चुनाव बाद भी सुर्खियो में हैं कीमती गधे, पढ़िए क्या है इसकी वजह?

उत्तर प्रदेश चुनाव में चर्चित होने के बाद भारत के सबसे बड़े गर्दभ मेले में ऊंची कीमत पर गधे बिकते पाए गए। पढ़िए इस अनोखे मेले की पूरी कहानी।

इलाहाबाद। इस बार का यूपी विधानसभा चुनाव गधों को लेकर खासा चर्चित रहा था। राजनैतिक दलों ने गधे को ही मुद्दा बनाकर जमकर बयानबाजी की थी। सीएम से लेकर पीएम तक गधों की तारीफ व कमी से एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। लेकिन सूबे में योगी सरकार बन चुकी है। चुनावी शोर थम चुका है। लेकिन गधे फिर भी चर्चा में बने हुये हैं। इलाहाबाद मण्डल के कौशांबी में भारत का सबसे बड़ा गधा मेला लगा हुआ है जहां देश के कई हिस्से से गधों के खरीददार आये हुये हैं। हलांकि इस बार राजनीतिक नाम कमाने के बाद गधों की कीमत बढ़ गई है।

देश का सबसे बड़ा गर्दभ मेला

देश का सबसे बड़ा गर्दभ मेला

दरअसल गधों के इस सबसे बड़े और अनोखे मेले के पीछे धार्मिक मान्यता भी है जिसकी वजह से इस दो दिवसीय मेले का खास महत्व है। मान्यताओ में इसे गर्दभ अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। मालूम हो कि देवी सती के 51 स्वरूपों में शामिल मां शीतला की सवारी गधा है और कौशाम्बी जिले के कड़ा धाम स्थित मां शीतला सिद्ध शक्तिपीठ में से एक है। यहां पूरे देश से लोग माता दर्शन करने के लिये आते हैं। परंपरागत रूप से यहां हर साल चैत्र मास की अष्टमी को दो दिवसीय गर्दभ मेले का आयोजन होता है। अपने आप में यह मेला भारत का सबसे बड़ा गधा मेला है।

लाखों में हो जाती हैं कीमत

लाखों में हो जाती हैं कीमत

गदर्भ मेले में पंजाब, उत्तराखण्ड, बिहार, मध्य प्रदेश व जम्मू कश्मीर सहित प्रदेश के कोने-कोने से कारोबारियों के गधों ने हिस्सा लिया। जबकि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों से गधों के व्यापारी भी यहां बोली लगाने के लिये भी जुटे। यहां पहाड़ी क्षेत्र के खरीदार भी आते है। गधों को खरीदकर उत्तराखंड के केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री व वैष्णो देवी धाम आदि में श्रद्धालुओ को ढोने, सामान ढोने के काम में भी लगाया जाता है। यहां गधों की कीमत लाख रुपये से भी उपर पहुंच जाती है और हर साल भीड़ बढती ही जाती है।

इस मेले की है खास धार्मिक मान्यता

इस मेले की है खास धार्मिक मान्यता

कड़ा धाम के इस मेले में मान्यता है कि मां शीतला के दरबार में माथा टेकने के बाद मेले में जाकर गधों को दूब (घास), दूध और मिष्ठान खिलाना होता है। ऐसा करने वालों के परिवार के सभी कष्टों का नाश हो जाता है। उनके घर में अन्न, धन की कभी कमी नहीं होती है और परिवार में हमेशा शीतलता बनी रहती है।

गधों के होते हैं खास नाम

गधों के होते हैं खास नाम

यहां गंगा में गधे व उसके मालिक को एक साथ गंगा स्नान करना होता है। मेले में आते ही गधों के साथ उसके मालिक सबसे पहले गंगा तट जाते हैं, स्नान करते हैं और फिर मां शीतला मंदिर में माथा टेकते हैं। इसके बाद गधों को सजाया,संवारा जाता है। गधे भीड़ में कहीं गुम न हो जाएं। इसके लिए रंगों से उन पर खास नाम व निशान भी लगाया जाता है।

मेले में तय होती हैं शादियां
शीतलाधाम में लगने वाले गर्दभ मेले की एक और बड़ी खासियत यह है कि यहां शादियां तय होती हैं। मान्यता है कि यहां तय होने वाले रिश्तों में जिंदगी भर मिठास व शीतलता बनी रहती है। मेले में सबसे अधिक धोबी समाज के लोग जुटते हैं और इस बिरादरी के लोग बेटे-बेटियों का रिश्ता यहां तय करते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+