संकट में अखिलेश यादव : क्या समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ रहे मुसलमान, मायावती का प्लान-M काम कर गया ?
लखनऊ, 14 अप्रैल: समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक के बाद एक सपा के मुस्लिम नेताओं के तीखे बयान सामने आ रहे हैं। सपा गठबंधन में शामिल आरएलडी के बड़े मुस्लिम नेता और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क और अब कद्दावर नेता आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां ने बगावती तेवर दिखाए हैं। इन बयानों के बाद ये सवाल उठने लगा है कि क्या मुसलमान समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं? अगर हां, तो इसके पीछे कारण क्या है और इसका फायदा किस पार्टी को होगा? यही नहीं, इस बीच बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के पुराने बयान भी चर्चा में आ गए हैं। कहा ये भी जाने लगा है कि मायावती का प्लान-M काम कर रहा है।

इन तीन कारणों से मुसलमानों की है सपा से नाराजगी?
1. मुसलमानों के समर्थन में नहीं बोल रहे अखिलेश : चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों और बदमाशों के घरों और संपत्तियों पर बुल्डोजर चलनावा शुरू कर दिया है। आरोप है कि इसमें ज्यादातर संपत्ति मुसलमानों की है। मुस्लिम वर्ग का कहना है कि इस कार्रवाई के खिलाफ अखिलेश कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं। यहां तक की एक बार भी इसको लेकर अखिलेश ने बयान नहीं दिया।
2. आजम खान को नेता प्रतिपक्ष न बनाना : मुसलमान चाहते थे कि विधानसभा में आजम खान को कम से कम नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। मुसलमानों का कहना है कि अगर चुनाव जीत जाते तो अखिलेश मुख्यमंत्री बनते, लेकिन हार के बाद तो कम से कम आजम को उचित सम्मान दिया जाता।
3. मुसलमान एकजुट हुए, लेकिन सपा के वोटर्स भटक गए : मुसलमानों का कहना है कि चुनाव में उन्होंने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के लिए वोट किया, लेकिन सपा के यादव वोटर्स ही पूरी तरह से उनके साथ नहीं आए। इसके चलते चुनाव में हार मिली।

मायावती का प्लान-M क्या है?
चुनाव में मिली हार के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने मुसलमान वोटर्स से नाराजगी जाहिर की थी। कहा था कि अगर मुसलमान सपा की बजाय बसपा का साथ देते तो भाजपा को हराया जा सकता था। आगे उन्होंने यह भी कहा कि अब भी मुसलमान अगर सतर्क हो जाएं तो भाजपा को हराया जा सकता है। इसके लिए मायावती ने प्लान-M यानी मुसलमान बनाया है। मायावती का फोकस है कि 2024 तक मुसलमान वोटर्स पूरी तरह से बसपा के साथ जुड़ जाएं।
क्या वाकई में सपा का साथ छोड़ देंगे मुसलमान, किसे होगा फायदा?
- हर चुनाव में मुसलमान वोटर्स ये देखते हैं कि भाजपा को हराने के लिए सबसे मजबूत कौन सी पार्टी है? कुछ मुसलमान अभी अखिलेश से नाराज चल रहे हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में मुसलमान अभी भी सपा के साथ खड़े हैं। ऐसे में 2024 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए मुसलमान कांग्रेस का साथ दे सकते हैं।
- इसके अलावा एआईएमआईएम मुखिया ओवैसी भी लगातार मुसलमानों को एकजुट रहने की बात कर रहे हैं। इसलिए मुसलमानों को अगर अखिलेश का साथ पसंद नहीं आया तो वह एआईएमआईएम के साथ जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एआईएमआईएम एकमात्र पार्टी है जिससे सबसे ज्यादा मुसलमान जुड़े हुए हैं।
- मुसलमानों के लिए तीसरा विकल्प बसपा है। बसपा के साथ दलित वोटर्स का मजबूत कैडर है। मायावती बार-बार कह रहीं हैं कि दलित-मुसलमान एक होकर ही भाजपा को हरा सकते हैं। ऐसे में मायावती का ये ऑफर भी मुसलमानों को पसंद आ सकता है। मायावती ने 2022 विधानसभा चुनाव में भी सबसे ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया था।
सपा के दिग्गज नेताओं ने क्या-क्या बयान दिए?
1. फसाहत अली खां : समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां ने अभी ताजा बयान दिया है। रविवार को रामपुर में एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इसमें उन्होंने आजम खान का जिक्र किया। कहा कि जेल में बंद आजम खां के जेल से बाहर न आने की वजह से हम लोग सियासी रूप से यतीम हो गए हैं। हम कहां जाएंगे, किससे कहेंगे और किसको अपना गम बताएं?
हमारे साथ तो वो समाजवादी पार्टी भी नहीं है, जिसके लिए हमने अपने खून का एक-एक कतरा बहा दिया। हमारे नेता मोहम्मद आजम खां ने अपनी जिंदगी सपा को दे दी, लेकिन सपा ने आजम खां के लिए कुछ नहीं किया। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को हमारे कपड़ों से बदबू आती है।
मुसलमानों की तरफ इशारा करते हुए फसाहत ने कहा कि क्या सारा ठेका अब्दुल ने ले लिया है? वोट भी अब्दुल देगा और जेल भी अब्दुल जाएगा? अब्दुल बर्बाद हो जाएगा। घर की कुर्की हो जाएगी। वसूली हो जाएगी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुंह से एक शब्द नहीं निकलेगा। हमने आपको और आपके वालिद को मुख्यमंत्री बनाया। हमारे वोटों की वजह से आपकी 111 सीटें आई हैं। आपकी तो जाति ने भी आपको वोट नहीं दिया। लेकिन, फिर भी मुख्यमंत्री आप बनेंगे और नेता विपक्ष भी आप बनेंगे। कोई दूसरा नेता विपक्ष भी नहीं बन सकता। आपने भाजपा से हमारी दुश्मनी करा दी और सजा भी हमें मिल रही है, लेकिन मजे आपको मिल रहे हैं।
आपके मुंह से विधानसभा और लोकसभा में एक भी शब्द नहीं निकला। आप एक बार ही आजम खां से जेल में मिलने के लिए पहुंचे हैं, दूसरी बार मिलने तक की जहमत नहीं उठाई। क्या यह मान लिया जाए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है कि अखिलेश जी आप नहीं चाहते कि आजम खां जेल से बाहर आएं। ये सच है।
2. डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क : संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क से मीडिया ने पूछा कि भाजपा सरकार मुसलमानों के हित में काम कर रही है या नहीं? इस पर उन्होंने जवाब दिया। कहा, 'भाजपा के कार्यों से वह संतुष्ट नहीं हैं। भाजपा सरकार मुसलमानों के हित में काम नहीं कर रही है।
शफीकर्रहमान यहीं नहीं रूके। आगे उन्होंने अपनी खुद की पार्टी को लपेटे में ले लिया। कहा, 'भाजपा को छोड़िए समाजवादी पार्टी ही मुसलमानों के हितों में काम नहीं कर रही।' इसके बाद वह अपनी गाड़ी में सवार होकर चले गए।
3. डॉ. मसूद अहमद : रालोद प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ. मसूद ने चुनाव नतीजे आने के कुछ दिनों बाद ही अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेज दिया। इसमें उन्होंने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा था। अखिलेश को तानाशाह तक कह दिया था। सपा पर टिकट बेचने का आरोप भी लगाया था।












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