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संगठन सरकार से बड़ा है ? डिप्टी CM केशव मौर्य के इस ट्वीट ने कैसे बढ़ाया UP का सियासी पारा

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लखनऊ, 22 अगस्त: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश चल रही है। पिछले दिनों सूबे के संगठन महामंत्री सुनील बंसल का कद बढ़ाकर अन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बना दिया गया था। उनकी जगह नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह को नियुक्त किया गया था। लेकिन इन सबके बीच यूपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में यूपी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रयाद मौर्य का एक ट्विट यूपी की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। मौर्य के ट्वीट की टाइमिंग ऐसी है कि इसको लेकर कई तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। मौर्य ने कहा कि है कि संगठन सरकार से बड़ा है। आखिर मौर्य के इस बयान की क्या अहमियत है और राजनीतिक हलकों में क्यों हलचल मची हुई है।

योगी आदित्यनाथ

मौर्य के बयान से गरमाया बीजेपी का माहौल

मौर्य के ट्वीट ने बीजेपी में राजनीतिक गलियारों को एक बार फिर से गर्म कर दिया है। यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के बारे में उनके इस बयान के काफी मतलब निकाले जा रहे हैं। इन अटकलों के बीच नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कभी भी हो सकती है। सोशल मीडिया पर भी उनके ट्वीट के कई मायने निकालने जा रहे हैं। कोई इस ट्वीट को उनकी दोबारा संगठन में वापसी से जोड़कर देख रहा है तो कोई सरकार और संगठन के बीच मतभेद को इसकी वजह बताई जा रही है। हालांकि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में शामिल होने के बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपना इस्तीफा पहले ही भेज दिया था।

2014 चुनाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष बने थे केशव

मौर्य को 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था। उसके बाद यूपी में पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। वह अंततः पार्टी के एक प्रमुख ओबीसी चेहरे के रूप में उभरने में कामयाब हुए थे। इसके साथ ही भाजपा यूपी में गैर-यादव ओबीसी को मजबूत करने में कामयाब रही। बीजेपी ने एक बार फिर ओबीसी धर्मपाल सैनी, एक ओबीसी को नए राज्य महासचिव (संगठन) के रूप में नियुक्त करके ओबीसी एजेंडे को ही आगे बढ़ाने का काम किया है।

गाजियाबाद में बैठक के बाद दिया ये अहम बयान

गौरतलब है कि मौर्य की यह टिप्पणी ऐसे दिन आई है जब धर्मपाल सिंह सैनी ने पश्चिम और यूपी के ब्रज क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पहली बार विचार-विमर्श किया था। मौर्य भी गाजियाबाद में हुई बैठक में मौजूद थे। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो मौर्य के नए राज्य प्रमुख के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। पिछले हफ्ते ही मौर्य ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी, जिसे यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के चयन की तैयारी के रूप में देखा गया था। हालांकि भाजपा नेता चुप्पी साधे हुए हैं।

ओबीसी नेता तलाश रही बीजेपी

सूत्रों ने कहा यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए जिन ओबीसी नेताओं को सबसे आगे माना जा रहा है, उनमें केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री, बीएल वर्मा, एक लोध और यूपी के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, एक जाट शामिल हैं। हालांकि भाजपा 2014 से संसदीय चुनावों से पहले यूपी इकाई का नेतृत्व करने के लिए एक ब्राह्मण समीकरण पर ही फोकस कर रही थी।

ब्राह्मणों पर भी लगा सकती है दांव

लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले यूपी भाजपा का नेतृत्व किया, उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महेंद्र नाथ पांडे ने यह जिम्मेदारी संभाली। इस रणनीति को देखते हुए इस बार कन्नौज के सांसद सुब्रत पाठक, पूर्व ऊर्जा मंत्री और मथुरा के विधायक श्रीकांत शर्मा और पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा जैसे बीजेपी नेताओं के नाम चर्चा में हैं।

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Comments
English summary
How this tweet of Deputy CM Keshav Maurya raised the political temperature of UP
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