चुनावी शंखनाद : महादेव का डमरू बाजे, नाचे मगन संन्यासी, बम-बम बोल रहा है काशी
लखनऊ, 14 दिसंबर। एक तरफ बाबा विश्वनाथ का दरबार और दूसरी तरफ पुण्य सलिला मां गंगा की धारा। एक साथ दर्शन की अनुपम अनुभूति। जो कल तक असंभव था आज संभव है। गंगा जी के घाट से जल लेकर सीधे मंदिर में प्रवेश कीजिए और मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा का अभिषेक कीजिए। आध्यात्मिक आनंद का एक अतुलनीय अवसर। लेकिन भक्ति की इस भावना में राजनीति का भाव भी समाहित है। काशीपुराधिपति के द्वार से एक रास्ता राजनीति के अंत:पुर तक निकल रहा है।

डमरू के डम डम पर पूरा काशी बम बम बोल रहा है। शंख की ध्वनि काशी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में एक साकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही है। औरंगजेब और शिवाजी का प्रसंग सुन कर राष्ट्रधर्म की भावना तरंगित होने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया। इससे भाजपा की चुनावी संभावनाओं को एक नयी शक्ति मिली है।

भावनात्मक उभार की कोशिश
सोमवार को एक तरफ राहुल गांधी ने जयपुर में कहा कि वे हिंदू हैं लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं। दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी ने काशी में हिंदुत्व और राष्ट्रधर्म की की प्राचीन अवधारणा को पुर्नरेखांकित किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अहमियत केवल सत्ता कायम रखने तक सीमित नहीं है। यह नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए जीवन-मरण का भी प्रश्न है। दिल्ली के सिंहासन का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही गुजरता है। कृषि कानून वापस लिये जाने के बाद भाजपा फिर उत्साह में है और वह अपने कोर एजेंडा को फिर से धार दे रही है। यानी वह हिंदुत्व के रथ पर सवार हो कर अपना विजय पताका फिर फहराना चाहती है। करीब दस दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सहारनपुर में मां शाकंभरी देवी विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था। इस मौके पर उन्होंने सनातन धर्म के त्योहारों का जिक्र कर हिंदुत्व की भावना को जागृत करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, सपा के शासनकाल में कांवर यात्रा पर रोक लगा दी गयी थी। इस यात्रा में डीजे नहीं बजने दिया जाता था। लेकिन अब पूरे राज्य में भव्य कांवर यात्रा निकाली जाती है। कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। अब हिंदू समाज की आवाज को दबाना संभव नहीं है।

हिंदुत्व ही बेसिक एजेंडा
2017 की प्रचंड चुनावी जीत ने भाजपा को एक नया आत्मविश्वास दिया था। इस जीत ने उसे संदेश दिया था कि हिंदुत्व ही उसका बेसिक एजेंडा है और इस पर वह खुल कर आगे बढ़े। लुचपुच तरीके से नहीं बल्कि पूरी मजबूती से। योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाना भी इसी सोच का हिस्सा था। योगी सरकार पांच साल पूरा ही करने वाली है। सुशासन और विकास भी अब चुनावी मुद्दों में शामिल हो चुके हैं। लेकिन 2022 का अमोघ अस्त्र हिंदुत्व ही है। ऐन चुनाव से पहले भाजपा अपने बेसिक एजेंडा पर लौट आयी है। अब वह ढके-छिपे तरीके से बात नहीं कर रही। खुलकर बेधड़क बोल रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या की तर्ज पर काशी- मथुरा लेने की बात कही। कुछ राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा को 2022 की चुनावी संभावनाएं अनुकूल नहीं दिख रहीं इसलिए उसने हिंदुत्व का राग छेड़ दिया है।

इतिहास से वर्तमान को संवारने की कोशिश
बनारस में एक आम आदमी के लिए प्रोटोकॉल तोड़ कर प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को एक सहज और सर्वसुलभ नेता के रूप में पेश किया। एक बुजुर्ग के लिए अपनी गाड़ी रुकवा दी। एसपीजी जवानों को समझाया कि उन्हें पास आने दें। बुजुर्ग समर्थक ने उन्हें अपने हाथ से पगड़ी पहनायी। फिर तो वे खुशी मारे के चिल्लाने लगे। चुनावी मौसम में ऐसे ही प्रतीकों से जनमत तैयार होता है। नरेन्द्र मोदी ने औरंगजेब की जिक्र कर इतिहास के जख्मों को कुरेद दिया। औरंगजेब एक कट्टर शासक था जिसने 18 अप्रैल 1669 को काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। इसके बाद इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने बाबा विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। इसी स्मृति में रानी अहिल्या बाई की प्रतिमा काशी विश्वनाथ धाम के नये प्रांगण में स्थापित की गयी है। नरेन्द्र मोदी ने लोकार्पण के मौके पर कहा, जब इस देश में औरंगजेब आया तो मराठा योद्धा शिवाजी का भी उदय हुआ। औरंगजेब ने इस देश की संस्कृति को आतंक से दबाने की कोशिश की लेकिन यहां की मिट्टी बाकी दुनिया से अलग है। नरेन्द्र मोदी ने इतिहास के पन्नों को पलट कर वर्तमान को संवारने की कोशिश की है।












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