गोरखपुर: चुनावी मौसम में नेतागिरी के साथ बढ़ी खादी की डिमांड
जनपद के सभी आश्रम के स्टोरों पर रेशमी व खादी कपड़ों की खूब डिमांड हो रही है। खरीदारों में (विशेषकर युवा वर्ग) रेडीमेड कपड़ों को विशेष तरजीह दे रहे हैं।
गोरखपुर। चुनाव हो और समर्थक खादी वेशभूषा में न हो ,ये संभव ही नही है। कुछ इसी तरह चुनावी समुद्र में गोते लगाने वालों की भीड़ इन दिनों गांधी आश्रम की दुकानों पर बहुतायत दिख रही है। जिससे हमेशा शांत दिखने वाले गांधी आश्रम की रौनक बढ़ गई है। जनपद के सभी आश्रम के स्टोरों पर रेशमी व खादी कपड़ों की खूब डिमांड हो रही है। खरीदारों में (विशेषकर युवा वर्ग) रेडीमेड कपड़ों को विशेष तरजीह दे रहे हैं। बंगाल की मसलिन खादी विभिन्न रंगों में उपलब्ध होने के कारण काफी पसंद की जा रही है। औसतन 25 से 30 थान की बिक्री हो रही है जो अपने में एक रिकार्ड है। ये भी पढ़ें: यूपी विधानसभा चुनाव 2017: साइकिल पर सवार अखिलेश, बीजेपी के लिए खतरे की घंटी?

महानगर के गोलघर स्थित गांधी आश्रम में ही रेडीमेड रेशमी व सूती कुर्तो की डिमांड दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सूती कपड़ों में कुर्ता व पायजामा के कपड़ों की काफी मांग है। सूती कपड़ों की रेंज 200 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति मीटर में उपलब्ध है। पैंट के लिए छह तारी व आठ तारी ने खास मुकाम बना लिया है। युवा नेताओं में खासकर रेशमी कपड़ों की विशेष डिमांड है। शर्ट के लिए मटका, कटिया, गरद (पश्चिम बंगाल) की जबर्दस्त बिक्री हो रही है। कोला (मध्य प्रदेश) व टसर (छत्तीसगढ़) के रेशमी कपड़े भी खूब लुभा रहे हैं।
आसाम के बने हुए अंडी व मूंगा थान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए है। 2100 रुपये प्रति मीटर की ऊंची कीमत के कारण इसे उच्च वर्ग में काफी पंसद किया जा रहा है। बंगाल की मसलिन खादी की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी हुई है। गांधी आश्रम गोलघर के विशेषरनाथ तिवारी ने बताया कि मसलिन की डिमांड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई ऐसे ग्राहक हैं जो पूरी थान खरीद रहे हैं। चुनाव के कारण भी रेशमी कपड़ों की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ ऐसे कपड़े भी हैं जो शॉर्ट पड़ रहे हैं। संस्था की ओर से गांधी आश्रम के सभी उत्पादों पर 30 फीसदी की छूट दी जा रही है। यह छूट 31 मार्च तक रहेगी। ये भी पढ़ें: यूपी विधानसभा चुनाव 2017: कांग्रेस-सपा का गठबंधन तय, शीला नहीं अखिलेश होंगे CM उम्मीदवार












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