बदल सकता है बुलंदशहर सदर सीट का चुनावी समीकरण, गुड्डू पंड़ित रालोद में हुए शामिल
दबंग और बाहुबली छवि के बावजूद बुलंदशहर सदर सीट से बसपा के हाजी अलीम लगातार दो बार से विधायक हैं।
बुलंदशहर। वोटिंग का समय नजदीक आता जा रहा है और साथ ही तेज होती जा रही हैं विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां। सपा से निष्कासित और बीजेपी से टिकट ना मिलने के बाद विधायक भाईयों ने राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया है। राजनीतिक पंड़ितों की मानें तो गुडडू पंड़ित के रालोद का दामन थामने के बाद बुलंदशहर सदर सीट पर बीजेपी के समीकरण बिगडते दिखाई दे रहे हैं और इसका सीधा फायदा बसपा के हाजी अलीम को होता दिख रहा है।

दबंग और बाहुबली छवि के बावजूद बुलंदशहर सदर सीट से बसपा के हाजी अलीम लगातार दो बार से विधायक हैं। विधानसभा चुनाव 2012 में हाजी अलीम ने बीजेपी के वीरेन्द्र सिंह सिरोही को 7 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया था। इस बार भी बीजेपी ने जाट नेता वीरेन्द्र सिंह सिरोही पर दांव खेला है। राजनैतिक जानकारों के मुताबिक जिले के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसी स्थिति में बुलंदशहर सदर सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो जाएगा।
बता दें कि बुलंदशहर सदर सीट पर ब्राह्मण 28 हजार, ठाकुर 20 हजार, वैश्य 31 हजार, मुस्लिम 95 हजार, जाट 35 हजार, जाटव 51 हजार, लोधी 32 हजार, बाल्मीकि 12 हजार व अन्य 57 हजार मतदाता हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि 2012 के चुनाव में राक्रांपा बीजेपी के विरोध में थी। इस साल बुलंदशहर से गुडडू पंडित को रालोद से टिकट मिलने पर जाट वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। जिससे मुकाबला इस सीट पर रोचक हो जाएगा। यूपी चुनाव: सपा-कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल नहीं होगी आरएलडी
सदर सीट पर वापसी की राह तलाश रही रालोद
कांग्रेस की लहर में भी चौधरी चरण सिंह की पार्टी जिले की कई सीटों पर चुनाव जीतती रही, लेकिन 1985 के बाद से खाता भी नहीं खोल पाई है। लोकदल के विधायक के तौर पर 1985 में बाबू त्रिलोक चंद्र और किरनपाल सिंह अंतिम बार चुने गए थे। इस बार रालोद ने बुलंदशहर सदर सीट से गुड्डू पंडित और शिकारपुर सीट से मुकेश शर्मा को टिकट दिया है।












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