सुलगता सहारनपुर, बवाल के लिए जिम्मेदार कौन, क्या प्लान्ड है सबकुछ?
सहारनपुर में लगातार जातीय संघर्ष हो रहे हैं और सामाजिक माहौल बिगड़ गया है। इस दहशत के माहौल को खत्म करने में पुलिस-प्रशासन नाकाम क्यों है? कौन है इस बवाल का जिम्मेदार?
सहारनपुर। सहारनपुर सुलग रहा है, इसका जिम्मेदार कौन है? हर कोई शासन-प्रशासन से यही सवाल पूछ रहा है। तीन सप्ताह में तीन बार सहारनपुर में बवालियों ने तांडव किया। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर किसकी नजर सहारनपुर के अमन-चैन को लग गई है। जरा-जरा सी बात पर खूनी खेल खेला जा रहा है जिसका खामियाजा बेगुनाहों को भुगतना पड़ता है। इन हालात में जनपद के लोगों में दहशत का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

9 मई को हुई सहारनपुर की तीसरी बड़ी घटना
शोभायात्रा निकालने को लेकर सड़क दूधली में हुए बवाल की आग शहर से सटे गांव रामनगर तक जा पहुंची है। नतीजा, यह हुआ है कि बवालियों ने पत्रकारों, पुलिसकर्मियों सहित राहगीरों के एक दर्जन वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, राहगीरों तथा पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। तीन सप्ताह में सहारनपुर में यह तीसरी बड़ी घटना है। 20 अप्रैल को दूधली में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष में शोभायात्रा निकालने के दौरान बवाल हुआ था। इसी तरह चार दिन पूर्व बड़गांव क्षेत्र के गांव शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की जयंती पर शोभायात्रा निकालने खूनी तांडव किया गया, जिसमें एक युवक की जान चली गई।

सख्ती से क्यों नहीं निपट रहा प्रशासन?
अभी इन घटनाओं के शोले बुझे भी नहीं थे कि शहर से सटे गांव रामनगर में उपद्रवियों ने बवाल कर दिया। पुलिसकर्मियों और पत्रकारों पर हमला किया गया। एक दर्जन से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया। तीन सप्ताह के अंदर इस तरह की तीन घटनाएं होना सहारनपुर की सेहत के लिए ठीक नहीं है। इन मामलों में प्रशासन का फेलियर भी साफ दिखाई दे रहा है। सबसे पहली घटनाएं में प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद आज रामनगर जलने से बच जाता। वहीं, उपद्रवियों के सामने प्रशासन भी बेबस दिख रहा है। इससे लोगों में दहशत का माहौल बना है। इन घटनाओं को लेकर आम शहरी की जुबान पर बस यही सवाल हैं कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? प्रशासन माहौल खराब करने वालों से सख्ती से क्यों नहीं निपट रहा है?

सहारनपुर के सौहार्द को बिगाड़ रहा कौन?
सहारनपुर के सांप्रदायिक सौहार्द को खराब करने की कौन साजिश रचा है?, पुलिस का खुफिया विभाग क्या कर रहा है? बवाल कराने के जिम्मेदार नेताओं पर भी क्यों कार्रवाई नहीं की जा रही है?, इन सवालों के जवाब लोग शासन और प्रशासन से पूछ रहे हैं। वहीं, जिलाधिकारी नागेंद्र प्रसाद और एसएसपी सुभाष चंद दुबे का कहना है कि सहारनपुर के अमन-चैन को खराब नहीं होने दिया जाएगा। माहौल खराब करने वाले उप्रदवियों से सख्ती से निपटाया जाएगा। तीनों घटनाओं में शामिल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगा दी गई हैं। किसी ने कानून हाथ में लेने की कोशिश की तो उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता है कि कानून का राज रहे।

पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा
जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है, तभी सहारनपुर लगातार सुलग रहा है। कभी सांप्रदायिक विवाद तो कभी जातीय संघर्ष और अब पुलिस बनाम दलित विवाद। इस सबके पीछे किसी की साजिश है, इसका पता लगाने में खुफिया विभाग पूरी तरह से नाकाम हो रहा है। दो दिन पहले प्रदेश शासन द्वारा सहारनपुर के हालातों का जायजा लेने के लिए प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को भेजा गया था। लेकिन इन दोनों ही उच्च अधिकारियों ने गांव सड़क दूधली और गांव शब्बीरपुर में जाकर पीड़ितों से कोई वार्ता नहीं की। पीड़ितों से किसी भी तरह की वार्ता न किए जाने की टीस मंगलवार को दलित समाज के लोगों चेहरे पर साफ नजर आई।

शब्बीपुर कांड के बाद अधिकारियों ने की खानापूर्ति
गांव रामनगर में हुआ दलित बनाम पुलिस विवाद किसकी देन है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन दलितों के चेहरे पर जो गुस्सा और खौफ नजर आ रहा था, वह यह साफ संकेत कर रहा था कि उनके साथ प्रदेश में न्याय नहीं हो रहा है। विगत पांच मई को गांव शब्बीरपुर में हुए जातीय बवाल के दौरान दलितों के घरों में आग लगा दी गई थी और उनके साथ मारपीट की गई थी तो दूसरे पक्ष राजपूत बिरादरी के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था। शब्बीरपुर के जातीय संघर्ष की गूंज जब लखनऊ तक पहुंची तो शासन की ओर से जनपद के हालातों का जायजा लेने के लिए प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पांडा और डीजीपी सुलखान सिंह को यहां भेजा गया था। यह दोनों ही अधिकारी यहां सुबह ही सहारनपुर पहुंच गए थे। दोनों अधिकारियों ने पूरा दिन अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति पर वार्ता की। बाद में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से वार्ता की और मीडिया के समक्ष सुदृढ़ कानून व्यवस्था बनाए जाने का दावा किया।

मंगलवार के बवाल में दलितों ने पुलिस को बनाया निशाना
यहां लोगों के दिमाग में यह सवाल कौंध रहा है कि जब शासन के दोनों अधिकारियों को सहारनपुर भेजा गया था तो दोनों ही उच्चाधिकारी गांव सड़क दूधली और गांव शब्बीरपुर में क्यों नहीं गए। केवल सर्किट हाऊस में राजनीतिक दलों से क्यों वार्ता की? गांव सड़क दूधली और शब्बीरपुर में सभी पक्षों के पीड़ितों के लोगों से मुलाकात कर उनका पक्ष क्यों नहीं सुना गया, यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। गांव सड़क दूधली रहा हो या शब्बीरपुर दोनों में हुए विवाद में पुलिस प्रशासन का रवैया शिथिल रहा है। मंगलवार को दलित बनाम पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद भी कुछ इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं कि प्रमुख गृह सचिव और डीजीपी के गांव शब्बीरपुर में जाकर पीड़ितों की बात न सुनना भी इस बवाल का कारण रहा है। कुल मिलाकर जनपद में जो भी कुछ हो रहा है, वह न तो जनपद और न ही प्रदेश के लिए सही है। हां, इस तरह के बवाल के बाद राजनीतिक दल जरूर अपनी रोटियां सेंकते नजर आएंगे।

सहारनपुर के हर कोने में उपद्रव
सड़क दूधली प्रकरण, 5 मई शब्बीरपुर प्रकरण के बाद अब 9 मई के बाद एक ही समाज के लोगों द्वारा जिस प्रकार से जनपद की चारों कोने में उत्पाद मचाया गया है। उससे ऐसा प्रतीत होता है कि उपद्रवियों द्वारा पूर्व से सब कुछ प्लान कर किया गया था। सहारनपुर के गांव रामनगर, नाजिरपुरा, चिलकाना व मानकमऊ में उपद्रवियों ने आगजनी की, जिससे पूरे जनपद में दंगे की अफवाह फैल गई और भगदड़ मच गई।

सुनियोजित तरीके से हुआ सहारनपुर में बवाल?
एक ही माह में जनपद तीन बार जातीय हिंसा की आग में झुलसे गया। लेकिन मंगलवार को रामनगर में हुए बवाल के बाद जनपद के चारों कोने में हिंसा की आग लग गई। एक ही समय दोपहर करीब 12:00 बजे शुरू हुए रामनगर में बवाल के बाद बेहट रोड स्थित नाजिरापुरा में प्राइवेट बस को आग के हवाले कर दिया गया, चिलकाना में उपद्रवियों ने भी जमकर उत्पात मचाया, इसी के साथ चौथे कोने मानकमऊ में भी हिंसा की सूचना मिली। एक ही समय चारो दिशाओं में हुए बवाल से प्रतीत होता है कि यह सब कुछ पूर्व से प्री प्लान था। इतना ही नहीं, उपद्रवियों ने जिस प्रकार से अपने मुंह पर कपड़ा बांधकर पुलिस व मीडियाकर्मियों पर पथराव किया कि आज उनकों यह करना ही है। सूत्रों की मानें तो भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार की रात सभी गांवों में दौरा कर इस बाबत सूचना दी और सब कुछ पहले से सुनियोजित किया गया था।

आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में चार गिरफ्तार
सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक पोस्ट द्वारा जातीय उन्माद फैलाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोतवाली सदर बाजार पुलिस ने व्हाट्सअप पर समाज विरोधी मैसेज वायरल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मंगलवार को कोतवाली सदर बाजार इंस्पेक्टर जितेन्द्र सिंह कालरा ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ लोगों ने जातीय उन्माद भड़काने वाली आपत्तिजनक पोस्ट वायरल की थी। सूचना मिलने पर पड़ताल की गई तो मामला सही निकला। इंस्पेक्टर ने बताया कि आपत्तिजनक पोस्ट वायरल करने के मामले में व्हाट्सअप गु्रप के एडमिन सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गये आरोपियों में सचिन, आर गौतम, राहुल भारती व रजत कटारिया आदि शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ धारा 51 (1)(सी), 52 (2), 12 बी व आईटीएक्ट की धारा 67 के तहत साईबर क्राइम सेल के उपनिरीक्षक जयवीर सिंह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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