यूपी चुनाव: मुकाबले में बेटी और भतीजा, परेशानी में बीजेपी सांसद
इस बार बीजेपी ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को टिकट दिया है, लेकिन उनके मुकाबले में राष्ट्रीय लोकदल ने अनिल चौहान को उम्मीदवार बनाया है। अनिल चौहान, बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के भतीजे हैं।
कैराना। यूपी के विधानसभा क्षेत्र कैराना में इस बार परिवार का झगड़ा देखने को मिल रहा है। यहां से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने जून 2016 में हिंदुओं के पलायन का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव सरकार पर जमकर निशाना साधा था। माना जा रहा था कि बीजेपी इस चुनाव में भी उस मुद्दे को हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी, लेकिन चुनाव करीब आने के बाद बीजेपी सांसद हुकुम सिंह का ये दांव फेल होता दिख रहा है।

बीजेपी सांसद की बेटी और भतीजे आमने-सामने
हुआ यूं की इस बार बीजेपी ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को टिकट दिया है, लेकिन उनके मुकाबले में राष्ट्रीय लोकदल ने अनिल चौहान को उम्मीदवार बनाया है। अनिल चौहान, बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के भतीजे हैं। उनका दावा है कि बीजेपी के कई कार्यकर्ता उनके समर्थन में हैं।

हुकुम सिंह की बेटी को बीजेपी ने दिया टिकट
बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के सामने परेशानी ये है कि पिछले साल जब उन्होंने क्षेत्र से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया तो भतीजे अनिल चौहान उनके साथ थे। अब अनिल चौहान राष्ट्रीय लोकदल से उम्मीदवार हैं, उनका कहना है कि बीजेपी सांसद अपनी बेटी की सीट सुरक्षित करने के लिए इस मुद्दे को उठा रहे हैं। बेटी और भतीजे के बीच चुनावी जंग का असर परिवार के कैराना में स्थित पैतृक भवन पर भी दिख रहा है। जहां बीजेपी और आरएलडी दोनों ही पार्टियों के पोस्टर लगे हुए हैं।

पिछले साल जून में बीजेपी सांसद ने उठाया हिंदुओं के पलायन का मुद्दा
बता दें कि पिछले उपचुनाव अनिल चौहान बीजेपी से उम्मीदवार थे लेकिन करीब 1100 वोटों से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नाहिद हसन से चुनाव हार गए। इस बार बीजेपी ने अनिल चौहान को नजरअंदाज करते हुए मृगांका को पार्टी का उम्मीदवार बना दिया। जिससे नाराज होकर अनिल चौहान राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें यहां से उम्मीदवार बना दिया।

समाजवादी पार्टी ने नाहिद हसन को बनाया है उम्मीदवार
अनिल चौहान के मुताबिक, मैं बाबू जी (हुकुम सिंह) के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ था लेकिन पार्टी ने मेरे साथ गलत किया। मैं समाजवादी पार्टी के बड़े नेता से महज 1100 वोटों से हारा और पार्टी ने मुझे नजरअंदाज कर दिया। उनका कहना है कि बीजेपी ने भाई-भतीजावाद के नाम पर फिर धोखा दिया। दूसरी ओर बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि पार्टी ने सबसे अच्छे उम्मीदवार को टिकट दिया है। वहीं पलायन के मुद्दे पर बीजेपी सांसद ने कहा कि कुछ समय पहले तक अनिल चौहान इस मुद्दे पर मेरे साथ थे और अब अचानक ही उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। मतदाता इस मुद्दे को अच्छे से समझते हैं।

क्या कैराना में बीजेपी का दांव होगा कामयाब?
पिछले साल जून में बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने 300 हिंदू परिवारों के कैराना से पलायन का मुद्दा उठाया था। उनका आरोप था कि कैराना में एक गैंग की धमकी के चलते परिवार पलायन को मजबूर हुए। उनका कहना था कि इस गैंग में विशेष समुदाय के लोग हैं। समाजवादी पार्टी ने यहां से नाहिद हसन को ही टिकट दिया है। यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली के बाद हसन को उम्मीद है कि उन्हें फिर से जीत मिलेगी। कैराना में करीब 2.7 लाख मतदाता हैं। इसमें 1.3 लाख मुस्लिम वोटर हैं। इनके अलावा गुज्जर, जाट और कश्यप वोटर भी क्रमशः 25 हजार के आस-पास हैं। कैराना विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग 11 फरवरी को पहले चरण में ही है।












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