पहले चरण में दिखी गठबंधन और बीजेपी में कांटे की टक्कर, जीत उसी की होगी जिधर करवट लेगा जाटव मतदाता ?
लखनऊ, 10 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पश्चिम के 11 जिलों की 58 सीटों पर आज पहले चरण का मतदान सम्पन्न हो गया। इसमें मेरठ और आगरा मंडल की प्रमुख सीटें हैं। नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बुलंदहशर में वोटिंग हुई। इन जगहों पर पिछले दो बार के विधानसभा चुनावों का परिणाम चौंकाने वाला रहा था। 11 जिलों की 58 सीटों पर शाम 5 बजे तक 57.79 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के बाद हालांकि सभी दल ने अपने अपने दावे किए। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो पहले चरण में बीजेपी और सपा-आरएलडी गठबंधन में कांटे की टक्कर देखने को मिली है। इसमें भी जाटव मतदाता निर्णायक साबित होने जा रहा है। हालांकि अभी यह पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है कि जाटवों का रूझान किसकी तरफ था।

गठबंधन-बीजेपी में कड़ा मुकाबला
पहले चरण के मतदान में गुरुवार को बड़ी संख्या में मतदाता मतदान करने के लिए मतदान केंद्र पर पहुंचे। पहले चरण के मतदान के दौरान युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों में भी विशेष उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में बुजुर्ग मतदान केंद्रों पर मतदान करने पहुंचे। वहीं, मतदान को लेकर सपा और भाजपा आमने सामने भी रहीं। पश्चिम की राजनीति को करीब से देखने वाले राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अजय चौहान बताते हैं कि पहले चरण में गठबंधन और बीजेपी में कांटे की टक्कर देखने को मिली है। जीत उसी की होगी जिस तरफ दलित मतदाता करवट लेगा। इसमें भी जाटव समाज यदि बीजेपी के साथ गया तो नतीजे पिछली बार की तरह चौकाने वाले हो सकते हैं।

पिछली बार बीजेपी को मिली थी पहले चरण में बढ़त
2017 के विधानसभा चुनावों की मोदी लहर में इन 58 में से 53 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। 2012 में इनमें भाजपा केवल 10 सीटें जीत सकी थी। यानी, भाजपा को 44 सीटों का फायदा हुआ था। इसके बाद भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार बनने के बाद पश्चिम UP में बड़ी पार्टी बनकर उभरी। कैराना पलायन, मुजफ्फरनगर दंगों को भाजपा ने जमकर भुनाया। 2017 में मोदी लहर का ऐसा जादू चला कि सपा, बसपा, रालोद का गढ़ कही जाने वाली सीटों पर भी कमल खिला। सपा ने कैराना में नाहिद हसन और मेरठ शहर में रफीक अंसारी की बस दो सीटें ही जीतीं।

2012 में पश्चिम में तेजी से दौड़ा मायावती का हाथी
इन जिलों में अगर पिछले दो चुनावों के नतीजे देखें, तो सबसे ज्यादा असर बसपा पर हुआ है। 2012 से पहले UP में मायावती सरकार थी। हालांकि 2012 में मायावती की बसपा चुनाव हार गई, लेकिन पश्चिम ने हाथी का पूरा साथ दिया। 2012 में 58 सीटों में से 20 सीटें लेकर बसपा नंबर एक पर रही थी। वहीं, रालोद सिर्फ छपरौली सीट पर जीत दर्ज कर पाई। बसपा ने मथुरा की मांट और हापुड़ से धौलाना कुल दो सीटें जीतीं। 2017 के चुनाव में मायावती की पार्टी बसपा 58 में से कुल 2 सीटों पर सिमट गई।

2012 में सपा के पश्चिम में मिली थी बढ़त
वहीं, UP में 2012 में सरकार बनाने वाली अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 2012 के चुनाव में पश्चिम में कुल 14 सीटें लाई थी। 2017 में सभी दलों को पछ़ाड़कर आगे निकली भाजपा को 2012 में सिर्फ 10 सीटें ही मिली थीं। 2012 में अपने वजूद को बचाने उतरी कांग्रेस 2012 में पश्चिम में चार सीटें लाई थी, जबकि 2017 में तो खाता तक नहीं खुला। वहीं, किसानों की पार्टी रालोद ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस लिहाज से देखें तो बसपा ने 20, सपा ने 14, भाजपा ने 10 और रालोद ने 9 सीटें जीती। कांग्रेस कुल चार सीट ही जीत सकी और मथुरा की एक सीट निर्दलीय रही।












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