विधान परिषद में कोरोना के मुद्दे पर सरकार के तथ्य से क्यों बौखलाया विपक्ष, जानिए
लखनऊ, 16 दिसंबर. उत्तर प्रदेश में कोरोना की वजह से हजारों लोगों की मौतें हुईं थीं। पहली लहर के बाद दूसरी लहर में भी यूपी के कई अस्पतालों में मरीजों की मौत आक्सीजन की कमी से हाने का दावा किया गया था लेकिन अब सरकार ने विपक्ष के एक सवाल के जवाब में कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई है। सरकार के इस जवाब के बाद हालांकि विपक्ष ने एक सुर से सरकार पर हल्ला बोल दिया है। कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के कई मंत्रियों ने पत्र लिखकर राज्य में आक्सीजन की कमी से लोगों की मौत होने की बात कही थी लेकिन क्या सरकार अब अपनी नाकामी पर लीपापोती करने में जुटी हुई है।

दूसरी लहर में हुई मौतों का मुद्दा विधान परिषद में उठा
सरकार ने बृहस्पतिवार को विधान परिषद में दावा किया कि प्रदेश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी भी व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं है। उत्तर प्रदेश में कोरोना की वजह से बहुत लोगों की मौतें हुईं थी लेकिन अब सरकार ने इस बात से सदन में इनकार कर दिया है की ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई थी। हालांकि प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह द्वारा पूछे गए एक सवाल पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा "प्रदेश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी भी व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं है।"

कांग्रेस के एमएलसी ने सरकार पर बोला हमला
दीपक सिंह ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए कहा "सरकार के ही कई मंत्रियों ने पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी के कारण मौतें हो रही हैं। इसके अलावा कई सांसद भी ऐसी शिकायत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से मौतों की अनेक घटनाएं सामने आई है। क्या पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से जो मौतें हुई थी उनके बारे में सरकार के पास कोई सूचना नहीं है। क्या गंगा में बहती लाशें और ऑक्सीजन की कमी से तड़पते लोगों को क्या सरकार ने नहीं देखा था।"

सपा ने कहा- सरकार सदन के भीतर झूठ कैसे बोल सकती है
सपा सदस्य उदयवीर सिंह ने इस पर प्रश्न जोड़ते हुए कहा "आगरा में पारस अस्पताल के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्यवाही की क्योंकि उनके अस्पताल के डॉक्टर का वीडियो वायरल हुआ था और यह तथ्य भी सामने आया कि ऑक्सीजन की कमी होने के कारण आधे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई और आधे मरीजों की मृत्यु हो गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर ऑक्सीजन आपूर्ति बंद की गई थी। इस पर सरकार ने खुद कार्यवाही की है फिर सरकार सदन में यह गलत बयानी कैसे कर सकती है कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई।"

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- मृत्यु प्रमाण पत्र में आक्सीजन का जिक्र नहीं
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीज की मौत होने पर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र डॉक्टर के माध्यम से लिखकर आता है। प्रदेश में अभी तक कोविड-19 के कारण जिन 22915 मरीजों की मृत्यु हुई है उनमें से किसी के भी मृत्यु प्रमाण पत्र में कहीं भी ऑक्सीजन की कमी से मौत का जिक्र नहीं है। विभिन्न बीमारियों और असाध्य रोगों की वजह से मृत्यु हुई है। ऑक्सीजन की कमी पहले थी। सभी लोग जानते हैं कि उस दौरान दूसरे प्रदेशों से लाकर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई थी। जहां तक पारस अस्पताल की बात है तो उस मामले में पूरी जांच की गई थी। जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट भी आई थी जिसमें एक मॉक ड्रिल करने की बात आई थी। उसमें ऑक्सीजन की कमी से किसी की भी मृत्यु का जिक्र नहीं है।

अपने ही मंत्रियों को झूठा साबित करने पर तुली है सरकार
इस पर सपा सदस्य उदयवीर सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अगर सरकार प्रमाण पत्र में मृत्यु की जगह विलोपित लिखे तो क्या मृत्यु का सत्य बदल जाएगा। जब सरकार ने ऑक्सीजन बंद करने के कारण हुई मौत के आरोप में किसी को जेल भेजा तो सरकार कैसे कह सकती है कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से किसी की मौत नहीं हुई। दीपक सिंह ने तर्क देते हुए कहा कि जो सरकार के मंत्रियों ने ऑक्सीजन की कमी से संबंधित पत्र लिखे थे, क्या वे झूठे थे।












Click it and Unblock the Notifications