कानपुर में इच्छामृत्यु की वसीयत दर्ज, लिविंग विल का पहला मामला

कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर के रजिस्ट्रार ऑफिस में एक वकील ने इच्छामृत्यु के लिए अपनी वसीयत रजिस्टर कराई है। इसमें उन्होंने अपने जूनियर वकील को अधिकार दिया है कि भविष्य में कोई अप्रिय स्थिति आने पर वो उनके लिए मर्सी किलिंग का निर्णय ले सकता है। इच्छामृत्यु के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन्स आने के बाद देश में इस तरह की 'लिविंग विल' का ये पहला मामला है।

Inidas first mercy killing bequest registered by a lawyer in Kanpur

अधिवक्ता शरद कुमार त्रिपाठी ने अपने जीवनकाल में इच्छा मृत्यु के लिए वसीयत रजिस्टर कराकर सबको हैरत में डाल दिया है। अपनी रजिस्टर्ड लिविंग विल में शरद ने लिखा है कि जब सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में इच्छा मृत्यु को जायज ठहरा चुका है तो ऐसे में उन्हें इस तरह की वसीयत करने का कानूनी अधिकार हासिल हो जाता है। शरद ने अपने इच्छा पत्र में दर्ज किया है कि यदि भविष्य में किसी कारणवश वे अचेतन अवस्था में चले जाते हैं तो उन्हें जीवन रक्षक प्राणाली पर रखा जाय अथवा नहीं, यह तय करने का अधिकार उनके जूनियर वकील अमितेश सिह सेंगर को होगा।

बता दें कि शरद के परिवार में उनकी पत्नी, दो बच्चे तथा बुजुर्ग माता पिता है। लेकिन उनका मानना है कि यदि भविष्य की अप्रिय घटना के कारण वे कोमा जैसी स्थिति में हो तो वेन्टीलेटर अथवा किसी अन्य जीवन रक्षक प्रणाली पर से हटाने का फैसला लेने में उनके परिवार वालों का स्नेह आड़े आ सकता है। ऐसे में शायद वे मर्सी किलिंग का निर्णय न ले सकें। इसलिए शरद ने वसीयत में अपने परिवार वालों को इच्छा मृत्यु का निर्णय लेने के अधिकार से बेदखल कर दिया है और अपने जूनियर वकील अमितेश सिह सेंगर को इस बाबत मुख्तार नियुक्त किया है।

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