यूपी विधानसभा चुनाव 2017: पढ़िए बुलंदशहर के बीजेपी प्रत्याशियों की पूरी राजनीतिक कुंडली

बीजेपी ने बुलंदशहर जिले में दो ब्राह्मण, एक लोधी, एक जाट और एक ठाकुर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

बुलंदशहर। लंबी जद्दोज़हद के बाद बीजेपी हाईकमान ने विधानसभा चुनावों के लिए अपने सूरमाओं को चुनाव मैदान में उतार दिया है। बुलंदशहर जिले की सात सीटों में से छह सीटों पर बीजेपी ने प्रत्याशी घोषित कर दिए है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का गढ़ कहे जाने वाले डिबाई विधानसभा सीट पर अभी किसी प्रत्याशी को घोषणा नहीं की है। ये भी पढ़ें: यूपी विधानसभा चुनाव 2017: बीजेपी की पहली सूची में दलबदलुओं का दबदबा

बुलंदशहर: 7 सीटों में से 6 पर बीजेपी उम्मीदवार घोषित, गुड्डू का पत्ता कटा Bhartiya Janta Party has declared the name of candidates contesting from Bunlandshahr district. Know about them.

बीजेपी ने जिले में दो ब्राह्मण, एक लोधी, एक जाट और एक ठाकुर को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। एक सीट सुरक्षित है, और एक पर उम्मीदवार तय नहीं है। बीजेपी ने सिकन्द्राबाद से विमला सोलंकी और बुलंदशहर सीट से वीरेन्द्र सिरोही पर फिर भरोसा जताया है। बीजेपी के उम्मीदवारों का एलान होते ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। अब सभी की निगाहें सपा, कांग्रेस और रालोद के गठबंधन पर टिकी हैं।

वीरेन्द्र सिंह सिरोही-बुलंदशहर सदर सीट

वीरेन्द्र सिंह सिरोही-बुलंदशहर सदर सीट

बीजेपी ने सदर सीट पर जिले के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वीरेन्द्र सिंह सिरोही को फिर से मैदान में उतारा है। सिरोही जिले के कद्दावर जाट नेता हैं और पूर्व में वह अगौता सीट से विधायक रहते हुए राजस्व मंत्री रह चुके हैं। बता दें कि बुलंदशहर सदर सीट पर टिकट के दावेदारों में पूर्व जिलाध्यक्ष डीके शर्मा और सपा से निष्कासित गुडडू पंडित का नाम चल रहा था। लेकिन बाजी पूर्व मंत्री सिरोही के हाथ लगी। वह 2012 में भी सदर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ थे और सात हजार वोटों के भारी अंतर से बसपा के हाजी अलीम से हारे थे।

खूबियां: वीरेन्द्र सिंह सिरोही साफ सुधरी छवि के नेता है। इनकी जाटों में अच्छी पकड़ है।

कमियां: जनता के बीच में ना जाना इनकी सबसे बड़ी कमी के रूप में देखा जा सकता है। साथ ही, दूसरे समुदायों में इनका कोई जनाधार नहीं है।

अनूपशहर सीट- संजय शर्मा

अनूपशहर सीट- संजय शर्मा

अनूपशहर सीट से बीजेपी ने संजय शर्मा को मैदान में उतारा है। बता दें कि संजय शर्मा एमएलसी का चुनाव लड़ चुके हैं और केंद्रीय मंत्री उमा भारती के नजदीकी माने जाते हैं। संजय शर्मा हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी नरेंद्र भाटी के खिलाफ लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट पर पूर्व विधायक होशियार सिंह की भी मजबूत दावेदारी थी। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का करीबी माना जाता है।

खूबियां: अनूपशहर में संजय शर्मा का काफी अच्छा जनाधार है लोगों से मिलने के लिए 24 घंटे तैयार रहते हैं।
कमियां: संजय शर्मा एमएलसी का चुनाव हार चुके हैं।

शिकारपुर सीट- अनिल शर्मा

शिकारपुर सीट- अनिल शर्मा

खुर्जा से बसपा के टिकट पर दो बार विधायक रहे चुके अनिल शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है। अनिल शर्मा पिछला विधानसभा चुनाव भी इसी सीट से बसपा के टिकट पर लड़े थे और 8 हजार वोटों से सपा के मुकेश पंडित से हारे थे। बता दें कि अनिल शर्मा ने कुछ माह पहले ही बीजेपी ज्वाइन की थी। विधायक बंधुओं (गुडडू पंडित और मुकेश शर्मा) को कड़ी टक्कर देने के कारण वह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पहली पसंद थे।

खूबियां: अनिल शर्मा दो बार खुर्जा से विधायक रहे चुके हैं।

कमियां: शिकारपुर में काफी जनाधार है लेकिन यहां से पिछले चुनाव में हार चुके है। कुछ समय पहले इन पर रेप का आरोप लग चुका है।

स्याना सीट- देवेन्द्र लोधी

स्याना सीट- देवेन्द्र लोधी

पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के बेहद करीबी देवेंद्र लोधी को चुनावी मैदान में उतारा है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने जब-जब बीजेपी छोड अपनी पार्टी बनाई तब-तब वह बाबूजी के साथ रहे। स्याना में बीजेपी से टिकट बाबूजी के साथ ईमानदारी को लेकर ही देखा जा रहा है। इस सीट से अनीता लोधी राजपूत समेत कई नेता दावा कर रहे थे, लेकिन पूर्व सीएम के करीबी ने बाजी मार ली।

खूबियां: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबी माने जाते हैं। इनको सिर्फ और सिर्फ कल्याण सिंह के बेहद खास होने का लाभ मिला है।

कमियां: देवेन्द्र लोधी का क्षेत्र में कोई जनाधार नही हैं।

सिकन्द्राबाद सीट- विमला सोलंकी

सिकन्द्राबाद सीट- विमला सोलंकी

बीजेपी ने मौजूदा विधायक विमला सोलंकी को बरकरार रखा है। पिछला चुनाव विमला सोलंकी मामूली अंतर से जीती थीं। ठाकुर बाहुल्य सीट होने के कारण उनकी सीट तय मानी जा रही थी। पार्टी में उनकी सक्रियता और निर्विवाद छवि को देखते हुए पार्टी ने उनको मैदान में उतारा है।

खूबियां: विमला सोलंकी का सिकन्द्राबाद सीट पर अच्छा जनाधार है। लोगों की समस्याओं भी सुनती हैं।

कमियां: पिछले सत्र में कोई भी काम धरातल तक नहीं पहुंचा इसलिए जनता नाराज है।

खुर्जा सीट- बिजेन्द्र खटीक

खुर्जा सीट- बिजेन्द्र खटीक

बीजेपी ने खुर्जा (सु0) सीट से नए चेहरे को मैदान में उतारा है। बिजेन्द्र खटीक को केन्द्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा का करीबी माना जाता है। माना रहा है कि उनके टिकट में केन्द्रीय मंत्री की भूमिका रही है। खुर्जा के निवर्तमान विधायक बंशी पहाड़िया भी खटीक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इसको देखते हुए भी बिजेन्द्र को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर पूर्व विधायक होराम सिंह, मीनाक्षी सिंह समेत कई दावेदार थे।

खूबियां: बिजेन्द्र खटीक की पत्नी खुर्जा से ब्लाक प्रमुख हैं।

कमियां: खुर्जा सीट पर बिजेन्द्र खटीक का जनाधार कम है। वे लोगों के लिए एक दम नया चेहरा हैं।

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