Gyanvapi Mosque survey: वाराणसी का मंदिर-मस्जिद विवाद क्या है ? पूरा मामला जानिए
वाराणसी, 8 मई: ज्ञानव्यापी मस्जिद के सर्वे कराने का वाराणसी की एक अदालत के आदेश की तामील शनिवार को भी पूरी नहीं हो पाई। मुसलमानों ने एडवोकेट कमिश्नर की अगुवाई में सर्वे करने गई टीम को दूसरे दिन भी मस्जिद परिसर के अंदर में नहीं घुसने दिया। दरअसल, इस मामले का कानूनी विवाद भी तीन दशक से ज्यादा पुराना है। नया मामला ज्ञानव्यापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थिति भगवती श्रींगार गौरी और दूसरे देवी-देवताओं की पूजा को लेकर है। यह याचिका दिल्ली की कुछ महिलाओँ ने डाला है। जानिए यह मामला है क्या और इसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग क्या हो रही है और इसके विरोध का क्या कारण है ?

कोर्ट के आदेश से हो रहे सर्वे में क्या अड़चन आई ?
वाराणसी की एक स्थानीय अदालत के 26 अप्रैल के आदेश के मुताबिक शुक्रवार को एक एडवोकेट-कमिश्नर की अगुवाई वाली टीम काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानव्यापी मस्जिद पहुंची और मस्जिद के बाहरी इलाकों का सर्वे शुरू किया। उन्होंने श्रींगार गौरी के स्थान की वीडियोग्राफी भी की। अदालत में हिंदू याचिकाकर्ताओं के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि सर्वे का यह काम 2-3 दिन और जारी रहेगा। लेकिन, सर्वे करने गई टीम को मुस्लिमों ने मस्जिद के भीतर घुसने से रोक दिया। उस वक्त वहां बड़ी तादाद में मुसलमान मौजूद थे। शनिवार को भी जब यह टीम सर्वे के लिए वहां पहुंची तो मुसलमानों ने उन्हें मस्जिद के भीतर दाखिल होने की अनुमति नहीं दी।

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानव्यापी मस्जिद विवाद क्या है ?
1991 में काशी के कुछ पंडितों ने वाराणसी की अदालत में कई याचिकाएं डालकर दावा किया कि ज्ञानव्यापी मस्जिद 1669 में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर बनाई गई थी। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि मस्जिद हटाकर वह जमीन हिंदुओं को वापस कर दी जाए। उन्होंने अदालत से ज्ञानव्यापी मस्जिद परिसर में पूजा की भी अनुमति मांगी। लेकिन, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसपर सुनवाई को स्थगित कर दिया। लेकिन, 9 नवंबर, 2019 को जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी-मस्जिद-भगवान राम जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया तो ज्ञानव्यापी का वह मामला दिसंबर, 2019 में फिर से जीवित हो गया।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पक्षकार का दावा
काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रमुख देवता स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के 'बाल सखा' (नेक्स्ट फ्रेंड)के तौर पर सिविल कोर्ट में विजय शंकर रस्तोगी नाम के एक व्यक्ति ने याचिका डाली। कानून में 'बाल सखा' के तौर पर उसका प्रतिनिधित्व करने की व्यवस्था है, जो खुद से अपना मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं है। याचिकाकर्ता ने ज्ञानव्यापी मस्जिद के निर्माण को अवैध बताते हुए मांग की थी कि पूरे परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सर्वे करवाई जाए। दावे के मुताबिक 12 ज्योतिर्लिंगो में शामिल भगवान विश्वेश्वर का मंदिर बहुत ही प्राचीन है (हिंदू मान्यताओं के आधार पर काशी धरती का सबसे पुराना शहर है जो भगवान भोलेनाथ के त्रिशूल पर स्थिर है) और लगभग 2,050 साल पहले इसका पुनर्निमाण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। दावे में यह भी कहा गया है कि शिवलिंग अभी भी मस्जिद के ही अंदर मौजूद है और भक्त सिर्फ उनकी परिक्रमा कर पाते हैं, लेकिन उनका जलाभिषेक कने से वंचित रह जाते हैं।

श्रींगार गौरी की पूजा का मामला क्या है?
मौजूदा केस श्रींगार गौरी से संबंधित है, जो 8 अप्रैल, 2021 को लगाई गई थी। यह याचिका दिल्ली की पांच महिलाओं राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और बाकियों ने लगाई है। इस याचिका में ज्ञानव्यापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित भगवती श्रींगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान और नंदी की प्रतिमाओं की प्रतिदिन पूजा करने की अनुमति मांगी गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी गुहार लगाई है कि दूसरे पक्ष को प्रतिमाओं को किसी तरह से नुकसान पहुंचाने से रोका जाए। अभी श्रद्धालुओं को एकमात्र चैत्र नवरात्र के अवसर पर इसके चौथे दिन ही श्रींगारी गौरी की पूजा करने दी जाती है। इस याचिका पर वाराणसी के सीनियर डिविजन सिविल कोर्ट ने 26 अप्रैल, 2022 को एडवोकेट कमिश्नर के जरिए सर्वे और वीडियोग्राफी कराने का आदेश दिया है।

ज्ञानव्यापी मस्जिद के पक्षकारों का क्या कहना है?
काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानव्यापी मस्जिद विवाद काफी पुराना है और काफी हद तक यह अयोध्या के रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की तरह ही है। काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष का दावा है कि मस्जिद हिंदुओं की जमीन पर बनी हुई है। लेकिन, ज्ञानव्यापी मस्जिद का संचालन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया इस याचिका के खिलाफ है। अंजुमन इंतेजामिया और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ज्ञानव्यापी मस्जिद के सर्वे और वीडियोग्राफी कराने के अदालत के आदेश को भी मानने को तैयार नहीं है।












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