आजम खेमे की हलचल के बाद क्या बदल रही है अखिलेश की रणनीति, 5 लोगों के प्रतिनिधिमंडल में 3 मुस्लिम नेता

लखनऊ, 22 अप्रैल। अखिलेश यादव जब 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो समाजवादी पार्टी की ओर से मिशन 2014 का नारा दिया गया। लेकिन नरेंद्र मोदी की लहर में भाजपा ने यूपी सहित पूरे देश में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया। 2014 की हार के बाद अखिलेश यादव ने 2017 में सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और पार्टी को सिर्फ 5 सीटों पर ही जीत मिली।

लगातार हार के बाद बदली रणनीति

लगातार हार के बाद बदली रणनीति

2012 के बाद लगातार एक के बाद एक चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती है प्रदेश में पार्टी को फिर से खड़ा करना। 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव के सामने सबसे मुश्किल चुनौती 2024 है, ऐसे में पार्टी किसी भी सूरत में इन चुनाव में वापसी करना चाहेगी। पिछले 12 साल के अपने राजनीतिक सफर में अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, मायावती की पार्टी बसपा के साथ भी गठबंधन किया, सॉफ्ट हिंदुत्व के फॉर्मूले को भी अपनाने की कोशिश की, लेकिन इन तमाम कोशिशों में विफल रहने के बाद अखिलेश यादव एक बार फिर से अपने वोट बैंक को फिर से इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं।

 आजम के नाराज समर्थकों को मनाने की कोशिश

आजम के नाराज समर्थकों को मनाने की कोशिश

आजम खान को सपा में एक दिग्गज मुस्लिम नेता के तौर पर जाना जाता है। लेकिन आजम खान के पक्ष में जिस तरह से अखिलेश यादव ने चुप्पी साधी और उन्हें जेल से बाहर लाने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया तो ना सिर्फ मुस्लिम तबके बल्कि आजम खान के समर्थकों में भारी नाराजगी है। पार्टी के भीतर और बाहर आजम खान के समर्थक अखिलेश से इस बात को लेकर नाराज हैं। खुद शिवपाल के चाचा शिवपाल यादव भी इसको लेकर अखिलेश पर हमला बोल चुके हैं। आजम खान से सीतापुर जेल में मिलने के लिए शिवपाल यादव पहुंचे।

मुस्लिम वोटर्स को एकजुट करने की कोशिश

मुस्लिम वोटर्स को एकजुट करने की कोशिश

लगातार एक के बाद एक चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव भी इस बात को महसूस कर रहे हैं कि उन्हें सत्ता में वापसी के लिए मुस्लिम वोटर्स को एक बार फिर से पार्टी के साथ जोड़ना होगा और खुलकर मुस्लिम वर्ग के पक्ष में आगे आने होगा। यही वजह है कि दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के बाद जिस तरह से यहां अतिक्रमण अभियान चलाया गया उसके बाद कांग्रेस ने खुलकर इसका विरोध किया, अपना प्रतिनिधिमंडल भेजा। अब अखिलेश यादव ने भी एक पांच सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल जहांगीरपुरी में भेजा है, इस प्रतिनिधिमंडल में 3 सदस्य मुस्लिम हैं।

सपा का दल करेगा जांच

सपा का दल करेगा जांच

जहांगीरपुरी में अतिक्रमण अभियान की जांच के लिए सपा ने जिन पांच सदस्यों की कमेटी को भेजा है उसमे शफीकुर्रहमान वर्क, रवि प्रकाश वर्मा, एसटी हसन, विशंभर प्रसाद निषाद, जावेद अली खान शामिल हैं। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने जहांगीरपुरी में अतिक्रमण अभियान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम ने बुल्डोजर चलाकर जहांगीरपुरी बस्ती को उजाड़ दिया, हमारा दल इस पूरे मामले की जांच करेगा।

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