लाउडस्पीकर को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन उसकी आवाज परिसर के बाहर तक नहीं आनी चाहिए। इसके अलावा लाउडस्पीकरों के लिए कोई नया परमिट जारी नहीं किया जाएगा। इसके बाद राज्य में 17 हजार से ज्यादा धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर को निर्धारित मानक तक सेट किया गया।
महाराष्ट्र के धार्मिक गुरुओं का बड़ा फैसला
वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में भी लाउडस्पीकर पर विवाद जारी है। इस बीच बुधवार को मुंबई में 26 मस्जिदों के धर्मगुरुओं ने बैठक की। जिसमें इस बात पर सहमति बनी कि 26 मस्जिदों में बिना लाउडस्पीकर के ही अजान होगी।












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