Loksabha Election 2024: कर्नाटक की जीत-भारत जोड़ो यात्रा अमेठी में कराएगी राहुल गांधी की वापसी?
कांग्रेस ने अब यूपी में अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने दलित नेता बृजलाल खाबरी को हटाकर अजय राय को प्रदेश की कमाान सौंपी है।
Amethi in Uttar Pradesh: लोकसभा चुनाव से पहले सभी सियासी पार्टियां अपनी राजनीतिक बिसात बिछाने में जुटी हैं। एक तरफ बीजेपी (Bhartiya Janta Party) ने अपने अभियान को तेज कर दिया है तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी पूर्व मंत्री अजय राय का कद बढ़ाकर सवर्ण वोटों को साधने की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। कांग्रेस सूत्रों की माने तो कनार्टक चुनाव में जीत और भारत जोड़ो यात्रा से जिस तरह का माहौल बना है उसको लेकर कांग्रेस काफी उत्साहित है। राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भी कांग्रेस को बड़ी ताकत दी है जिसके बाद अब अमेठी से राहुल के लड़ने की चर्चाएं तेज हो रही हैं।

कनार्टक जीत-भारत जोड़ो यात्रा से कांग्रेस को मिली ताकत
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया था अमेठी की जनता चाहती है कि वो अमेठी से चुनाव लड़ें। राय के बयान के बाद से ही अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या राहुल गांधी एक बार फिर अमेठी का रुख करेंगे। हालांकि राहुल की अमेठी वापसी को लेकर कांग्रेस के पदाधिकारियों का तर्क है कि कर्नाटक की जीत और भारत जोड़ो यात्रा के पहले चरण की सफलता ने कांग्रेस को काफी ताकत दी है। इससे उत्साहित होकर अब कांग्रेस अमेठी में उतरने का दम दिखा रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे-नीतीश भी लड़ सकते हैं यूपी से चुनाव
हालांकि कांग्रेस के सूत्रों की माने तो अंदरखाने ऐसी अटकलें हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री कुमार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी 2024 में उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर भाजपा के गढ़ को बाधित करने के लिए कांग्रेस और उसके भारतीय गठबंधन दोनों सहयोगियों के दृढ़ प्रयास को दर्शाता है। उनकी रणनीति मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करते हुए दलित और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदायों में पैठ बनाने के इर्द-गिर्द ही बनी रहेगी।
INDIA में शामिल हो सकते हैं चंद्रशेखर
मायावती के दलित वोटों के गढ़ को और अधिक नुकसान पहुंचाने के लिए आने वाले हफ्तों में INDIA में चन्द्रशेखर आजाद को भी शामिल किया जा सकता है। कांग्रेस की व्यापक रणनीति से लगता है कि वह इस बार राहुल के साथ ही प्रियंका को उतारने का मूड बना चुकी है। यह गठबंधन की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे उत्तर प्रदेश में मौजूदा राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए किया जाएगा।
सपा के प्रदर्शन में 2022 में हुआ सुधार
हालांकि, राज्य में भाजपा के वर्चस्व को चुनौती देना कोई सीधा काम नहीं है। हाल के नगर निगम चुनावों ने भाजपा की मजबूत स्थिति को प्रदर्शित किया है। चुनाव से ठीक पहले जनवरी 2024 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन इसका लाभ बढ़ा रहा है। विपक्षी गठबंधन इस बात से राहत की सांस ले रहा है कि समाजवादी पार्टी ने पिछले साल के विधानसभा चुनावों में कुछ खोई हुई जमीन वापस पाने में कामयाबी पा ली।
यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर चिंता का सबब
पिछले साल के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 2017 की तुलना में लगभग दो प्रतिशत अंक की वृद्धि हासिल की, जिससे उसका वोट शेयर 2017 में 39.7% से बढ़कर इस बार 41.6% हो गया। जबकि समाजवादी पार्टी का वोट शेयर 21.8% से बढ़कर 32% हो गया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 22.2% से गिरकर 12.7% की गिरावट का सामना करना पड़ा, और कांग्रेस का वोट शेयर 6.3% से घटकर मात्र 2.4% रह गया, जो राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के 3% शेयर से भी नीचे गिर गया।
यूपी में बीजेपी का वोट शेयर बढ़ा
2017 के विधानसभा चुनावों की तुलना में, 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के वोट शेयर में आठ प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP), बीएसपी और आरएलडी, जिन्होंने चुनाव पूर्व गठबंधन बनाया था। उनके संयुक्त वोट शेयर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। यहां तक कि कांग्रेस को भी 2017 की तुलना में अपने वोट शेयर में उल्लेखनीय गिरावट का सामना करना पड़ा। भाजपा ने 2017 के चुनावों में अपना वोट शेयर 41.57% से बढ़कर 49.6% तक पहुंचा दिया था।












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