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फॉर्च्यूनर से सरकारी मीटिंग, मर्सिडी से डील्स, फर्जी IAS अधिकारी के खुलासे से सिस्टम में मची खलबली

Fake IAS officer Saurabh Tripathi: लखनऊ पुलिस ने 36 वर्षीय फर्जी IAS अधिकारी सौरभ त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी ने न सिर्फ अधिकारियों को चौंका दिया, बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि कैसे एक शख्स ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर खुद को ऊंचे पद पर साबित किया।

कभी फॉर्च्यूनर में बैठकर सरकारी मीटिंगों में पहुंचना, तो कभी मर्सिडीज और डिफेंडर से shady deals करना। त्रिपाठी का यह डबल रोल किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि उसने कई राज्यों में लोगों को ठगा और सोशल मीडिया के जरिए खुद को ताकतवर अफसर दिखाता रहा।

Fake IAS officer Saurabh Tripathi

फॉर्च्यूनर से मीटिंग, मर्सिडीज में डील्स

पुलिस जांच में सामने आया है कि सौरभ त्रिपाठी अलग-अलग मौकों पर अपनी पहचान बदलता था। जब वह सरकारी अधिकारियों और नेताओं से मिलता, तो फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियों में पहुंचता। वहीं जब deals करने की बारी आती, तो मर्सिडीज और डिफेंडर जैसी लग्जरी कारें उसका हथियार बन जातीं। इतना ही नहीं, उसके साथ निजी बॉडीगार्ड रहते थे, जिनमें से एक पुलिस वर्दी में भी नजर आता था। अब जांच चल रही है कि उसने इन लोगों को कहां से हायर किया और वर्दियां कैसे जुटाईं।

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कई राज्यों में फैला जाल

त्रिपाठी (Fake IAS officer Saurabh Tripathi) का धोखाधड़ी नेटवर्क यूपी से निकलकर उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और दिल्ली तक फैला हुआ था। लखनऊ में वह खुद को उत्तर प्रदेश सरकार का विशेष सचिव बताता था, जबकि दूसरे राज्यों में वह केंद्रीय सरकार का अधिकारी बन जाता था। सोशल मीडिया पर उसने मंत्रियों, नौकरशाहों और धार्मिक नेताओं के साथ तस्वीरें डालीं, जिससे लोग उसके झांसे में आते रहे। पुलिस का कहना है कि इन तस्वीरों ने उसके फर्जी दावों को सच साबित करने में अहम भूमिका निभाई।

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आलीशान ठिकाने का पर्दाफाश

पुलिस ने उसकी तीन संपत्तियों का पता लगाया है। मऊ में घर, नोएडा के गरिमा विहार में फ्लैट और लखनऊ के शालीमार वन वर्ल्ड में लग्जरी अपार्टमेंट। हालांकि ये सब किराये के मकान थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उसने इन महंगे पते को सिर्फ अपनी 'इमेज बिल्डिंग' के लिए लिया था। हर ठिकाना उसके झूठे प्रभाव और धन-दौलत की कहानी गढ़ने का जरिया था।

कैसे हुआ भांडाफोड़?

असलियत का खुलासा तब हुआ जब लखनऊ के वजीरगंज इलाके में पुलिस चेकिंग चल रही थी। सुबह कारगिल शहीद पार्क के पास एक काले रंग की लग्जरी कार को पुलिस ने रोका। कार में बैठे युवक ने तुरंत अपना रुतबा दिखाने की कोशिश की। उसने खुद को IAS बताते हुए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की और यहां तक धमकी दी कि वह मुख्यमंत्री तक शिकायत कर सकता है। लेकिन उसकी हरकतों और बातचीत के तरीके से पुलिस को शक हो गया।

पुलिस ने पूछताछ को गहराया और उससे पहचान पत्र व आधिकारिक दस्तावेज मांगे। इसी दौरान सच्चाई सामने आ गई। जो युवक खुद को IAS बता रहा था, उसका नाम वास्तव में सौरभ त्रिपाठी निकला, जो गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) का रहने वाला है। जांच में पता चला कि वह लंबे समय से फर्जी पहचान बनाकर नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के बीच अपना रसूख बढ़ा रहा था।

NGO के जरिए बड़े अधिकारियों और नेताओं तक पहुंच बनाई

सौरभ त्रिपाठी ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद एक एनजीओ बनाई। इसी एनजीओ के जरिए उसने धीरे-धीरे बड़े अधिकारियों और नेताओं तक पहुंच बनाई। मुलाकातों और तस्वीरों के जरिए उसने अपनी साख बनाई और फिर खुद को IAS अफसर बताकर रौब जमाने लगा। सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर उसने न सिर्फ लोगों को प्रभावित किया, बल्कि कारोबारी सौदों में भी पैसे ऐंठने लगा।

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