Ghosi By Election: बड़ी हार के बाद अधर में लटका पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान का सियासी भविष्य?
उत्तर प्रदेश में मऊ जिले की घोसी सीट पर उपचुनाव समाप्त हो गया है। यहां बीजेपी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।
UP Ghosi Bypoll: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान यूं तो राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं लेकिन घोसी उपचुनाव में मिली हार ने उनके सियासी भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। दारा चौहान को पूर्वांचल का एक बड़ा ओबीसी नेता माना जाता था लेकिन सपा छोड़कर आए दारा को सपा ने ही जमीन पर पटक दिया। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो दारा को मिली इस बड़ी हार से उबरना आसान नहीं होगा।

इस हार से थम जाएगा दारा का सियासी सफर?
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यूपी के पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान को बड़ा सियासी झटका लगा है। करीब ढाई दशक के अपने राजनीतिक करियर में दारा ने हर दौर देखा है। वह दो बार राज्यसभा पहुंचे तो एक लोकसभा सांसद भी रहे। दो बार विधायक रहे तो यूपी में मंत्री के रूप में भी काम किया। लेकिन लगातार पाला बदलने की महात्वाकांक्षा उनको ले डूबी। जिस घोसी सीट पर दारा को अजेय समझा जाता था उसी सीट पर सपा के सुधाकर सिंह ने उनको 40 हजार मतों से हरा दिया है।
क्या दारा सिंह की महात्वाकांक्षा ले डूबी?
वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि,
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दारा सिंह बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी। उन्हें लगा कि हवा बीजेपी के खिलाफ है इसलिए उन्होंने अखिलेश यादव का दामन पकड़ लिया। अखिलेश यादव ने भी मौके की नजाकत को भांपते हुए उन्हें गले लगाया और घोषी से टिकट भी दे दिया।
बीजेपी से लड़ने का दांव पड़ा उल्टा
दरअसल 2022 के विधानसभा चुनाव में दारा सिंह चौहान सपा के टिकट पर चुनाव तो जीत गए लेकिन यूपी में बीजेपी की सरकार बन गई लिहाजा उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। साल भर के भीतर ही उनका मन सपा से भर गया और सपा से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए। उन्हीं की खाली सीट पर चुनाव हुआ और उन्हीं को दोबारा उतार दिया गया। लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया और दारा को अब तक की सबसे बड़ी सियासी शिकस्त झेलनी पड़ी गई।
हार के बाद भी जीत पाएंगे बीजेपी का भरोसा
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि घोसी सीट पर दारा की हार ने कई सवाल खड़े किए हैं। दारा का राजनीतिक भविष्य क्या होगा। क्या बीजेपी अब दारा को उसी तरह का सम्मान देगी जैसी डिप्टी सीएम केशव मौर्य के हारने पर उनको डिप्टी सीएम बना दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी ऐसा कुछ नहीं करने वाली। अब दारा को समय का इंतजार करना होगा क्योंकि अब वह न तो विधायक रहे और न ही सांसद। ऐसे में बीजेपी को उनको कितनी जरूरत है यह देखना दिलचस्प होगा।
क्या अब योगी के मंत्रिमंडल विस्तार में मिलेगी जगह
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मंत्री दारा सिंह चौहान को मिली इस हार के बाद अब पूर्वांचल की राजनीति में उनका कद और पूछ दोनों घटना तय है। सूत्रों की माने तो दारा को भरोसा था कि यूपी में बीजेपी की सरकार है और उपचुनाव में वह आसानी से जीत जाएंगे। चुनाव जीतने के बाद दोबारा वह योगी के मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। लेकिन उनकी सारी ख्वाहिशें अधूरी रहेंगी। घोसी में मिली इस हार के बाद अब वह बीजेपी पर कितना दबाव बना पाएंगे यह देखना दिलचस्प होगा।












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