अवध क्षेत्र के सांसदों एवं विधायकों के साथ संगठन और सरकार की अहम बैठक खत्म, जानिए योगी ने क्यों लगाई क्लास
लखनऊ, 08 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लखीमपुर में आठ लोगों की मौत से यूपी का सियासी पारा पूरी तरह से गरम है। एक तरफ जहां विपक्ष इस मामले को गरमाने में जुटा हुआ है वहीं दूसरी ओर तराई बेल्ट यानी अवध क्षेत्र में बीजेपी को होने वाले संभावित नुकसान की आहट सुनाई देने लगी है। नुकसान का आंकलन करने के लिए ही शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवध क्षेत्र के सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाई थी जिसमें इस कांड के बाद होने वाले संभावित नुकसान पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक सीएम योगी आदित्यनाथ ने नाम न लिए बगैर सभी सांसदों और विधायकों को सख्त हिदायत दी कि मंत्री, सांसद या विधायक किसी तरह के विवाद में न पड़ें और परिवार के लोगों को लेकर राजनीति बिल्कुल न करें। चुनाव सामने है इसलिए सभी लोग अपने काम पर फोकस करें तो बेहतर होगा।

सांसदों एवं विधायकों को योगी की दो टूक
अवध क्षेत्र के सांसदों, विधायकों की बैठक में सीएम योगी के अलावा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल भी मौजूद थे। बैठक में योगी ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का नाम लिए बगैर सबको सतर्क रहने की नसीहत दी। सीएम ने कहा कि सांसद- विधायक आप हैं आपके परिवार वाले नहीं हैं। इसीलिए परिवार के लोग किसी तरह की राजनीति न करें तो बेहतर होगा। चुनाव में जाना है तो आपका हर एक कदम काफी महत्वपूण है। सरकार के 100 दिन के काम को घर-घर पहुंचाने और बूथ विजय अभियान को लेकर पार्टी के कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता से लें।

अवध के सांसदों व विधायकों की योगी ने लगाई क्लास
बैठक में मौजूद रहने वाले एक विधायक ने बताया कि, '' बैठक में लखीमपुर खीरी कांड के बाद जो माहौल बना है। उसपर चर्चा की गई। बैठक में कई विधायकों और सांसदों ने अपनी राय रखी थी। सबका यही कहना था कि इस कांड के बाद तराई बेल्ट में स्थितियां बिगड़ रही हैं। समय रहते इसको नहीं संभाला गया और यह आग यदि चुनाव तक सुलगती रही तो पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए सभी सांसदों और विधायकों को अपने अपने क्षेत्रों में अलर्ट रहने को कहा गया है। खासतौर से सिख बाहुल्य इलाकों में संगठन की तरफ से कई कार्यक्रम लगाए जाएंगे ताकि उनके गुस्से को किसी तरह शांत किया जा सके।''

2012 के चुनाव में बीजेपी को मिली थी सिर्फ एक सीट
लखीमपुर खीरी यूपी के तराई क्षेत्र का सबसे बड़ा जिला है, जहां सिख किसान समुदाय का प्रभुत्व है, जो पाकिस्तान से लाए जाने के बाद वहां बस गए थे। जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं, जो सभी 2017 के विधानसभा चुनावों में भगवा उछाल के तहत भाजपा द्वारा जीते गए थे। हालांकि, 2012 के चुनावों में, बीजेपी सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही थी। सिखों का हिस्सा, खीरी में अन्य प्रमुख समुदायों में ब्राह्मण, ओबीसी के बीच कुर्मी और मुस्लिम शामिल हैं। लखीमपुर खीरी गन्ने की खेती के लिए प्रमुख रूप से जाना जाता है।

2017 के चुनाव 42 में से 37 सीटों पर कब्जा किया था
लखीमपुर में हिंसा के बाद, जहां विपक्ष को 2022 के चुनाव से पहले इसको भुनाने में जुटा हुआ है वहीं भाजपा को यह भी डर है कि इसका प्रभाव पीलीभीत जैसे आसपास के जिलों में महसूस किया जाएगा। , शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर और बहराइच समेत 6 जिलों में पार्टी ने 2017 के चुनाव 42 में से 37 सीटों पर कब्जा किया था। एक तरफ जहां लखीमपुर कांड बीजेपी के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है वहीं दूसरी ओर भाजपा के पीलीभीत सांसद वरुण गांधी लगातार किसानों के समर्थन में ट्विट कर सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

बीजेपी के सामने इससे निपटने की चुनौती
काशी विद्यापीठ में राजनीतिक विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर राकेश कुमार उपाध्याय कहते है कि, "लखीमपुर खीरी का मुद्दा आगामी यूपी चुनाव तक जिंदा रखा जाएगा क्योंकि विपक्ष विपक्ष इस मामले को इतनी जल्दी हाथ से नहीं जाने देगा। अखिलेश यादव हों या प्रियंका गांधी हो सूमचा विपक्ष बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा करेगा और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर गांव गांव तक कार्यक्रम कराए जाएंगे जैसा कि कई राजनीतिक दलों की ओर से ऐलान किया गया है। अब देखना होगा कि बीजेपी इस चुनौती से कैसे निपटती है।''

कांग्रेस और सपा पेश कर सकती है कड़ी चुनौती
दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2017 में, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन में थे। सपा को जहां सिर्फ चार सीटें मिली थीं, वहीं कांग्रेस एक भी सीट नहीं मिली थी। बसपा तराई क्षेत्र से एक भी सीट जीतने में सफल रही थी। अजय मिश्रा, जिनके बेटे लखीमपुर कांड में मुख्य अभियुक्त बनाए गए हैं उन्होंने निघासन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के लिए सीट जीती थी। भाजपा इस विधानसभा सीट पर 1993 से अब तक तीन बार जीत चुकी है। अजय मिश्रा 2007 में इस सीट से चुनाव हार गए थे।

2017 में लखीमपुर की सभी आठ सीटों पर बीजेपी को मिली थी जीत
इसके अलावा, लखीमपुर खीरी में भाजपा का वोट शेयर भी 2012 की तुलना में 2017 में काफी बढ़ गया। इसके अलावा, सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करते हुए, भाजपा ने पलिया विधानसभा क्षेत्र में 2012 में 11% की तुलना में 49% वोट हासिल किया। गोला में 3.9%, धौरहरा में 5.8% की तुलना में 36%, और आरक्षित सीट कस्ता में 5.8% की तुलना में 44% मत हासिल हुए थे।












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