दलित ही होगा मायावती का उत्तराधिकारी; 'बहनजी' के बयान के क्या हैं मायने, हमेशा नंबर दो ही रहेंगे सतीश मिश्रा
लखनऊ, 27 अगस्त: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को आखिरकार सामने आकर पिछले कई दिनों से सीएम चेहरे को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि उनका अगला उत्तराधिकारी भी दलित समाज से ही होगा। दरअसल पिछले एक सप्ताह से यूपी की सियासत में ऐसी खबरें तैर रहीं थीं राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा को बसपा चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित कर सकती है। सियासी गलियारे में उठ रही इन अटकलों पर बहनजी को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। मायावती के बयान के बाद यह तय हो गया है कि सतीश चंद्र मिश्रा अब पार्टी में नंबर दो ही रहेंगे।

उत्तर प्रदेश में कुछ दिनों पहले ही लखनऊ में कुछ जगहों पर पोस्टर लगाए गए थे। इन तस्वीरों में इस बात का जिक्र किया गया था कि बसपा के वरिष्ठ नेता औ राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा अगले चुनाव में पार्टी का सीएम फेस हो सकते हैं। ये खबरें सामने आने के बाद स्वयं सतीश चंद्र मिश्रा को कई बार सफाई देनी पड़ी लेकिन खबरें लगातार छप रहीं थीं। मीडिया में पैदा हो रहे इस भ्रम को दूर करने के लिए ही बहनजी को आज सामने आना पड़ा। अपनी प्रेस कांफ्रेंस के बाद जारी बयान में उन्होंने सतीश चंद्र मिश्रा के नाम का उल्लेख किया है। यह भी कहा है कि इस तरह के सवाल पूछे जा रहे थे जिसपर जवाब देना जरूरी हो गया था।

मायावती को दलितों से प्रेम लेकिन आज तक खड़ी नहीं हुई सेकेंड लाइन
मायावती ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसी दलित को ही अपना उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा तो कर दी लेकिन किसी दलित को अपनी पार्टी में भी सेकेंड मैन के तौर पर किसी के नाम को आगे नहीं बढ़ाया। अब मायावती द्वारा दलित वर्ग के उत्तराधिकारी की घोषणा उनकी सोशल इंजीनियरिंग पर भी धक्का पहुंचा सकती है। राजनीतिक विश्लेष्कों की माने तो मायावती के रहते पार्टी में आज तक कोई ऐसा दलित चेहरा सामने नहीं आया जो उनका उत्तराधिकारी बनने की हैसियत रखता हो। या यूं कहें कि किसी चेहरे को मायावती अपने आसपास भी फटकने देना नहीं चाहतीं।

भीम आर्मी के चीफ़ भी कर चुके हैं मुलाकात की कोशिश
बीएसपी की मुखिया मायावती के दलित को उत्तराधिकारी बनाने वाले बयान पर भीम आर्मी ने तंज कसा है। भीम आर्मी के चीफ़ चंद्रशेखर कई बार मायावती से मिलने का समय मांग चुके हैं लेकिन माया ने उनको मिलने का मौका नहीं दिया। हालाकि चंद्रशेखर कई मौकों पर प्रियंका के साथ नजर आ चुके हैं जिसके बाद माया ने उन्हें कभी लिफ्ट नहीं दिया। बार बार चंद्रशेखर भी सार्वजनिक मंचों से भीम आर्मी के आंदोलन का जिक्र करते रहे हैं। मायावती भी कई बार अपने बयानों में चंद्रशेखर के नाम को खारिज कर चुकी हैं।
राजनीतिक विश्लेषक और दलित चिंतक जीबी पंत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बद्री नारायण कहते हैं कि,
''मायावती अपने समाज को क्लियर मैसेज देना चाहती हैं कि समाज के अंदर नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम की स्थिति पैदा न हो। जातीय पार्टियों में लीडरशिप डेवलप करने के कोई मायने नहीं होते हैं। जिसको लेकर आगे आयेंगी समाज उसी को स्वीकार कर लेगा। रही बात सतीश मिश्रा की तो वो पहले भी नंबर दो थे और मायावती के इस बयान के बाद भी अब वो नंबर दो बने रहेंगे।''
कभी मायावती ने दिया था दलित-ब्राह्मण गठजोड़ का नारा
16 वर्ष पहले ब्राह्मणों दलितों के गठजोड़ का नारा देकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली मायावती को इस वर्ष फिर ब्राह्मणों की याद आयी है लेकिन दलित वर्ग के उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा ब्राह्मणों को नाराज भी कर सकता है। मायावती सोशल इंजीनियरिंग के सहारे ही 2007 में सत्ता पर काबिज हो गईं थी लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके कई फैसलों ने अपर कास्ट को पीड़ा देने का काम किया। मायावती के इसी रवैए की वजह से 2012 में सोशल इंजीनियरिंग का नारा ध्वस्त हो गया। लाख प्रयासों के बावजूद भी मायावती 2017 में उस मुकाम पर नहीं पहुंच सकीं जहां वो 2007 में हुआ करती थीं।

क्या मायावती के बयान का प्रबुद्ध सम्मेलनों पर पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी इस समय प्रबुद्ध सम्मेलनों में जुटी हुई है। इन सम्मेलनों में पार्टी के हर वर्ग के लोग शामिल हो रहे है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि मायावती के इस बयान से पार्टी के लोगों में निराशा फैलेगी। इस तरह के बयानों से बहन जी को बचना चाहिए। वो किसे अपना उत्तराधिकारी बनाती हैं किसे नहीं ये तो उनका ही अधिकार है लेकिन इसको सार्वजनिक तौर पर कहने कि कोई जरूरत नहीं हैं।












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