यूं ही नहीं यूपी के चुनावी दंगल से प्रियंका गांधी ने किया किनारा

आखिर क्यों प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में अमेठी और रायबरेली में अपना चुनाव प्रचार रद्द किया, बागियों और मुलायम की रैलियों से कांग्रेस के हाथ पैर फूले।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन के बाद माना जा रहा था कि दोनों ही दल मिलकर चुनावी मैदान में ताल ठोंकेंगे। कांग्रेस की ओर से स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी को डिंपल यादव के साथ मिलकर तमाम रैलियों को संबोधित करने की कवायद लगाई जा रही थी। यही नहीं प्रियंका गांधी का कार्यक्रम तक घोषित हो गया था, लेकिन आखिरी समय में प्रियंका गांधी का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। प्रियंका गांधी की रायबरेली और अमेठी में 13 फरवरी से 18 फरवरी के बीच होने वाली रैलियों को स्थगित कर दिया गया है।

जमीनी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रियंका ने रद्द किया कार्यक्रम

जमीनी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रियंका ने रद्द किया कार्यक्रम

माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस-सपा गठबंधन के लिए प्रचार कर सकती हैं लेकिन आखिरी समय में उनके कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। सूत्रों की मानें तो जमीनी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रियंका गांधी ने रैली को रद्द करने का फैसला लिया है। प्रियंका गांधी का नाम कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी था। प्रियंका रायबरेली और अमेठी में तकरीबन एक दशक से पार्टी के लिए प्रचार भी करती आई हैं लेकिन जिस तरह से इस बार उनका कार्यक्रम रद्द किया गया है उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सपा के बागियों ने कांग्रेस के लिए खड़ी की मुश्किल

सपा के बागियों ने कांग्रेस के लिए खड़ी की मुश्किल

कांग्रेस रायबरेली और अमेठी में 10 सीटों से चुनाव लड़ रही है, लेकिन यहां से मौजूदा सपा विधायकों ने यहां से या तो निर्दलीय लड़ने का ऐलान किया है या फिर वह आरएलडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ ऐसे नेता भी हैं जो स्थानीय पार्टी की ओर से चुनाव लड़ रही है। पिछले चुनाव में रायबरेली और अमेठी की 10 में से 7 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। मौजूदा सपा विधायक मनोज पांडे रायबरेली की उंचाहार सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं, उन्हें इस सीट पर काफी मजबूत दावेदार माना जाता है।

मुलायम की प्रस्तावित रैलियों से कांग्रेस के हाथ-पैर फूले

मुलायम की प्रस्तावित रैलियों से कांग्रेस के हाथ-पैर फूले

यही नहीं कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं जो सपा-कांग्रेस के गठंधन के बाद भी आमने-सामने हैं। अमेठी से गायत्री प्रजापति सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तो गौरीगंज से भी सपा के टिकट पर राकेश प्रताप सिंह मैदान में हैं। दोनों ही नेता अपने संसदीय क्षेत्र में मुलायम सिंह को रैली के लिए आमंत्रित करने वाले हैं। ऐसे में सूत्रों की मानें तो मुलायम सिंह के यहां के चुनाव प्रचार में आने से हाथ-पैर फूल गए हैं।

2012 में 10 में से सिर्फ 2 सीट पर मिली जीत

2012 में 10 में से सिर्फ 2 सीट पर मिली जीत

कांग्रेस के लिए रायबरेली में सिर्फ एक ऐसी सीट है जहां उसे आसानी से जीत हासिल हो सकती है, जहां से अखिलेश सिंह की बेटी जिन्होंने निर्दलीय यहां से चुनाव जीता था मैदान में है। लेकिन इस सीट पर जीत का भी श्रेय़ अखिलेश सिंह को जाएगा बजाए प्रियंका गांधी के। प्रियंका गांधी ने 2012 में कांग्रेस के लिए ताबड़तोड़ प्रचार किया था और उन्होंने 100 से अधिक जगह जनसभाएं भी की थी, उन्होंने कुल 10 सीटों पर तमाम लोगों से जनसंपर्क किया, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस यहां से सिर्फ दो ही सीटें जीत सकी थी।

लगातार हार प्रियंका की छवि को पहुंचा सकती है नुकसान

लगातार हार प्रियंका की छवि को पहुंचा सकती है नुकसान

2007 में कांग्रेस ने 10 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की थी और इसका पूरा श्रेय प्रियंका गांधी को मिला था, लेकिन 2012 के नतीजों के बाद प्रियंका गांधी की छवि का काफी नुकसान पहुंचा था। इस बार सपा के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस ने सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही थी और उसे उम्मीद थी कि सपा इसके लिए तैयार हो जाएगी लेकिन सपा के बागी उम्मीदवारों ने पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी और कांग्रेस की पूरी रणनिति को तहस-नहस करके रख दिया।

2019 के लिए प्रियंका को दूर रखा जा रहा

2019 के लिए प्रियंका को दूर रखा जा रहा

कांग्रेस की अंदरूनी रिपोर्ट के अनुसार लगातार दो बार रायबरेली और अमेठी में विधानसभा चुनावों में हार से प्रियंका गांधी की छवि को काफी नुकसान पहुंच सकता है। इसी के चलते प्रियंका गांधी ने के कार्यक्रम को रद्द किया गया है। ऐसे में कांग्रेस प्रियंका गांधी की छवि को 2019 के चुनाव के लिए बचाकर रखना चाहती है और उन्हें यूपी में चुनाव प्रचार से दूर रखा जा रहा है।

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