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UP By-Election 2024: क्या हरियाणा की हार बनेगी 'साइकिल' से 'पंजे' की दूरी की वजह? अखिलेश ने दिए दरार के संकेत!

Uttar Pradesh By-Election 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 (Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 90 में से 48 सीटें अपने पाले में घसीटीं। इसी के साथ, लगातार तीसरी बार बीजेपी प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। वहीं, कांग्रेस 37 सीटों पर संतोष करते हुए हार का सामना कर रही है।

हरियाणा की इस हार का असर आगामी उत्तर प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों (UP Upchunav 2024) पर भी पड़ने की संभावना है, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के रिश्तों पर, जो 'इंडिया गठबंधन' के तहत जुड़ी हुई हैं।

Uttar Pradesh By-Election 2024

कांग्रेस-सपा गठबंधन में दरार के संकेत! (Akhilesh Yadav Rahul Gandhi Alliance Rift)

हरियाणा चुनाव के परिणामों के बाद, समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव के कदम से कांग्रेस और सपा के बीच दूरी बढ़ने के संकेत मिले हैं। उपचुनावों के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची में कांग्रेस का कोई भी उम्मीदवार नहीं है। इससे अब सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि यूपी में क्या साइकिल (सपा) और पंजा (कांग्रेस) की दूरियां बढ़ने लगी हैं?

अब अखिलेश की बारी (Akhilesh Yadav Game Player)

आपको बता दें कि कांग्रेस नीत वाली इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन के तहत, हरियाणा चुनाव में अखिलेश यादव ने चार सीटों (रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और महेंद्र गढ़) की मांग की थी, लेकिन दुर्भाग्य से उनके हाथ एक भी सीट नहीं लगी। ऐसे में अब आगामी यूपी उपचुनाव में देखना होगा कि अखिलेश यादव शेष बची 4 सीटों में से कितनी कांग्रेस के हवाले करती है।

60-40 का फॉर्मूला था सेट!

हरियाणा की चुनावी बयार से पहले ही, यूपी के उपचुनाव को लेकर फॉर्मूला सपा और कांग्रेस के बीच सेट हुआ था। लेकिन, हरियाणा चुनाव के नतीजों और सपा को दरकिनार करने की वजहें कांग्रेस को झटका दे सकती हैं। प्रियंका गांधी ने सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन के लिए 60-40 का फॉर्मूला सेट किया था। इसका मतलब था कि कांग्रेस के पाले में यूपी की 4 सीटें गिरेंगी।

अखिलेश और राहुल: कब-कब साथ आए?
2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और राहुल गांधी की कांग्रेस ने "यूपी को ये साथ पसंद है" नारे के साथ गठबंधन किया था। यह गठबंधन बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन परिणामों में इसे बड़ी सफलता नहीं मिली। बीजेपी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, और यह गठबंधन कमजोर साबित हुआ।

2024 लोकसभा चुनाव (संभावित गठबंधन): लोकसभा चुनाव में अखिलेश और राहुल फिर से एकजुट हुए, खासकर 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन के तहत। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष खड़ा करना था। हालांकि, यह गठबंधन भी सफल नहीं हो सका और बीजेपी नीत एनडीए ने भारी बहुमत से चुनाव जीता।

हरियाणा की हार का असर: क्या टूटेगी अखिलेश-राहुल की जोड़ी?
हरियाणा चुनाव में कांग्रेस की हार और सपा द्वारा उपचुनावों में कांग्रेस को जगह न देने से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच गठबंधन टूट जाएगा? अखिलेश यादव की पार्टी ने यूपी उपचुनावों के लिए जो 6 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उसमें कांग्रेस का कोई भी नाम शामिल नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि सपा और कांग्रेस के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं, खासकर सीट बंटवारे को लेकर।

क्या बची 4 सीटों पर कांग्रेस को मिलेगी जगह?
सपा नेता रविदास मेहरोत्रा का कहना है कि सपा ने उन 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जहां वह भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ रही है। शेष 4 सीटों पर कांग्रेस के साथ बातचीत जारी है, और संभव है कि वहां कांग्रेस को जगह मिले।

अखिलेश के कदम से UP कांग्रेस प्रभारी अंजान!
उपचुनावों में समाजवादी पार्टी के इस कदम से कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि सपा ने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि गठबंधन की संभावनाएं अब भी बनी हुई हैं और बातचीत चल रही है। कांग्रेस इस समय उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन सपा द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची से यह स्पष्ट है कि दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी है।

सपा ने जारी की इन 6 सीटों पर उम्मीदवार

सीट उम्मीदवार
मैनपुरी जिले की करहल तेज प्रताप सिंह यादव (लालू प्रसाद यादव की छोटी बेटी राजलक्ष्मी के पति)
कानपुर जिले की सीसामऊ नसीम सोलंकी
प्रयागराज जिले की फूलपुर मुस्तफा सिद्दीकी
अयोध्या जिले की मिल्कीपुर अजीत प्रसाद
अम्बेडकर जिले की कटेहरी शोभावती वर्मा
मिर्जापुर जिले की मझवां डॉ. ज्योति बिंद

UP की इन 10 सीटों पर ही क्यों हो रहे हैं उपचुनाव?

  • करहल (मैनपुरी): इस सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव विधायक थे, लेकिन उन्होंने कन्नौज संसदीय क्षेत्र को बरकरार रखने के लिए इस सीट से इस्तीफा दे दिया। अब इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं।
  • मिल्कीपुर (अयोध्या): सपा विधायक अवधेश प्रसाद ने अयोध्या (फैजाबाद) से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस सीट से इस्तीफा दे दिया है, जिससे यह सीट खाली हो गई है।
  • कुंदरकी (मुरादाबाद): सपा विधायक जिया-उर-रहमान बर्क ने संभल लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद कुंदरकी विधानसभा सीट खाली कर दी, जिससे यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
  • गाजियाबाद सदर: अतुल गर्ग गाजियाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं, जिसके बाद यह विधानसभा सीट खाली हो गई है।
  • मझवां (मिर्जापुर): भाजपा विधायक विनोद कुमार बिंद ने भदोही लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन गए हैं, जिससे मझवां विधानसभा सीट खाली हो गई है।
  • कटेहरी (अंबेडकर नगर): सपा विधायक लालजी वर्मा ने अंबेडकरनगर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गए, जिसके कारण कटेहरी सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं।
  • फूलपुर (प्रयागराज): भाजपा विधायक प्रवीण पटेल ने फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन गए हैं, जिससे फूलपुर विधानसभा सीट खाली हो गई है।
  • मीरापुर (मुजफ्फरनगर): रालोद विधायक चंदन चौहान बिजनौर से सांसद बन गए हैं, जिससे मीरापुर विधानसभा सीट खाली हो गई है।
  • खैर (अलीगढ़): भाजपा विधायक अनूप प्रधान वाल्मीकि ने हाथरस लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बनने के बाद खैर सीट खाली कर दी है।
  • सीसामऊ (कानपुर): सपा विधायक इरफान सोलंकी को आगजनी के एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद 7 साल की सजा सुनाई गई है, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई है। अब इस सीट पर उपचुनाव होंगे।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का असर अब यूपी उपचुनावों में देखने को मिल सकता है। सपा और कांग्रेस के बीच मतभेदों के चलते इंडिया गठबंधन पर भी असर पड़ सकता है। जहां अखिलेश यादव ने उपचुनावों के लिए कांग्रेस को दरकिनार कर दिया है, वहीं कांग्रेस अब भी बातचीत की संभावनाएं तलाश रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी उपचुनावों में सपा और कांग्रेस के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं और क्या ये दोनों दल मिलकर बीजेपी का सामना कर पाएंगे या नहीं।

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