यूपी: अमीर विधायक के क्षेत्र का एक गांव जहां बच्चे-बूढ़े सब हैं कर्ज में डूबे

झांसी जिले में एक गांव ऐसा है जहां हर बच्चा कर्ज में ही जन्म लेता है। यहां के लोगों पर करोड़ों रुपए का कर्ज है। यहां के विधायक महंगी गाड़ी से घूमते हैं।

झांसी। झांसी जिले के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक गरौठा विधानसभा क्षेत्र का जलालपुरा गाँव है।गाँव के ऊपर करोड़ों रुपये का कर्ज है। गाँव का प्रत्येक परिवार कर्ज से परेशान है। यहाँ पर जन्म लेने बाला प्रत्येक बच्चा कर्ज में ही जन्म लेता है। लोगों का कहना है कि उनकी स्थिति बहुत खराब हो गयी है। इस क्षेत्र के एक दशक तक विधायक दीप नारायण सिंह रहे, लेकिन यहाँ के हालात नहीं बदले । जबकि यहाँ के जनप्रतिनिधि महँगी गाड़ियों में घूमते है। महँगी गाड़ियों में घूमने वाले लोग आज फिर से वोट मांगने आ रहे हैं।

जगदीश सिंह ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक से दो बेटियों की शादी के लिए 2008 में 4 लाख रुपये लिए. लगातार फसल खराब होने के कारण वह 4 लाख में 40 हज़ार रुपये भी वापस नही कर पाया हूँ। इनका कहना है कि बेटियों की शादी जैसे मुसीबत बनकर आयी हो। फसल लगातार खराब हो रही है। बैंकों के द्वारा कई बार नोटिस दिये जा चुके हैं। इकलौते बेटे को वह इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन उसे गाँव से बाहर भेज ही नही पाये ।ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसने किसान क्रेडिट कार्ड पर रुपये न लिए हों। केसीसी के अलावा किसानों ने एचडीएफसी, पंजाब नेशनल बैंक, को-ओपरेटिव बैंक से भी क़र्ज़ ले रखा है।

सर्व यूपी ग्रामीण बैंक के अनुसार केसीसी के अलावा अन्य बैंकों से किसानों ने बड़ी धनराशी ले रखी है। उन्होंने बताया कि उनका बैंक कम क़र्ज़ देता है, जबकि दूसरी बैंकों से किसानों ने गोल्डन कार्ड हासिल कर रखे हैं। बैंक के अनुसार इस गाँव में किसानों पर 10 करोड़ का कर्ज है। एक-एक किसान ने 4-4 अलग-अलग बैंक से लोन ले रखे हैं, इस बैंक के तहत 13 गाँव आते हैं, लेकिन जलालपुरा सबसे ज्यादा कर्जदार है।

गाँव में अधिकतर छोटे किसान हैं। दो एकड़ से अधिक ज़मीन नहीं किसी के पास, लेकिन इसके बाद भी गाँव में 9-10 ट्रेक्टर थे। इनमे से पांच ट्रेक्टर की रिकवरी की जा चुकी है। कुछ ने ट्रेक्टर बेच दिए। पंचम सिंह के ट्रेक्टर की रिकवरी हो चुकी है ।वह बताते हैं कि दरअसल ट्रेक्टर खरीदा ही बेचने लिए जाता है।

जिले में किसानों की संख्या तीन लाख है. जानकार बताते हैं कि झाँसी मंडल में 1084 लेखपालों की आवश्यकता है. जबकि काम कर रहे सिर्फ 718 लेखपाल।

किसान बताते हैं कि मौसम की मार सहित कई चीजें कुदरत की देन हैं, लेकिन बदहाली का जिम्मेदार यहाँ के जनप्रतिनिधि भी हैं। उन्हें यहाँ की स्थिति पता तक नहीं है। विकास की बात करते हैं, कहते हैं कि विकास गाँवों का होगा तभी देश आगे बढ़ेगा, लेकिन जलालपुरा विधानसभा की ही स्थिति का यहाँ का प्रतिनिधित्व करने वालों को पता नहीं है। इस बार फिर से वोट मांगने आ रहे हैं, लेकिन वोट डालने जाने का मन नहीं।

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