भाई को मनाने के साथ इन पांच मुश्किलों से पार पाना होगा मुलायम के लिए चुनौती

लखनऊ। 76 साल के हो चुके मुलायम सिंह यादव अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नेता जी के नाम से मशहूर हैं।नेताजी को ही समाजवादी पार्टी और परिवार में सर्वेसर्वा माना जाता रहा है लेकिन राजनीति का ये दिग्गज आज बुरी तरह फंसा हुआ है।

mulayam

एक तरफ बेटा है, तो दूसरी तरफ हर कदम पर साथ देने वाला छोटा भाई। दोनों के बीच मुलायम हैं। शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

मुलायम के कई बार मनाने के बावजूद वो नहीं मानें, हालांकि कोशिश अभी भी जारी है। भाई को मनाने के साथ-साथ मुलायम के सामने इस समय ये पांच बड़ी चुनौतिया खड़ी हैं।

परिवार को एकजुट कर पाएंगे मुलायम

परिवार को एकजुट कर पाएंगे मुलायम

अपनी जवानी के दिनों में पहलवानी कर चुके मुलायम सिंह के परिवार में इन दिनों जोर-आजमाइश चल रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे मजबूत परिवार के मुखिया मुलायम सिंह के सामने इस समय अपने परिवार को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है।

यादव परिवार इस समय दो फाड़ है। अखिलेश के समर्थन में रामगोपाल यादव खुलकर सामने आ गए हैं। तो दूसरी तरफ शिवपाल के साथ उनके बेटे ने भी सपा में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश की राजननीति के जानने वाले कहते हैं कि पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले शिवपाल अगर परिवार से अलग हुए तो पार्टी में भी भूचाल आ जाएगा। शिवपाल के साथ 20 विधायक बताए जा रहे हैं।

संगठन को संभालना चुनौती

संगठन को संभालना चुनौती

मुलायम सिंह यादव के सामने दूसरी बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को बचाना है। मुलायम ने जब समाजवादी पार्टी बनाई तबसे शिवपाल ही संगठन का काम संभालते रहे हैं। पार्टी के छोटे कार्यकर्ता की पहुंच शिवपाल तक आसानी से है। ऐसे में शिवपाल के गुस्सा होने के बाद उनको मनाने के साथ ही मुलायम के सामने ये चुनौती है कि संगठन पर परिवार की लड़ाई का असर ना हो।

ऐसे 2017 के विधानसभा चुनाव में कैसे लड़ेंगे

ऐसे 2017 के विधानसभा चुनाव में कैसे लड़ेंगे

मुलायम से सामने सबसे बड़ी चुनौती 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के 2012 के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है। 2012 में सपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनें। 2017 के विधानसभा के लिए यूपी में सभी पार्टियां तैयारी शुरू कर चुकी हैं। ऐसे में अगर सपा परिवार के झगड़े में उलझी रही तो बहुत मुमकिन है उसे 2017 में भारी नुकसान हो। मुलायम सिंह को 2017 के विधानसभा को भी ध्यान में रखना है और परिवार भी संभालना है।

कार्यकर्ताओं में जोश भरना

कार्यकर्ताओं में जोश भरना

अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह में जिस तरह से पिछले कुछ समय से खींचतान चल रही है, उससे पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। समाजवादी पार्टी के बहुत सारे कार्यकर्ताओं को समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर पार्टी में होने क्या जा रहा है? अखिलेश और शिवपाल दोनों ही कह रहे हैं कि नेताजी मुलायम सिंह का फैसला आखिरी होगा लेकिन घटनाक्रम से तो लगता है कि उनसे बिना पूछे ही दोनों तरफ फैसले हो रहे हैं। ऐसे में विधानसभा की तैयारी में जुटा कार्यकर्ता हताश ना हो इसका ध्यान भी मुलायम सिंह को रखना होगा। मुलायन से सामने ये चुनौती है कि वो आम कार्यकर्ता का भरोसा पार्टी में बनाएं रखें और सपाइयों में जोश भरें।

पार्टी के नए-पुराने नेताओं में सामंजस्य

पार्टी के नए-पुराने नेताओं में सामंजस्य

2012 में सपा की सरकार बनने के साथ ही अखिलेश यादव की पार्टी के पुरानी पीढ़ी के लोगों के साथ टकराव की बात रह-रह कर सामने आती रही है। मामला दागी छवि के नेताओं को पार्टी में लेने की हो या फिर अधिकारियों की नियुक्ति का, अक्सर अखिलेश और पार्टी के दूसरे लोगों में टकराव हुआ है। माना जा रहा है कि पार्टी के कुछ पुराने लोगों की अखिलेश से पटरी नहीं बैठती तो अखिलेश भी नए ढंग से काम करना चाहते हैं। राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी मुलायम सिंह बखूबी जानते हैं कि तजुर्बे और युवा जोश का सही मिश्रण पार्टी के लिए जरूरी है। ऐसे में मुलायम के सामने पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी में सामंजस्य बैठाना बड़ी चुनौती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+