बीएचयू अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल, छात्र का सिर फोड़ने पर दर्ज हुआ केस
वाराणसी। बीएचयू के डॉक्टरों की मनमानी दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही है। जिस तरह छात्रों और बीएचयू के रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच संबंध खराब होते जा रहे हैं, यह बीएचयू के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। बताते चलें कि मंगलवार को संस्कृत विभाग का छात्र आकाश मिश्रा सर्जरी विभाग में हर्निया का इलाज कराने के लिए गया था। कुछ मामूली विवाद के बाद डॉक्टरों ने मिलकर उसका सिर फोड़ दिया था उसमें कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ चिन्हित करके लंका थाना में एफआईआर दर्ज हुई थी। उसके बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने सामूहिक ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। इस वजह से दूरदराज से आए मरीजों और उनके परिजनों को दो दिनों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब रेजिडेंट डॉक्टर अपने खिलाफ एफआईआर होने को वापस लेने का जिद पर अड़े हैं।

पीड़ित छात्र ने प्रोक्टोरियल बोर्ड और थाने में दर्ज कराई है एफआईआर
दरसअल पीड़ित छात्र के परिजनों का आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने छात्र आकाश मिश्र को इतना मारा कि उसका सिर फट गया। इसके बाद इस बात की शिकायत प्रॉक्टोरियल बोर्ड और लंका पुलिस से की दी गई है। डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी डॉक्टरों को होने वाली अगली परीक्षा शामिल नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद आरोपी डॉक्टर और उनके साथी इस फैसले के विरोध में उतर आए हैं और खुद पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग करते हुए हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में यूपी सहित बिहार और कई अन्य राज्यों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहती है पुलिस
इस पूरे मामले पर लंका थाने के इंचार्ज संजीव मिश्रा ने वनइंडिया को बताया की पीड़ित छात्र अपने साथ मारपीट के बाद शिव प्रसाद गुप्त चिकित्सालय में मेडिकल करने के बाद थाने आया था। उसके मेडिकल के आधार पर धारायें और बढ़ सकती हैं। इसी बात का विरोध जूनियर डाक्टर कर रहे हैं। बता दें कि पीड़ित छात्र के पिता पेशे के एडवोकेट है और इस बात की जानकारी के बाद कचहरी के एडवोकेट भी लामबंद होकर आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ करवाई पर अड़े हुए हैं।












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