HC ने मानी योगी की नीति, सूबे में बालू खनन को दी मंजूरी
कोर्ट ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार ई-टेंडरिंग से बालू खनन की परमिट जारी कर सकती है। इससे पहले योगी ने अस्थाई खनन नीति को हाईकोर्ट के समक्ष रखा था।
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बालू खनन को मंजूरी दे दी है। हालांकि ये मंजूरी ई-टेंडरिंग के दायरे में होगी। गौरतलब है कि बालू खनन के मामले में हाईकोर्ट ने योगी सरकार से जवाब तलब किया था। साथ ही उनकी योजना व मंशा भी जाननी चाही थी। जिसके बाद योगी ने अस्थाई खनन नीति को हाईकोर्ट के समक्ष रखा। जिसे सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी। कोर्ट ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार ई-टेंडरिंग से बालू खनन की परमिट जारी कर सकती है।

सभी याचिका एक साथ निस्तारित
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ी पहल करते हुए अवैध बालू खनन को लेकर दायर दर्जनों याचिकाएं एक साथ निस्तारित कर दी है। मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने खनन मामले की सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा पेश की गई नई नीति को लागू करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सूबे में बालू खनन पर लगी रोक हट गई है। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में कई दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। जिसका पालन सरकार व खनन पट्टा लेने वाले को करना होगा।


6 महीने तक होगा खनन फिर बदलेगा नियम
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध खनन पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद से इलाहाबाद समेत सूबे के अलग-अलग हिस्सों में बालू की किल्लत शुरू हो गई। बालू के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद 6 महीने तक खनन हो सकेगा। अवैध खनन पर अब भी रोक होगी। हाईकोर्ट ने ई-टेंडरिंग से 6 महीने बालू खनन के लिए पट्टा देने को कहा है। जबकि 6 महीने बाद सरकार इस नियम में फिर बदलाव करेगी। सरकार की नई नीति में सरकार की एक स्पेशल कमेटी गठित होगी, जो खनन एरिया और खनन मात्रा का निर्धारण करेगी। जिससे अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके।
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