Rahul Gandhi ने अमेठी से बिना लड़े मानी हार? आखिर रायबरेली से चुनावी दंगल में क्यों उतरे राहुल गांधी
Rahul Gandhi Raebareli Seat: देश की दो बड़ी लोकसभा सीट अमेठी और रायबरेली को लेकर चल रही कांग्रेस आलाकमान की माथापच्ची अब खत्म हो गई है। हालांकि जैसे कयास लगाएं जा रहे थे, वैसा बिल्कुल नहीं हुआ। इससे उलट अमेठी से पार्टी ने केएल शर्मा को उतारा है, जबकि राहुल गांधी अमेठी से नहीं बल्कि रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे।
रायबरेली से आज राहुल गांधी नामाकंन करने जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेठी से बिना लड़े राहुल गांधी ने अपनी हार स्वीकार कर ली, क्योंकि अब तक जो कयास लगाएं जा रहे थे वो ये कि पार्टी अमेठी से राहुल और रायबरेली से प्रियंका गांधी को उतारेगी, लेकिन प्रियंका के मना करने के बाद दोनों सीटों पर बदलाव किया गया है।

पारंपरिक सीट पर अब फाइनल फैसला
अमेठी और रायबरेली दोनों ही कांग्रेस पार्टी की पारंपरिक सीट रही है। अमेठी से जहां संजय गांधी के बाद राजीव गांधी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे रहे हैं तो रायबरेली सीट फिरोज गांधी से होकर इंदिरा गांधी और फिर सोनिया गांधी को संसद भेजती रही है।
रायबरेली बचाने उतरे राहुल गांधी
ऐसे में रायबरेली जिसे कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। उसे बचाने के लिए अब राहुल गांधी आगे आए हैं। इसी के साथ अमेठी को छोड़ने के भी कुछ कारण सामने आ रहे हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो अब अमेठी कांग्रेस के हाथ से निकल चुका है। और अब वहां की चुनावी जंग पहले जैसी गांधी परिवार के झुकाव की नहीं रही।
2014 में ही समझ चुके थे राहुल गांधी!
दरअसल, 2014 के बाद से ही अमेठी कांग्रेस के हाथ से निकलती दिख रही थी। हालांकि 2014 में अमेठी से तीन बड़े नाम पहले राहुल गांधी, दूसरे स्मृति ईरानी और तीसरे कुमार विश्वास थे, जहां राहुल गांधी ने सबको पटखनी दी, लेकिन अगले ही चुनाव 2019 में राहुल गांधी को करारी हाल झेलनी पड़ी। हालांकि राहुल को इसका डर पहले से ही थी, इसलिए उन्होंने केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ा था और वो संसद पहुंचने में कामयाब रहे।












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