कैराना: निर्दलीय लड़ रहे रालोद प्रत्याशी तबस्सुम के देवर चुनाव से हटे, भाभी को दिया समर्थन

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल की प्रत्याशी तबस्सुम के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे (सुनील सिंह की लोकदल समर्थित) उनके देवर कंवर हसन ने भाभी को समर्थन दे दिया है। कंवर हसन ने राष्ट्रीय लोकदल में शामिल होते हुए चुनाव से हटने का ऐलान किया है। कंवर हसन जयंत चौधरी की मौजूदगी में रालोद में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वो अपनी भाभी और रालोद प्रत्याशी तबस्सुम को जिताने के लिए चुनाव में काम करेंगे। इसे राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी के लिए बड़ा फायदा माना जा रहा है। कंवर हसन पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर लड़े थे और एक लाख 60 हजार वोट पाए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में तबस्सुम के बेटे नाहिद सपा तो कंवर हसन बसपा के टिकट पर कैराना में उतरे थे। इसका सीधा फायदा भाजपा के हुकुम सिंह को हुआ था और उन्होंने यहां बड़ी जीत दर्ज की थी।।

रालोद को होगा फायदा

रालोद को होगा फायदा

रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन महागठबंधन के समर्थन से चुनाव लड़ रही हैं। उनके लिए उनके ही देवर कंवर हसन चुनौती बने हुए थे। जो कि लोकदल प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे। कंवर हसन और उनके चेयरमैन भाई अनवर हसन की कैराना कस्बे में ठीकठाक पकड़ है और उन्होंने अपना चुनाव अभियान भी मुस्लिमों तक सीमित रखा था। इसलिए माना जा रहा था कि मुस्लिम मतों में सेंध लगा वो तबस्सुम हसन को नुकसान कर सकते हैं। उनके साथ आ जाने से राष्ट्रीय लोकदल को राहत मिली है।

विरासत की है लड़ाई

विरासत की है लड़ाई

अख्तर हसन (तबस्सुम हसन से ससुर और कंवर हसन के पिता) के परिवार में राजनीतिक विरासत की लड़ाई काफी समय से चल रही है। अख्तर हसन 1984 में कैराना से सांसद रहे थे। उनके बाद उनके बेटे मुनव्वर हसन के यहां से विधायक और सांसद रहे। मुनव्वर हसन के रहते वही परिवार में सर्वेसर्वा थे। अनवर हसन और कंवर हसन को मुनव्वर ही राजनीति में लाए थे और चुनाव भी लड़ाया था लेकिन 2008 में उनकी मौत और 2009 में मुनव्वर की बीवी तबस्सुम के सांसद बनने के बाद अनवर और कंवर ने भाभी से बगावत कर दी और परिवार दो फाड़ हो गया।

राजनीति महत्वाकांक्षाओं को लेकर है झगड़ा

राजनीति महत्वाकांक्षाओं को लेकर है झगड़ा

हसन परिवार में एक तरफ मुनव्वर की बीवी तबस्सुम और बेटा नाहिद हसन (कैराना विधायक) हैं तो दूसरी तरफ कैराना चेयरमैन अनवर हसन और कंवर हसन। कंवर और अनवर का कहना है कि मुनव्वर की राजनीति में उन्होंने भी मेहनत की लेकिन उन्हें अब किनारे कर दिया गया है। दोनों भाई कहते हैं कि वो भी मुनव्वर की विरासत में हिस्सा चाहते हैं। कई पंचायत भी दोनों ओर से इसको लेकर हो चुकी हैं लेकिन दोनों ओर से अहम और महत्वाकांक्षा बनी हुई हैं। इस समय भी अनवर हसन कैराना से चेयरमैन हैं और वो कंवर हसन के लिए प्रचार भी कर रहे थे।

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