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'ज्ञानवापी एक मंदिर था और वही रहेगा', मस्जिद सर्वे रिपोर्ट पर और क्या बोले BHU के इतिहासकार ?

वाराणसी, 19 मई: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर और इतिहासकार ने ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर मिले मंदिर होने के साक्ष्यों को लकर बहुत बड़ा दावा किया है। इतिहासकार राजीव श्रीवास्तव के मुताबिक अब मंदिर होने से संबंधित पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं। उन्होंने कहा है कि साढ़े तीन सौ साल से यह मंदिर मुसलमानों के पास था, जिसकी वजह से उसे काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने यहां तक दावा किया है कि 'ज्ञानवापी एक मंदिर था और वही रहेगा'। बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर आगे की सुनवाई करने वाला है।

'ज्ञानवापी एक मंदिर था और वही रहेगा'

'ज्ञानवापी एक मंदिर था और वही रहेगा'

ज्ञानवापी मस्जिद पर जारी विवाद के बीच बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इतिहासकार राजीव श्रीवास्तव ने इस मसले पर एक बहुत बड़ी बात कही है। उन्होंने इंडिया टुडे से मस्जिद के सर्वे में मिले 'साक्ष्यों' को लेकर कहा है कि 'ज्ञानवापी एक मंदिर था और वही रहेगा।' उन्होंने यहां तक कहा है कि जब पर्याप्त सबूत पहले ही मिल गए हैं तो कोर्ट क्या फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को गिराने का फरमान दिया था, जिसके ऊपर मस्जिद बनाई गई है। श्रीवास्तव के मुताबिक, 'औरंगजेब का फरमान भी मौजूद है। किताब में मंदिर तोड़े जाने का जिक्र है।'

'विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती'

'विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती'

बीएचयू के इतिहासकार का कहना है कि 'कमल का फूल, गणेश की आकृति, शिवलिंग, सब कुछ मिल चुका है। कुरान के मुताबिक एक विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती।' उन्होंने कहा कि, '350 वर्षों से यह जगह मुसलमानों के पास था और बहुत ज्यादा विनाश हुआ, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं कि वहां पर एक मंदिर बना हुआ था। उन्होंने शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन जब वे उसे नहीं तोड़ सके, तो मुसलमानों ने वहां वजू खाना बना दिया और हाथ-पैरा धोना शुरू कर दिया, शिवलिंग का अपमान करने के लिए। '

'मस्जिद के अंदर तस्वीर या कलाकृति नहीं बन सकती'

'मस्जिद के अंदर तस्वीर या कलाकृति नहीं बन सकती'

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने बताया है कि 'कुरान कहता है कि मस्जिद के अंदर कोई भी तस्वीर या कलाकृति नहीं बनाई जा सकती, जबकि हिंदू धर्म में हमारे पास हर चीज का प्रतीक है, चाहे यह एक सांप हो या फिर कमल।' उनका दावा है कि शिवलिंग के ऊपर ढांचा बनाया गया, ताकि इसे छिपाया जा सके। उन्होंने कहा, 'निश्चित तौर पर भगवान शिव काशी में ही मिलेंगे, मक्का और मदीना में नहीं। '

वाराणसी कोर्ट के आदेश पर हुआ है सर्वे

वाराणसी कोर्ट के आदेश पर हुआ है सर्वे

मौजूदा कानूनी विवाद ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हिंदुओं को पूजा की अनुमति देने को लेकर दायर याचिका से जुड़ा है। इसमें मस्जिद परिसर की पश्चिमी दीवार के भीतर माता श्रृंगार गौरी समेत बाकी देवी-देवताओं की प्रतिदिन पूजा करने की छूट मिलने की अनुमति मांगी गई है। पिछले साल दिल्ली की पांच महिलाओं ने इस संबंध में वाराणसी के सिविल कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसपर पिछले महीने अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी कराकर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।

'शिवलिंग' वाले क्षेत्र को सील किया गया है

'शिवलिंग' वाले क्षेत्र को सील किया गया है

सोमवार को अदालत की ओर से सर्वे प्रक्रिया में शामिल वकीलों की ओर से दावा किया गया था कि मस्जिद के भीतर एक कुएं से 'शिवलिंग' मिला है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष इस दावे को यह कहकर खारिज कर रहा है कि वह शिवलिंग नहीं, एक फव्वारा है। लेकिन, निचली अदालत ने 'शिवलिंग' वाले क्षेत्र को सील करके सुरक्षित रखने का आदेश दिया है, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा रखी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इसपर आगे की सुनवाई होगी, तबतक उसने वाराणसी सिविल कोर्ट की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई गई है।

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