इलाहाबाद: पढ़िए कैसा था नाव डूबने का दर्दनाक मंजर, 5 लापता

इलाहाबाद। इलाहाबाद के मेजा के मदरा घाट के निकट शनिवार की रात डूबी नाव बाहर निकाल ली गयी है लेकिन नाव पर बैठे बैंक कैशियर समेत पांच लोगों का अभी तक पता नहीं चल सका है। आशंका है कि तेज बहाव में वह बह गये होंगे। हालांकि पीएसी के गोताखोरों का रेस्क्यू लगातार 12 घंटे से जारी है। शाम छह बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलेगा। सीएम योगी आदित्यनाथ के युद्धस्तर पर बचाव के आदेश के बाद पूरी रात पीएसी की गोताखोर युनिट लोगों की मदद में जुटी रही। रात से कोई जवान सोया तक नहीं है और लगातार लापता लोगों की तलाश जारी है। जिला मुख्यालय से भी पुलिस व प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर डटे हुये हैं।

ओवरलोडिंग से हुआ हादसा

ओवरलोडिंग से हुआ हादसा

वहीं लापता लोगों के परिजन भी रात से ही जुटे हैं। मातम के बीच रोना-पीटना मचा हुआ है। अधिकारी लोगों को सांत्वना देने का प्रयास कर रहे हैं। बता दें की शहर से 65 किमी दूर मेजा तहसील के जिस मुकुंदपुर गांव के पास घटना हुई है. वहां के लोग नदी पार करने के लिए वर्षो से नाँव का इस्तेमाल कर रहे हैं। शनिवार की रात बड़ा हादसा हुआ। नाव से नदी पार कर रहे लगभग दो दर्जन लोग गंगा नदी में डूब गये। अभी तक बताया यही जा रहा है कि नाव के ओवरलोड होने के कारण ये हादसा हुआ है।

ये हैं लापता

ये हैं लापता

नाव दुर्घटना में अधिकांश लोग तैरकर किनारे पहुंच गये लेकिन 5 लोग अब तक काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिल सके हैं। इनमे विकास पटेल (35) निवासी मेजा चुरबना, धीरज मिश्रा (30) निवासी ओनउर, संदीप मिश्रा (32) निवासी मेजा भिंगारी,निखिल यादव (35) निवासी हंडिया भेलसी शामिल है। विकास पटेल बैंक आफ बड़ौदा की बरौत शाखा में कैशियर हैं। इनके परिजन घाट पर रात से ही जमे हुये हैं। सभी का रो-रोकर हाल बेहाल है।

ये तैरकर बच गये जिंदा

ये तैरकर बच गये जिंदा

नाव में बड़ौदा बैंक के चपरासी लाल जी (50) भी सवार थे। वह उम्र के हिसाब से भी काफी मुश्किल में थे। लेकिन लालजी तैरकर मदरा घाट पहुंच गये और जिंदा बच गये। जबकि साथ रहे इदरीस, अजय मिश्रा (32), मंगला प्रसाद (35), मयंक मिश्रा (28), निशांत मिश्रा (22), विशाल मिश्रा (28), राजू मिश्रा और कुमार ( 22) भी तैरकर किनारे घाट पर पहुंच गए थे। इसके अलावा भी दर्जन भर लोग घाट पर पहुंचने में सफल रहे और अपने घर चले गये।

जान बचाकर निकले शख्स ने सुनाई आंखों देखी

जान बचाकर निकले शख्स ने सुनाई आंखों देखी

यूपी के इलाहाबाद जिले में शनिवार की रात गंगा नदी में नाव डूबने के बाद किसी तरह पानी में तैर कर अपनी जान बचाने वाले एक शख्स ने रात की उस खौफनाक घटना की आंखो देखी तस्वीर बताई। उसने बताया कि जब नाव में काफी लोग सवार हो गये तो नाव ओवरलोड हो गई । जैसे ही नाव पानी में उतरी तो नाव में पानी रिसने लगा। रिसाव तेज हुआ तो नाविक का साथी एक बर्तन से नाव में भर रहे पानी को बाहर फेंकने लगा। हालांकि शुरू में यह एक सामान्य सी घटना लगी। लेकिन नाविक ओवरलोड होने के चलते नाव में पानी भरने की रफ्तार तेज होने लगी। पानी बहुत तेजी से अंदर भरने लगा तो हर कोई घबरा उठा। हम लोग भी पानी बाहर फेंकने लगे। लेकिन ऐसे में नाव अनियंत्रित होने लगी। नाविक ने भरोसा दिलाया कि बस किनारा नजदीक है। सब लोग पहुंच जायेंगे अंदर से उस समय हर कोइ कांपने लगा और हर कोई मन ही मन ईश्वर को याद कर रक्षा की भीख मांगने लगा। मां गंगा सेमेस्टर मिन्नत की जाने लगी कि मां नैया पार लगा दो।

हांफते हुये नाविक का साथी लगातार पानी बाहर फेंकता रहा और नदी की लहरों को चीरते हुये नाव किनारे की ओर बढ़ चली लेकिन लहरों ने भी आज जाने कौन सा रुख अपनाया था। नाव रफ्तार ही नहीं पकड़ रही थी जिससे डर अपने चरम की ओर बढने लगा। कुछ लोगों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और घबरा कर बैठ गये। नाविक सबको शांत रहने की बार-बार अपील करता और भरोसा दिलाता लेकिन अंदर ही अंदर सब पूरी तरह से डर चुके थे।

अब तक नदी का किनारा सामने आ चुका था। हम काफी नजदीक थे। मुश्किल से पचास मीटर की दूरी थी, कि अचानक नाव पलट गई । फिर बस चीख पुकार ही सुनाई पड़ी जो जैसे भी तैर सकता था। हाथ पांव मारने लगे। हर कोई किनारे की ओर भागा। मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी हाथ-पांव मारने में। लगा आज जिंदा नहीं बचूंगा। आंखे बंद कर मैं जीभरकर बचने का प्रयास कर रहा था। कुछ देर में हाथ पांव ने जवाब दे दिया और थककर शरीर रुक गया । लगा कि अब डूब गया । मौत ने मुझे अपना शिकार बना लिया। आंखे खोली तो हाथ किनारे की बालू से ठकराया। कुछ अचरज और खुशी से मैं सरक कर पानी से बाहर निकल गया। वहां मैं लेटा और कब बेहोश हुआ नहीं पता। जब आंख खुली तो मदद पहुंच चुकी थी। हर तरफ शोरगुल था। आवाजें आ रही थी। अंदर से मैं भी खौफजदा था। लेकिन मैं जिंदा बच गया था।

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